ईरान की राष्ट्रपति कार्यालय से जुड़ी एक गोपनीय रिपोर्ट लीक होने के बाद देश की मौजूदा स्थिति को लेकर कई बड़े दावे सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत ईरानी नागरिक किसी न किसी तरह का बदलाव चाहते हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुकी है। खास बात यह है कि रिपोर्ट सरकार को समस्याओं की जड़ दूर करने के बजाय जनता के गुस्से को नियंत्रित करने की सलाह देती है।
यह दस्तावेज ‘What Iran Wants’ शीर्षक से तैयार किया गया है। इसे राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के सामाजिक मामलों के सलाहकार और पूर्व खुफिया अधिकारी अली रबीई ने तैयार किया है। यह रिपोर्ट अप्रैल और मई में कराए गए सर्वे पर आधारित बताई गई है और जून में वरिष्ठ अधिकारियों के बीच साझा की गई थी।
सर्वे में सिर्फ 9% लोगों ने मौजूदा व्यवस्था का समर्थन किया
रिपोर्ट के मुताबिक, जब लोगों से ईरान के भविष्य को लेकर राय पूछी गई तो केवल 9 प्रतिशत लोगों ने मौजूदा व्यवस्था को जारी रखने का समर्थन किया। बाकी लोगों ने सुधार, बड़े सुधार या पूरी व्यवस्था बदलने जैसे विकल्पों को चुना।
हालाँकि, रिपोर्ट में सर्वे की कार्यप्रणाली का पूरा विवरण नहीं दिया गया है, इसलिए इसके आँकड़ों पर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। फिर भी कई विशेषज्ञों का मानना है कि ये नतीजे देश के मौजूदा माहौल से मेल खाते हैं।
जनता में गुस्सा और निराशा रिकॉर्ड स्तर पर
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान में गुस्से का स्तर दुनिया में अब तक दर्ज किसी भी देश से अधिक है। सर्वे के अनुसार 63.6 प्रतिशत लोगों ने खुद को गुस्से में बताया, जबकि पहले यह आंकड़ा काफी कम था।
इसके अलावा करीब आधी आबादी ने खुद को निराश, उदास, डरी हुई या लगातार चिंता में रहने वाला बताया। रिपोर्ट के अनुसार युवाओं और पढ़े-लिखे लोगों में यह भावना सबसे ज्यादा देखने को मिली।
युद्ध नहीं, बातचीत का रास्ता चाहते हैं लोग
अमेरिका के साथ तनाव को लेकर भी रिपोर्ट में अहम जानकारी सामने आई है। करीब 44 प्रतिशत लोगों ने युद्धविराम बनाए रखने और बातचीत जारी रखने का समर्थन किया। वहीं, बहुत कम लोगों ने अमेरिका की सभी शर्तें मानने की बात कही।
अधिकांश लोगों ने यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करने का भी विरोध किया। हालाँकि, सर्वे में यह भी सामने आया कि लोगों का भरोसा न तो बातचीत करने वाली टीम पर पूरी तरह है और न ही सैन्य नेतृत्व पर।
सरकारी दावों से अलग दिखी जनता की तस्वीर
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार जिस राष्ट्रीय एकजुटता की तस्वीर पेश कर रही है, वह पूरी तरह वास्तविक नहीं दिखती। सर्वे के अनुसार 47 प्रतिशत लोग युद्ध के दौरान आयोजित सरकारी रैलियों में कभी शामिल नहीं हुए। राजधानी तेहरान में यह आँकड़ा 61 प्रतिशत रहा। रिपोर्ट में यह भी माना गया कि राष्ट्रीय रक्षा से जुड़े स्वयंसेवी अभियान को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।
राष्ट्रीय पहचान मजबूत, लेकिन देश छोड़ने की इच्छा भी बढ़ी
सर्वे में 85 प्रतिशत से अधिक लोगों ने खुद को ईरानी होने पर गर्व महसूस करने की बात कही। खासकर युवाओं में मजहबी पहचान की तुलना में राष्ट्रीय पहचान अधिक मजबूत होती दिखाई दी।
दूसरी ओर परंपराओं का पालन लगातार घटने की बात भी रिपोर्ट में दर्ज है। इसके साथ ही करीब एक-तिहाई लोगों ने मौका मिलने पर देश छोड़ने की इच्छा जताई। 30 वर्ष से कम उम्र के युवाओं और विश्वविद्यालय शिक्षित लोगों में यह प्रतिशत और अधिक बताया गया।
सरकार को क्या सलाह दी गई?
रिपोर्ट में सरकार को राजनीतिक बदलाव की सलाह नहीं दी गई है। इसके बजाय सुझाव दिया गया है कि लोगों को यह समझाने की कोशिश की जाए कि उनकी आर्थिक परेशानियों की मुख्य वजह प्रतिबंध हैं।
साथ ही सरकारी मीडिया को अधिक समावेशी छवि दिखाने और ऐसी नीतियों से बचने की सलाह दी गई है जिनसे सरकार और समाज के बीच टकराव बढ़े। रिपोर्ट के अंत में चेतावनी दी गई है कि समाज गहरे असंतोष की स्थिति में है और यदि हालात नहीं बदले तो भविष्य में इसका गंभीर असर देखने को मिल सकता है।

