बिहार के डिप्टी CM के रिश्तेदार की 10.5 बीघा जमीन बचाने के लिए बदल दिया पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे का एलाइनमेंट: जानिए इंडियन एक्सप्रेस की ‘सनसनी पत्रकारिता’ का क्या है सच?

बिहार के समस्तीपुर जिले के सरायरंजन ब्लॉक में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना के रूट को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया। मीडिया के एक वर्ग और मुख्य रूप से ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि राजनीतिक प्रभाव के कारण एक्सप्रेसवे के मूल मार्ग (अलाइनमेंट) में बदलाव किया गया है।

विपक्षी दलों ने भी इस रिपोर्ट को शेयर करते हुए बिहार सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाने शुरू कर दिए। हालाँकि, नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इन सभी दावों और आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक बताया है।

क्या था ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट और विपक्ष का दावा?

द इंडियन एक्सप्रेस‘ की रिपोर्ट के अनुसार, सरायरंजन के स्थानीय निवासियों और कुछ जनप्रतिधियों ने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि एक्सप्रेसवे के 5 किलोमीटर के हिस्से (किलोमीटर 48 से 53) में जानबूझकर बदलाव किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ताओं ने दावा किया था कि सरायरंजन के विधायक और बिहार के वर्तमान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने अपने करीबी रिश्तेदार विनीत ईश्वर उर्फ बॉबी ईश्वर की 10.5 बीघा जमीन को बचाने के लिए अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल किया।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि यदि इस बदले हुए रूट पर काम होता है, तो सरायरंजन बाजार, कंकलीपुर और झाखड़ा के लगभग 150 घर, दर्जनों दुकानें और 65 साल पुराना केदार संत रामाश्रय (KSR) कॉलेज प्रभावित होगा, जिसमें 6,000 से अधिक छात्र पढ़ते हैं।

‘द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट’ को RJD ने सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री ने अपने रिश्तेदार की जमीन बचाने के लिए हजारों छात्रों के कॉलेज और सैकड़ों घरों को भ्रष्टाचार की बलि चढ़ा दिया।

NHAI का आधिकारिक स्पष्टीकरण: आरोपों को बताया पूरी तरह गलत

लगातार बढ़ते विवाद के बीच NHAI ने एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी कर सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। NHAI के अनुसार, कोई बदलाव नहीं हुआ है। पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे का रूट 15 जनवरी 2025 को ही सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता वाली ‘एलाइनमेंट अप्रूवल कमेटी’ (AAC) द्वारा फाइनल कर दिया गया था। 6 मार्च 2026 को जारी सरकारी अधिसूचना इसी मूल रूट के अनुरूप है और इसमें किसी भी स्तर पर कोई बदलाव या हेरफेर नहीं किया गया है।

NHAI ने साफ किया कि KSR कॉलेज की मुख्य इमारत पूरी तरह सुरक्षित है और इस परियोजना से प्रभावित नहीं हो रही है। केवल उसकी खाली भूमि का एक छोटा हिस्सा ही दायरे में है। विभाग ने बताया कि वर्तमान स्वीकृत रूट से केवल 92 आवासीय या वाणिज्यिक ढांचे प्रभावित हो रहे हैं। यदि वह वैकल्पिक मार्ग चुना जाता जिसकी माँग मीडिया रिपोर्ट में की जा रही थी, तो 255 से अधिक घर और दुकानें टूटतीं, जिससे और अधिक लोग विस्थापित होते।

परियोजना का महत्व और वर्तमान स्थिति

यह प्रस्तावित एक्सप्रेसवे 6 लेन का एक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर है, जिसकी लंबाई 244.93 किलोमीटर और अनुमानित लागत ₹18,000 करोड़ है। यह हाईवे वैशाली, समस्तीपुर और मधेपुरा होते हुए पूर्णिया तक जाएगा, जिससे पटना से पूर्णिया की यात्रा का समय 8 घंटे से घटकर मात्र 4 घंटे रह जाएगा।

NHAI ने स्पष्ट किया है कि रूट तय करने और भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और तकनीकी मानकों के अनुसार की गई है। वर्तमान में समस्तीपुर जिले में 64.7 किलोमीटर के हिस्से के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रशासनिक प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और प्रभावित क्षेत्रों के लिए न्यूनतम मूल्यांकन रजिस्टर (MVR) की दरें भी बढ़ा दी गई हैं।