आजकल सोशल मीडिया और इंटरनेट पर एक नया विवाद तेजी से फैल रहा है। यह पूरा मामला आईफोन बनाने वाली मशहूर कंपनी एप्पल (Apple) के ‘सिरी’ (Siri) से जुड़ा है। सिरी एक ऐसा सिस्टम है जिससे हम बोलकर फोन पर काम करवाते हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब मध्य प्रदेश के उज्जैन के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने मीडिया के सामने एक Video शेयर किया। इस वीडियो में दिखाया गया कि जब आईफोन के सिरी को ‘जय श्री राम’ या ‘जय श्री महाकाल’ बोला जाता है, तो वह चुप रहता है और कोई जवाब नहीं देता।
लेकिन जैसे ही उसे ‘अस्सलाम वालेकुम’ कहा जाता है, वह तुरंत सामने से ‘वालेकुम अस्लाम’ बोल पड़ता है। यह Video देखते ही देखते इंटरनेट पर वायरल हो गया और नेटीजन्स अब एप्पल कंपनी पर ‘हिंदू विरोधी’ होने के सवाल उठा रहे हैं। मध्य प्रदेश से शुरू हुई यह बात अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुकी है। आईफोन इस्तेमाल करने वाले करोड़ों हिंदू लोग इस बात से नाराज हैं और उनका कहना है कि यह उनकी धार्मिक भावनाओं और भारतीय संस्कृति का अपमान है। अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या मोबाइल फोन के ये सिस्टम सच में किसी एक धर्म की तरफ झुके हुए हैं और इलैक्ट्रोनिक सामानों में भी भेदभाव किया जा रहा है?
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
यह पूरा झगड़ा मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर से शुरू हुआ। वहाँ के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने पत्रकारों को बुलाया और सबके सामने अपने आईफोन पर सिरी को चेक करके दिखाया। उन्होंने सिरी से कहा ‘जय श्री राम’ और ‘जय श्री महाकाल’। लेकिन आईफोन ने कोई जवाब नहीं दिया और सिरी चुप रहा। इसके तुरंत बाद जब उन्होंने ‘अस्सलाम वालेकुम’ बोला, तो सिरी ने बिना एक सेकंड गँवाए स्क्रीन पर ‘वालेकुम अस्लाम’ लिखा भी और बोलकर जवाब भी दिया।
इस बात पर कार्यकर्ता ने एप्पल कंपनी पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह साफ तौर पर हिंदुओं से भेदभाव है। उनका आरोप था, “आईफोन हमारी संस्कृति के खिलाफ काम कर रहा है और करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचा रहा है। पूरे देश में करोड़ों हिंदू शौक से आईफोन खरीदते हैं, लेकिन कंपनी हमारे साथ धोखा कर रही है। हमारा सारा डेटा इस कंपनी के पास है और यह हमारे खिलाफ एक सोची-समझी साजिश है।”
" iPhone is against the culture of India & hurts Hindu sentiments because SIRI gives replies to ' "Assalamualaikum" but remains silent on "Jai Shri Ram"
— Nehr_who? (@Nher_who) July 1, 2026
Imagine your faith getting hurt coz AI didn't say JAI Shri Ram
The level of inferiority complex 😭 pic.twitter.com/5wUw0rcp7U
कार्यकर्ता ने इस बात पर भी गुस्सा जताया कि आज भारत में आईफोन दिखाना एक फैशन बन गया है। लोग पैसे न होने पर भी कर्ज लेकर या भारी किस्तों (EMI) पर महँगे आईफोन खरीदते हैं। इसके बावजूद यह विदेशी कंपनी हमारे भगवान के नाम का सम्मान नहीं कर रही है। इस वीडियो के सामने आने के बाद इंटरनेट पर लोग आपस में भिड़ गए हैं और हर कोई अपने-अपने आईफोन पर इसे चेक करने में लगा है।
सिरी के स्क्रीनशॉट: क्या है आईफोन की स्क्रीन का सच?
