पाकिस्तान फिलहाल ईरान और अमेरिका के युद्ध में बिचौलिया की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर की राष्ट्रपति ट्रंप तारीफ कर रहे हैं। हालाँकि अमेरिका के लोग समझ रहे हैं कि पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
पाकिस्तान भरोसे के लायक नहीं- बिल रोगियो
अमेरिका स्थित थिंक-टैंक, ‘फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज़’ के बिल रोगियो ने फॉक्स न्यूज से बातचीत ने कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप को पाकिस्तानियों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। यह एक धोखेबाज सहयोगी रहा है। अफगानिस्तान में भी उसने एक धोखेबाज ‘सहयोगी’ की भूमिका निभाई थी। वह अंदर ही अंदर तालिबान का साथ दे रहा था और ऊपर से अमेरिका से दोस्ती का दिखावा कर रहा था।
उन्होंने आगे कहा, “फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के साथ संबंध हैं और इसलिए ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ा ‘रेड फ्लैग’ (खतरे की घंटी) माना जाना चाहिए।”
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम कराने की जिम्मेदारी पाकिस्तान को सौंपी है। ऐसे समय में अमेरिकी थिंक टैंक के रूप में अहम भूमिका निभा रहे बिल रोगियों की टिप्पणी काफी मायने रखती है। अमेरिका का पाकिस्तान पर विश्वास करने पर सवाल उठ रहे हैं।
वैसे पाकिस्तान हमेशा से दोमुँहें साँप की तरह है। भारत के साथ एक तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाता है, वही पीछे से करगिल में घुसपैठ कराता है। पहलगाम में आतंकियों से निहत्थे पर्यटकों को निशाना बनाता है। अफगानिस्तान के साथ भी उसके संबंध धोखे की वजह से ही निचले स्तर पर चले गए हैं। खुद आतंकियों की पनाहगाह बना पाकिस्तान अब ईरान युद्ध में बिचौलिया बना हुआ है।
फॉक्स मीडिया के मुताबिक, अब अमेरिका- ईरान सीधा संवाद कर रहे हैं। अप्रैल 2026 में ही इस्लामाबाद ने ईरान और अमेरिका के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के बीच आमने-सामने की बातचीत हुई थी, हालाँकि ये चर्चाएँ बिना किसी ठोस नतीजे के ही खत्म हो गईं।
तुरंत कोई नतीजा न निकलने के बावजूद कूटनीतिक बातचीत जारी है। दोनों पक्ष 22 अप्रैल की संघर्ष-विराम की समय-सीमा से पहले किसी संभावित समझौते की संभावनाएँ तलाश रहे हैं।
ईरान के जवाब का इंतजार
तनाव अभी भी बना हुआ है, लेकिन अधिकारी समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के संकेत दे रहे हैं। AP की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ ने बताया है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने, एक मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए हाल ही में तेहरान के सामने कुछ प्रस्ताव रखे हैं।
इस पर ईरान ने अभी तक औपचारिक रूप से कोई जवाब नहीं दिया है और इस बात पर जोर दिया है कि आगे की बातचीत इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका अपनी माँगें को लेकर न अड़े और जमीनी हकीकत के मुताबिक फैसला ले।

