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इंडिया टुडे की जिस खबर को पढ़ लहालोट हो रही थी मोहम्मद जुबैर एंड वामपंथी गैंग, वो निकली फर्जी: UP में 5 दिन में नहीं हुई 8056 मौतें, जानिए क्या है सच्चाई

उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी को लेकर इंडिया टुडे ने फर्जी खबर चलाई कि इससे 8,056 लोगों की मौत हो गई। इस खबर पर वामपंथी गैंग सरकार पर सवाल उठाने लगी। बाद में इंडिया टुडे ने इस रिपोर्ट को डिलीट कर दिया।

उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी को लेकर इंडिया टुडे ने फर्जी खबर चलाई है। खबर में दावा किया गया कि लू (हीटवेव) चलने के कारण राज्य में 5 दिन में 8,056 लोगों की मौत हो गई। इंडिया टुडे ने यह दावा केवल ‘फ्रंटियर्स इन एनवायरमेंटल हेल्थ’ के एक अध्ययन के आधार पर किया है। इस रिपोर्ट में लिए गए ‘आँकड़ों’ का कोई स्रोत नहीं है।

इंडिया टुडे ने यह रिपोर्ट ‘5 दिनों में 8056 मौतें: हीटवेव के दौरान उत्तर प्रदेश सबसे घातक राज्य बनकर उभरा है’ (8056 deaths in 5 days: UP emerges as India’s deadliest state during heatwaves) हेडलाइन के साथ प्रकाशित की थी। हालाँकि, अब इस रिपोर्ट को डिलीट कर दिया गया है।

(स्क्रीनशॉट साभार: X-IndiaToday)

इस हेडलाइन में साफ तौर पर उत्तर प्रदेश में 5 दिन में 8,056 मौत का आँकड़ा दिया जा रहा है। यह रिपोर्ट अध्ययन पर टिकी हुई है। अध्ययन का सोर्स विश्वसनीय है, लेकिन अध्ययन में भी सटीक आँकड़ा नहीं दिया गया है। क्योंकि हकीकत कुछ और है। इस रिपोर्ट से केवल लोगों के बीच भ्रम फैलाने का काम किया जा रहा है।

इंडिया टुडे ने किस आधार पर गढ़ी फर्जी खबर?

यह बात सही है कि इंडिया टुडे ने अपनी इस रिपोर्ट को विश्वसनीय सोर्स के हवाले से प्रकाशित किया है। इसका सोर्स ‘फ्रंटियर्स’ है, जिसने पर्यावरण स्वास्थ्य पर अध्ययन के आधार पर भारत के 10 शहरों में लू के चलते ‘अनुमानित’ मौतों के बारे में बताया है, जो कि हेडलाइन से भी साफ है-भारत के जिलों में लू के कारण होने वाली अतिरिक्त मौतों का अनुमान।

इस रिपोर्ट में बताया गया कि अध्ययन के अनुसार, ‘अनुमान’ लगाया गया कि एक दिन की भीषण गर्मी से राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 3,400 अतिरिक्त मौतें होती हैं, जबकि पाँच दिनों की लू से लगभग 30,000 मौतें होती हैं। इसमें उत्तर प्रदेश का ‘अनुमान’ लगाया गया कि राज्य में लू के दौरान पाँच दिनों में लगभग 8,100 अतिरिक्त मौते होती हैं। इसके अलावा अहमदाबाद, जयपुर और सूरत जैसे जिलों में इसे 250 से अधिक अतिरिक्त मौते बताई गईं।

(फोटो साभार: Frontiers)

यानी मौत की जो संख्या बताई जा रही है वह कहीं दर्ज नहीं है, यह केवल अनुमान है जो साल 2024 में भीषण गर्मी से हुई मौत के अध्ययन के आधार पर लिखे गए हैं। यहाँ सबसे अहम फर्क है कि वास्तव नें ‘मौत का आँकड़ा’ नहीं बताया जा रहा है बल्कि ‘अत्यधिक मृत्यु दर’ की बात हो रही है मतलब कि 5 दिन में कितनी अतिरिक्त मौत हो सकती हैं। यह अध्ययन रिपोर्ट में भी साफ लिया गया है।

रिपोर्ट में साफ लिखा गया है, “अत्यधिक मौतें और गर्मी से हुई मौतों के आधिकारिक आंकड़े अलग-अलग चीजें मापते हैं। अत्यधिक मौतें लू के दौरान सामान्य से ज्यादा हुईं सभी मौतों को गिनती हैं, चाहे मरने का कारण कुछ भी लिखा हो। वहीं गर्मी से हुई मौतों में सिर्फ वही मामले गिने जाते हैं जहाँ मौत दर्ज करते समय डॉक्टर ने साफ लिखा हो कि मौत गर्मी की वजह से हुई है। इसलिए ये दोनों आँकड़े सीधे तौर पर एक-दूसरे से तुलना करने लायक नहीं हैं।”

(फोटो साभार: Frontiers)

ऋचा चड्ढा से लेकर ‘फैक्टचेकर’ जुबैर ने भी फैलाई फर्जी खबर

इंडिया टुडे की इस फर्जी खबर को फैलाने में वाले ‘फैक्टचेकर’ जुबैर से लेकर भारतीय सेना को अपमानित करने वाली वामपंथी फिल्म एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा का भी हाथ रहा। दोनों ने अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर इंडिया टुडे की खबर को रीपोस्ट करते हुए उत्तर प्रदेश की सरकार पर सवाल उठाए।

(फोटो साभार: X-RichaChadha)

ऋचा चड्ढा ने लिखा, “क्या किसी ने इस बात पर चर्चा की कि सिर्फ एक राज्य में लू से 8000 से ज्यादा लोग मर गए हैं? ये न सामान्य है, न ही सही है। लोगों, जाग जाओ, वरना तुम्हारी जिंदगी भी बस एक आँकड़ा बनकर रह जाएगी।”

(फोटो साभार: X-zoo_bear)

इसके अलावा जुबैर ने इंडिया टुडे की हेडलाइन को लिखकर इसे रीपोस्ट किया था।

क्या है हकीकत?

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भी इंडिया टुडे की रिपोर्ट का खंडन किया है। सरकार के आपदा प्रबंधन और राहत विभाग ने कहा कि पिछले 5 दिनों से उत्तर प्रदेश के किसी भी जिले में तापमान 42 डिग्री से ऊपर नहीं गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि सिर्फ 5 जिलों में 28 मई 2026 को तापमान 45 डिग्री से ज्यादा रहा था और सबसे ज्यादा 47.5 डिग्री रिकॉर्ड हुआ था। रिपोर्ट को लेकर विभाग ने कहा कि यह गलत है और इसमें यह भी नहीं बताया गया कि डेटा कहाँ से लिया गया है।

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रामांशी
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