UP में राज्यपाल की मंजूरी के बाद नई मजदूरी दरें लागू: नोएडा हिंसा के बाद योगी सरकार ने 203 ठेकेदारों का लाइसेंस किया रद्द, 24 कंपनियाँ होंगी ब्लैकलिस्ट

उत्तर प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी को लेकर लंबे समय से चल रही असमंजस की स्थिति को खत्म करते हुए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार द्वारा तय की गई नई मजदूरी दरों को राज्यपाल की मंजूरी मिल गई है। नोटिफिकेशन जारी होने के बाद अब यह पूरे प्रदेश में कानूनी रूप से लागू हो गई हैं।

श्रम विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, ये नई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएँगी और सभी नियोक्ताओं के लिए इनका पालन अनिवार्य होगा। यह निर्णय नोएडा में मजदूरी को लेकर श्रमिकों और उद्योगों के बीच टकराव के बाद लिया गया है।

प्रदेश को तीन श्रेणियों में बाँटते हुए नई न्यूनतम मजदूरी दरें तय की गई हैं, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों में जीवन-यापन की लागत के अनुसार उचित वेतन सुनिश्चित किया जा सके। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई मजदूरी दरों के लागू होने के बाद किसी भी प्रकार की कटौती या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।

किस जिले में मिलेगी कितनी मजदूरी?

उत्तर प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी को तीन हिस्सों में बाँटा गया है। पहली श्रेणी में गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद जैसे जिले आते हैं जहाँ रहने का खर्च ज्यादा है। यहाँ अकुशल मजदूर को 13,690 रुपए, अर्द्धकुशल को 15,059 रुपए और कुशल मजदूर को 16,868 रुपए प्रति महीने मिलेंगे।

दूसरी श्रेणी में वे जिले शामिल हैं जहाँ नगर निगम है। यहाँ अकुशल मजदूर को 13,006 रुपए, अर्द्धकुशल को 14,306 रुपए और कुशल मजदूर को 16,025 रुपए प्रति महीने तय किए गए हैं। तीसरी श्रेणी में बाकी सभी जिले आते हैं। यहाँ अकुशल मजदूर को 12,356 रुपए, अर्द्धकुशल को 13,590 रुपए और कुशल मजदूर को 15,224 रुपए प्रति महीने मिलेंगे। इन सभी मजदूरी दरों में मूल वेतन के साथ महँगाई भत्ता भी शामिल है।

नोएडा हिंसा पर सख्त योगी सरकार

नोएडा हिंसा पर भी प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। श्रम कानूनों के उल्लंघन के आरोप में 203 ठेकेदारों के लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है जबकि 24 कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया जा रहा है। जिन ठेकेदारों पर श्रमिकों को वैधानिक लाभों से वंचित करने का आरोप है, उन्हें नोटिस जारी कर बकाया भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं। श्रम विभाग ने करीब 1.16 करोड़ रुपए के बकाया का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए भी कार्रवाई तेज कर दी है।