उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (FRI) रेंजर्स कॉलोनी स्थित एक मजार को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। कॉन्वेंट रोड पर स्थित इस मजार को पहले वक्फ रिकॉर्ड में ‘UK DD 0334’ के नाम से दर्ज किया गया था लेकिन अब ‘उम्मीद’ पोर्टल पर दस्तावेजी सत्यापन के दौरान इसके पास जमीन से जुड़े कोई वैध कागजात नहीं मिले हैं।
केंद्र सरकार ने वक्फ संपत्तियों को दस्तावेजों के साथ ‘उम्मीद’ पोर्टल पर दर्ज कराने की समय-सीमा बढ़ाई थी लेकिन कई संपत्तियाँ जरूरी मालिकाना दस्तावेज न होने के कारण दर्ज नहीं हो सकीं। जाँच में यह भी सामने आया है कि कुछ संपत्तियाँ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के बाद वक्फ रिकॉर्ड में शामिल कर दी गई थीं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देहरादून की यह मजार वन विभाग की सरकारी भूमि पर बनी है। जिस सैयद जमाल शाह के नाम पर यह मजार बनाई गई है उनके नाम से अन्य जगहों पर भी मजारें होने के कारण वास्तविक दफन स्थल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
मजार को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएँ भी सामने आई हैं। हर गुरुवार को यहाँ भारी भीड़ जुटती है और इसके लिए अवैध रास्ते खोले गए हैं। आरोप है कि यहाँ ताबीज और झाड़-फूँक के नाम पर लोगों से पैसे वसूले जाते हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जमीन से जुड़े वैध दस्तावेज न मिलने के बाद जिला प्रशासन अब इस निर्माण पर नोटिस देने की तैयारी में है। उत्तराखंड सरकार पहले ही सरकारी भूमि पर बनी करीब 600 अवैध मजारें हटाने का अभियान चला चुकी है।

