फ्रांस के नीस शहर में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स 2026’ के मंच से राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का संबोधन भारत-फ्रांस संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने वैश्विक समुदाय को स्पष्ट संदेश दिया कि यूरोप को अब भारत के प्रति अपने पुराने दृष्टिकोण को छोड़ना होगा। मैक्रों की इन बातों के गहरे आर्थिक और रणनीतिक मायने हैं। रक्षा सौदों में ‘मेक इन इंडिया’ को प्राथमिकता, भारतीय स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय सहयोग और अत्याधुनिक AI तकनीक साझा करने जैसे कदम यह साबित करते हैं कि भारत अब सिर्फ तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि फ्रांस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर भविष्य की रूपरेखा तैयार करने वाला एक बराबर का साझेदार है।
फ्रांस अब कूटनीतिक वादों के साथ-साथ ‘फ्रेंच टेक’, ‘चूज़ फ्रांस’ और ‘फ्रांस 2030’ जैसे अपने प्रमुख तकनीकी अभियानों के दरवाजे भारतीय स्टार्टअप्स के लिए पूरी तरह से खोल रहा है। इसके अलावा, आगामी ‘विवाटेक समिट 2026’ (VivaTech 2026) में दोनों देश मिलकर भारतीय इनोवेशन को यूरोपीय बाजार में बड़े पैमाने पर लॉन्च करने की तैयारी में हैं।
नीतियों और समझौतों से परे, इस तकनीकी साझेदारी की असली और जमीनी तस्वीर तब दुनिया के सामने आई, जब इसी समिट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
इस प्रदर्शनी में उत्तराखंड के युवाओं द्वारा तैयार किया गया एक ऐसा नवाचार भी शामिल था, जिसने पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति को भी अचंभे में डाल दिया। वायरल हो रहे इस वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को एक छोटी सी डिवाइस के बारे में बेहद बारीकी से समझाते हुए नजर आ रहे हैं। यह डिवाइस करोड़ों लोगों की जान बचाने वाला स्वदेशी ‘स्पंदन ईसीजी’ (Spandan ECG) है। यह भारत के उस स्टार्टअप का कमाल है, जिसने अपनी तकनीक से वैश्विक मंच पर अपना लोहा मनवाया है।
सौरभ बडोला, रजत जैन, साबित रावत और नितिन चंदोला की कोर टीम ने मिलकर ‘स्पंदन’ (Spandan) को विकसित किया है। माचिस की डिब्बी के आकार का यह पोर्टेबल ईसीजी उपकरण हृदय संबंधी असामान्यताओं का शुरुआती चरण में ही पता लगाने में सक्षम है। इस नवाचार का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाना और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम छोर तक चिकित्सा सुविधाएँ (Last-mile connectivity) पहुँचाना है, ताकि समय रहते लोगों की जान बचाई जा सके।
यह डिवाइस उत्तराखंड के युवाओं की मेहनत का परिणाम है। इनकी कंपनी ‘सनफॉक्स टेक्नोलॉजी’ (Sunfox Technologies) ने जिस तरह से हेल्थ-टेक के क्षेत्र में क्रांति लाई है, वह काबिले तारीफ है। यह उपकरण न केवल पोर्टेबल है, बल्कि दिल की समस्याओं को घंटों पहले भांप लेने का दावा करता है।
इस सफर की शुरुआत ‘शार्क टैंक इंडिया’ (Shark Tank India) के मंच से हुई थी, जहाँ से इस आइडिया ने देश भर में पहचान बनाई। इसके बाद, माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) में भारत के स्वदेशी मेडिकल नवाचारों और स्टार्टअप्स के प्रयासों की सराहना की थी, जिसमें ‘स्पंदन’ जैसे अभिनव उपकरणों की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया। आज ‘मन की बात’ से शुरू हुआ यह सफर पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों तक पहुँच चुका है।
उत्तराखंड की इस स्टार्टअप कंपनी ने अपनी अनोखी तकनीक से अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का मान बढ़ाया है। हिमालय की दुर्गम चोटियों और चारधाम यात्रा के कठिन रास्तों पर यह पोर्टेबल ईसीजी मशीन आज हजारों श्रद्धालुओं की ‘लाइफ-लाइन’ बनी हुई है।
पेरिस में आयोजित दुनिया के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी इवेंट्स में से एक, ‘विवाटेक 2026’ (VIVATECH 2026) में सनफॉक्स टेक्नोलॉजी ने अपने उत्पादों का लोहा मनवाया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने कंपनी के स्टॉल का दौरा किया। मजे की बात यह है कि इस बार ‘विवाटेक’ में भारत को ‘सेंटर ऑफ अट्रैक्शन’ बनाया गया था, जहाँ देश के 20 चुनिंदा स्टार्टअप्स को अपनी तकनीक दिखाने का मौका मिला।
दोनों नेताओं ने इस तकनीक के सामाजिक प्रभाव को काफी करीब से समझा। कंपनी के सीईओ रजत जैन ने प्रधानमंत्री को बताया कि कैसे उनके पोर्टेबल ईसीजी उपकरण कम संसाधनों वाले क्षेत्रों में भी हृदय रोगों की जांच को आसान बना रहे हैं। खास तौर पर चारधाम यात्रा मार्गों पर कंपनी का मुफ्त कार्डियक मॉनिटरिंग कार्यक्रम एक मिसाल बन चुका है।
दिलचस्प बात यह रही कि प्रधानमंत्री मोदी ने स्पंदन के संस्थापकों से यह भी पूछा कि क्या यह तकनीक अमरनाथ यात्रा जैसे दुर्गम और लो-नेटवर्क वाले इलाकों में भी काम कर सकती है। कंपनी का आत्मविश्वास से भरा जवाब था कि इसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही विकसित किया गया है।
फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों भी इस तकनीक से काफी प्रभावित दिखे और उन्होंने फ्रांस में इसके संभावित उपयोग पर चर्चा की। अब सनफॉक्स यूरोपीय मानकों के अनुसार ‘सीई’ (CE) सर्टिफिकेशन हासिल करने की प्रक्रिया में है, जिससे यूरोप के बाजार में भी ‘मेड इन इंडिया’ की गूंज सुनाई देगी। इसके अलावा, कंपनी अब ‘कार्डियक अमाइलॉइडोसिस’ (Cardiac Amyloidosis) जैसी दुर्लभ बीमारियों पर शोध के लिए फ्रांस की एक संस्था के साथ मिलकर काम कर रही है।
यह कहना गलत नहीं होगा कि उत्तराखंड की गलियों से निकला यह स्टार्टअप अब पूरी दुनिया के दिल की धड़कन सुरक्षित करने की राह पर है। ‘मन की बात’ से शुरू हुआ यह सफर आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के बढ़ते दबदबे की कहानी कह रहा है।