सोशल मीडिया पर इस समय लोग अपने-अपने फोन के कई स्क्रीनशॉट और स्क्रीन रिकॉर्डिंग साझा कर रहे हैं। इन स्क्रीनशॉट में जो बातें निकलकर सामने आ रही हैं, वे बेहद हैरान करने वाली हैं। आइए देखते हैं कि यूजर्स के फोन में सिरी किस तरह का बर्ताव कर रहा है। नीचे 3 तस्वीरें आपकी दिखाई दे रही होंगी। इसमें से 2 तस्वीरों में ‘जय श्री राम’ और ‘जय श्री कृष्ण’ पूछने पर Siri क्या जवाब देती हैं। वहीं, तीसरी तस्वीर में ‘अस्सलाम वालेकुम’ बोलने पर सिरी ने ‘वालेकुम अस्लाम’ लिखा दिख रहा होगा।

वहीं, सोशल मीडिया पर कुछ Video भी सामने आए है।
जेमिनी और गूगल का क्या है रुख?
जब यह विवाद बढ़ा, तो लोगों ने एप्पल के सिरी की तुलना अन्य कंपनियों के वर्चुअल असिस्टेंट्स और एआई (AI) टूल्स से करनी शुरू कर दी। यूजर्स ने गूगल के असिस्टेंट और गूगल के ही नए एआई ‘जेमिनी’ (Gemini) पर ये ही आजमाया। जब जेमिनी या गूगल असिस्टेंट को ‘जय श्री राम’ बोला गया, तो उसने सम्मान के साथ तुरंत जवाब में ‘जय श्री राम’, मैं आपकी क्या सहायता कर सकता हूँ?’ कहा।
ठीक इसी तरह, जब जेमिनी से ‘अस्सलाम वालेकुम’ कहा गया, तो उसने ‘वालेकुम अस्लाम’ कहकर अभिवादन स्वीकार किया। सोशल मीडिया पर यूजर्स का कहना है कि जब गूगल और जेमिनी जैसी अन्य बड़ी टेक कंपनियाँ भारत की भाषाई और धार्मिक विविधताओं को समझ सकती हैं, तो फिर एप्पल जैसी प्रीमियम कंपनी का सिरी इतना पिछड़ा हुआ या पक्षपाती क्यों है?
गूगल के टूल्स भारतीय यूजर्स के लहजे (एक्सेंट) और सांस्कृतिक शब्दों को बहुत जल्दी कैच करते हैं। यही कारण है कि लोग अब एप्पल को आड़े हाथों ले रहे हैं कि करोड़ों रुपए का मुनाफा भारत से कमाने के बाद भी उसने अपने वॉयस असिस्टेंट को भारतीय संस्कृति के हिसाब से अपग्रेड क्यों नहीं किया।
क्या यह वाकई ‘इस्लाम-प्रेम’ है या केवल कोडिंग का खेल?
इस पूरे बखेड़े के बीच टेक जगत के जानकारों और कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों ने अपना ज्ञान बाँटना भी शुरू कर दिया है। उनका तर्क है कि यह मामला किसी ‘इस्लाम-प्रेम’ या जानबूझकर की गई हिंदू-घृणा का नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से ‘प्री-प्रोग्राम्ड ग्रीटिंग’ (पहले से तय अभिवादन) और कोडिंग का तकनीकी मामला है।
इन जानकारों का कहना है कि सिरी जैसे वर्चुअल असिस्टेंट्स भाषा की एक डिक्शनरी (शब्दकोश) पर काम करते हैं। इनके सिस्टम में कुछ बेहद गिने-चुने और दुनिया भर में सबसे ज्यादा बोले जाने वाले सामान्य ग्रीटिंग्स जैसे- ‘Hello’, ‘Hi’, ‘Assalamualaikum’, और कुछ चुनिंदा भाषाओं में ‘Namaste’ के लिए ‘हार्ड-कोडेड’ (Hard-coded) जवाब पहले से ही प्रोग्राम कर दिए जाते हैं।
उनका तर्क है कि ‘अस्सलाम वालेकुम’ को दुनिया भर में एक सामान्य ग्रीटिंग (अभिवादन) माना जाता है, जिसका मतलब ‘आप पर शांति हो’ होता है। इसके विपरीत, ‘जय श्री राम’ या ‘हर हर महाकाल’ को टेक कंपनियाँ एक धार्मिक नारा या उद्घोष (Religious Slogan) मानती हैं, न कि एक सामान्य अभिवादन। जानकारों का कहना है कि ठीक इसी वजह से सिरी की कोडिंग लिस्ट में यह शब्द शामिल नहीं था, ठीक वैसे ही जैसे ‘गुड मॉर्निंग’ एक सामान्य ग्रीटिंग है, लेकिन ‘हर हर महादेव’ या ‘अल्लाह-हू-अकबर’ धार्मिक और मजहबी नारे हैं, जिन्हें सामान्य ग्रीटिंग्स की लिस्ट में जगह नहीं मिलती।
क्या वाकई एंटी-हिंदू है सिरी या यह टेक कंपनियों की बड़ी लापरवाही है?
