महाराष्ट्र में भी होगा UCC लागू, मसौदा तैयार करने के लिए रिटायर हाईकोर्ट के जज की अगुवाई में बनेगी समिति: विधानसभा में फडणवीस सरकार ने घोषणा की

महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने हाल ही में विधानसभा में घोषणा की है कि यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेषज्ञ पैनल का गठन किया जा रहा है। ये समिति उत्तराखंड समेत देश के दूसरे राज्यों में लागू यूसीसी कानून का अध्ययन करेगी और फिर अपनी रिपोर्ट देगी।

UCC कानून लागू करने को लेकर प्रतिबद्ध

गृह राज्य मंत्री ने विधानसभा में सवालों का जवाब देते हुए कहा कि यूसीसी विधेयक लागू करने को लेकर महायूति सरकार प्रतिबद्ध है। उत्तराखंड में लागू यूसीसी कानून का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में इस कानून के द्वारा बहुविवाह पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। इसका उल्लंघन करने पर 7 वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

तीन तलाक की शिकायतों पर सरकार का जवाब

बीजेपी विधायक देवयानी फरांडे ने विधानसभा में ‘ध्यान आकर्षण प्रस्ताव’ के जरिए तीन तलाक का मुद्दा उठाया। नासिक से सामने आए कई मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ‘तीन तलाक विरोधी कानून’ होने के बावजूद कुछ मुस्लिम महिलाओं को अपने शौहर द्वारा तुरंत तलाक दे दिया जाता है। उन्हें धमकियों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है।

फरांडे ने तर्क दिया कि भले ही संसद ने 2019 में तीन तलाक को अपराध घोषित कर दिया था, लेकिन जमीनी स्तर पर इसे लागू करने में अभी भी चुनौतियाँ हैं। उन्होंने ऐसे मामलों का हवाला दिया जिनमें महिलाओं को फोन पर तलाक-तलाक-तलाक कह दिया गया। उनके निजी वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई, उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें बिना किसी आर्थिक मदद के छोड़ दिया गया।

उन्होंने पाकिस्तान जैसे देशों की प्रथाओं का भी जिक्र किया, जहाँ दूसरा निकाह करने से शौहर को अपनी पहली बीवी से अनुमति लेनी पड़ती है। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा के लिए और मजबूत सुरक्षा उपायों की जरूरत पर भी बल दिया।

विधानसभा में तीखी बहस

इस चर्चा के दौरान सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक जयंत पाटिल ने सवाल उठाया कि विधानसभा में इस प्रस्ताव को मंजूरी क्यों दी गई। कॉन्ग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने तर्क दिया कि तीन तलाक विरोधी कानून एक केंद्रीय कानून है और सवाल किया कि क्या राज्य विधानसभा में इस मुद्दे पर बहस होनी चाहिए।

एनसीपी विधायक सना मलिक ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं हैं और बताया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ इस्लामिक सिद्धांतों पर आधारित हैं। सत्ताधारी गठबंधन के सदस्यों ने इसका कड़ा विरोध किया।

उनकी टिप्पणियों का जवाब देते हुए बीजेपी विधायक अतुल भातखलकर ने कहा, “देश संविधान के अनुसार चलता है, न कि किसी धार्मिक ग्रंथ के अनुसार।”

सरकार का कहना है कि यह मुद्दा महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा है। सरकार के रुख का बचाव करते हुए कदम ने कहा कि यह चर्चा किसी धर्म को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि महिलाओं को न्याय और सम्मान दिलाने के लिए है।

कदम ने विधानसभा को जानकारी दी कि 2024 में तीन तलाक से जुड़े 42 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 152 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 2025 में 39 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 137 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हुई और 95 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया।

कदम ने जोर देकर कहा कि भविष्य में आने वाला कोई भी ‘समान नागरिक संहिता’ (Uniform Civil Code) किसी खास समुदाय के खिलाफ नहीं होगा और कहा कि सरकार का ध्यान सभी नागरिकों, खासकर महिलाओं के लिए समान अधिकार और कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है।