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‘मेड इन इंडिया’ का ग्लोबल ‘स्पंदन’: पेरिस में मोदी-मैक्रों ने क्यों थाम लिया इस स्टार्टअप का हाथ?

उत्तराखंड की इस स्टार्टअप कंपनी ने अपनी अनोखी तकनीक से अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का मान बढ़ाया है। हिमालय की दुर्गम चोटियों और चारधाम यात्रा के कठिन रास्तों पर यह पोर्टेबल ईसीजी मशीन आज हजारों श्रद्धालुओं की 'लाइफ-लाइन' बनी हुई है।

पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों की वह वायरल वीडियो, जिसमें छिपा है करोड़ों भारतीयों की जान बचाने वाला स्वदेशी ‘स्पंदन ईसीजी’.. सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों की एक वीडियो खूब वायरल हो रही है। इस वीडियो में पीएम मोदी, मैक्रों को एक डिवाइस के बारे में बेहद बारीकी से समझाते हुए दिख रहे हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर वह डिवाइस है क्या? तो जान लीजिए, यह है ‘स्पंदन ईसीजी’ (Spandan ECG)। भारत के उस स्टार्टअप का कमाल, जिसने पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति को भी आश्चर्य में डाल दिया।

यह डिवाइस उत्तराखंड के दो युवाओं, रजत जैन और नितिन चंदोला की मेहनत का परिणाम है। इनकी कंपनी ‘सनफॉक्स टेक्नोलॉजी’ (Sunfox Technologies) ने जिस तरह से हेल्थ-टेक के क्षेत्र में क्रांति लाई है, वह काबिले तारीफ है। यह उपकरण न केवल पोर्टेबल है, बल्कि दिल की समस्याओं को घंटों पहले भांप लेने का दावा करता है।

इस सफर की शुरुआत ‘शार्क टैंक इंडिया’ (Shark Tank India) के मंच से हुई थी, जहाँ से इस आइडिया ने देश भर में पहचान बनाई। इसके बाद, माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) में भारत के स्वदेशी मेडिकल नवाचारों और स्टार्टअप्स के प्रयासों की सराहना की थी, जिसमें ‘स्पंदन’ जैसे अभिनव उपकरणों की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया। आज ‘मन की बात’ से शुरू हुआ यह सफर पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों तक पहुँच चुका है।

उत्तराखंड की इस स्टार्टअप कंपनी ने अपनी अनोखी तकनीक से अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का मान बढ़ाया है। हिमालय की दुर्गम चोटियों और चारधाम यात्रा के कठिन रास्तों पर यह पोर्टेबल ईसीजी मशीन आज हजारों श्रद्धालुओं की ‘लाइफ-लाइन’ बनी हुई है।

पेरिस में आयोजित दुनिया के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी इवेंट्स में से एक, ‘विवाटेक 2026’ (VIVATECH 2026) में सनफॉक्स टेक्नोलॉजी ने अपने उत्पादों का लोहा मनवाया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने कंपनी के स्टॉल का दौरा किया। मजे की बात यह है कि इस बार ‘विवाटेक’ में भारत को ‘सेंटर ऑफ अट्रैक्शन’ बनाया गया था, जहाँ देश के 20 चुनिंदा स्टार्टअप्स को अपनी तकनीक दिखाने का मौका मिला।

दोनों नेताओं ने इस तकनीक के सामाजिक प्रभाव को काफी करीब से समझा। कंपनी के सीईओ रजत जैन ने प्रधानमंत्री को बताया कि कैसे उनके पोर्टेबल ईसीजी उपकरण कम संसाधनों वाले क्षेत्रों में भी हृदय रोगों की जांच को आसान बना रहे हैं। खास तौर पर चारधाम यात्रा मार्गों पर कंपनी का मुफ्त कार्डियक मॉनिटरिंग कार्यक्रम एक मिसाल बन चुका है।

दिलचस्प बात यह रही कि प्रधानमंत्री मोदी ने नितिन चंदोला से यह भी पूछा कि क्या यह तकनीक अमरनाथ यात्रा जैसे दुर्गम और लो-नेटवर्क वाले इलाकों में भी काम कर सकती है। कंपनी का आत्मविश्वास से भरा जवाब था कि इसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही विकसित किया गया है।

फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों भी इस तकनीक से काफी प्रभावित दिखे और उन्होंने फ्रांस में इसके संभावित उपयोग पर चर्चा की। अब सनफॉक्स यूरोपीय मानकों के अनुसार ‘सीई’ (CE) सर्टिफिकेशन हासिल करने की प्रक्रिया में है, जिससे यूरोप के बाजार में भी ‘मेड इन इंडिया’ की गूंज सुनाई देगी। इसके अलावा, कंपनी अब ‘कार्डियक अमाइलॉइडोसिस’ (Cardiac Amyloidosis) जैसी दुर्लभ बीमारियों पर शोध के लिए फ्रांस की एक संस्था के साथ मिलकर काम कर रही है।

यह कहना गलत नहीं होगा कि उत्तराखंड की गलियों से निकला यह स्टार्टअप अब पूरी दुनिया के दिल की धड़कन सुरक्षित करने की राह पर है। ‘मन की बात’ से शुरू हुआ यह सफर आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के बढ़ते दबदबे की कहानी कह रहा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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