अपनी यात्रा के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 2015 में वाराणसी में हुए लाठीचार्ज का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) की तत्कालीन सरकार का बचाव करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उस समय उनके ऊपर हुई कार्रवाई को आज के राजनीतिक संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है और उनका उद्देश्य केवल धर्म और उससे जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाना है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “जिस समय हम सपा का विरोध कर रहे थे, काशी में 2015 में हमारे ऊपर लाठी चलाई गई थी। उस समय भाजपा ये सवाल नहीं पूछ रही थी। उस समय हमारे अगल-बगल करीब 5000 बीजेपी के लोग खड़े थे, इसलिए अखिलेश यादव ने हमें बीजेपी का समझकर लाठी चलवा दी। उस समय हम अच्छे थे और आज हम बीजेपी के आलोचक हो गए।”
Ayodhya, Uttar Pradesh: Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati says, "When the Samajwadi Party had lathis used against us, no one asked these questions. At that time, BJP workers stood with us. In 2015, when we were protesting against the Samajwadi Party in Kashi,… pic.twitter.com/f3d2QHNc55
— IANS (@ians_india) July 17, 2026
उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी और कॉन्ग्रेस दोनों ही राजनीतिक दल हैं और उनका किसी पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, “हम बीजेपी-कॉन्ग्रेस नहीं देखते हैं। हम अपने मुद्दों की लड़ाई लड़ते हैं। हमें सत्ता से कुछ लेना-देना नहीं है। हम कोई सरकारी सुविधा नहीं लेते, अपने स्कूलों के लिए सरकार से ग्रांट भी नहीं लेते, क्योंकि हम मानते हैं कि सरकार के पैसे में वह पवित्रता नहीं है।”
आखिर 2015 में सपा सरकार के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ क्या हुआ था?
साल 2015 में उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सपा सरकार के दौरान वाराणसी में गंगा नदी में मूर्ति विसर्जन पर रोक लगी थी। इसी के विरोध में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के नेतृत्व में साधु-संत और बटुक वाराणसी के गोदौलिया चौराहे पर गणेश प्रतिमा के साथ धरने पर बैठ गए थे।
संतों की माँग थी कि सनातन परंपरा के अनुसार विसर्जन गंगा में ही हो। करीब 36 घंटे चले इस शांतिपूर्ण धरने को खत्म कराने के लिए 22 सितंबर 2015 की रात पुलिस ने संतों पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद समेत कई संत गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
बाद में इस लाठीचार्ज के विरोध में अक्टूबर 2015 में संतों ने ‘अन्याय प्रतिकार यात्रा’ निकाली, जिसके दौरान वाराणसी में भारी हिंसा और आगजनी हो गई। इसके बाद पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और कई अन्य लोगों पर मुकदमा दर्ज किया, जिससे संत समाज में भारी आक्रोश फैला था। यह मामला कोर्ट तक भी पहुँचा था, अक्टूबर 2023 में ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को कोर्ट ने बरी किया था।