अब बात करते हैं इस पूरे मामले के सबसे जरूरी पहलू पर। क्या तकनीकी जानकारों की यह ‘कोडिंग और ग्रीटिंग’ वाली दलील भारतीय समाज और करोड़ों हिंदुओं के गले उतर सकती है? बिल्कुल नहीं। जब आप भारत जैसे विशाल और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देश में अपना व्यापार फैलाते हैं, तो आपको वहाँ की जमीनी हकीकत को समझना होगा। भारत में ‘जय श्री राम’ या ‘जय श्री महाकाल’ केवल कोई राजनीतिक या धार्मिक नारा नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों के रोजमर्रा के जीवन में एक-दूसरे से मिलने पर बोला जाने वाला सबसे बड़ा अभिवादन (Greeting) है। सुबह उठने से लेकर किसी मेहमान के घर आने तक, लोग इसी नाम से एक-दूसरे का स्वागत करते हैं।
ऐसे में यह कहना कि ‘जय श्री राम’ ग्रीटिंग नहीं है, सरासर खोखला और जमीनी हकीकत से दूर नजर आता है। अगर इसे केवल कोडिंग की भाषा में एक ‘मिसिंग वर्ड’ (छूटा हुआ शब्द) भी मान लिया जाए, तब भी यह सवाल उठता है कि भारत को अपना सबसे बड़ा बाजार मानने वाली एप्पल कंपनी इतनी बड़ी लापरवाही कैसे कर सकती है? जब गूगल का Gemini और अन्य वर्चुअल असिस्टेंट्स इन बारीकियों को समझकर सही जवाब दे सकते हैं, तो एप्पल का सिरी यहाँ क्यों फेल हो गया?
यही वह बिंदु है जहाँ सोशल मीडिया पर यूजर्स का यह आरोप बेहद मजबूत हो जाता है कि एप्पल का सिरी ‘एंटी-हिंदू’ (Anti-Hindu) मानसिकता या फिर घोर उपेक्षा से ग्रसित है। पश्चिमी देशों की बड़ी टेक कंपनियाँ अक्सर वैश्विक स्तर पर इस्लामी या पश्चिमी अभिवादनों को तो अपने सिस्टम में तुरंत जगह दे देती हैं, लेकिन जब बात हिंदू संस्कृति, उनके त्योहारों या उनके पवित्र अभिवादनों की आती है, तो उसे ‘रीजनल फ्रेज’ या ‘धार्मिक नारा’ कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है।
यह साफ तौर पर टेक वर्ल्ड की सांस्कृतिक असंवेदनशीलता को दर्शाता है। अगर करोड़ों भारतीय उपभोक्ता इन कंपनियों के महँगे फोन खरीदकर इन्हें अरबों डॉलर का बिजनेस दे रहे हैं, तो वे बदले में अपनी संस्कृति और आस्था का सम्मान भी चाहते हैं। इसे सिर्फ एक तकनीकी बग (Bug) कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। एप्पल ने अभी तक इस पूरे विवाद पर कोई सफाई जारी नहीं की है। जब तक एप्पल इस तकनीकी खामी को सुधारकर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं करता, तब तक भारत के बहुसंख्यक समाज में यह नाराजगी और यह सवाल बिल्कुल वाजिब रहेगा कि आखिर टेक की दुनिया में हिंदुओं की भावनाओं को हमेशा हाशिए पर क्यों रखा जाता है?


