बांग्लादेश में भगवान राम की प्रतिमा बनवा रहे थे हरिदास, मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगा जेल में ठूँसा: सड़क पर उतरे हिंदू

बांग्लादेश में सरकार बदलने के बाद भी हिंदुओं के हालात बदतर होते जा रहे हैं। 81 फीट ऊँची भगवान राम की प्रतिमा बनाने की पहल करने वाले हरिदास चंद्र तरणी दास की गिरफ्तारी के बाद अल्पसंख्यक संगठन से जुड़े लोग सड़कों पर उतर आए हैं और उनकी रिहाई की माँग कर रहे हैं।

दरअसल, गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी स्थित श्री श्री राधा गोबिंद काली मंदिर के अध्यक्ष हरिदास को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद ने सरकार पर हिंदू समुदाय को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।

परिषद का कहना है कि भगवान राम की जिस प्रतिमा को लेकर महीनों तक इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों ने विरोध किया, धमकियाँ दीं और निर्माण कार्य रुकवाया, उसी मामले के केंद्र में रहे मंदिर अध्यक्ष को अब आर्थिक अपराध के आरोप में जेल भेज दिया गया है। वहीं, जिन्होंने ने धार्मिक उन्माद फैलाया, उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।

भगवान राम की प्रतिमा पर शुरू हुआ विवाद

हरिदास चंद्र तरणी दास ने गाइबांधा के पलाशबाड़ी स्थित श्री श्री राधा गोबिंद काली मंदिर परिसर में 81 फीट ऊँची भगवान राम की प्रतिमा बनाने की घोषणा की थी। इसके सामने आते ही कई इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, निर्माण कार्य में जुड़े लोगों को धमकियाँ मिलने लगीं जिसके बाद प्रतिमा का निर्माण रोक दिया गया।

इस हंगामे के कुछ ही सप्ताह बाद 12 जुलाई की रात पुलिस ने हरिदास को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें पहले पुलिस रिमांड पर भेजा गया और बाद में ढाका भेज दिया गया। बांग्लादेश की क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने हरिदास के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया है।

हरिदास के मुस्लिम बनने का दावा

CID का दावा है कि उनके बैंक और मोबाइल फाइनेंशियल सर्विस (MFS) खातों में 9.35 करोड़ टका के संदिग्ध लेन-देन मिले हैं। पुलिस ने यह भी दावा किया कि हरिदास पहले अवैध रूप से भारत गए थे और वहाँ से 2010 में लौटे और 2019 में इस्लाम धर्म अपनाकर तौहीद इस्लाम नाम रख लिया। जाँच एजेंसी के अनुसार, प्रारंभिक जाँच में स्थानीय और विदेशी मुद्रा की कथित हेराफेरी के संकेत भी मिले हैं।

क्या मंदिर का प्रबंधन अपराध है: हरिदास

कोर्ट में पेशी के दौरान हरिदास चंद्र तरणी दास ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “अगर मंदिर का प्रबंधन करना ही अपराध है तो मैं कुछ नहीं कर सकता।”

उन्होंने यह भी कहा कि जिस धन को संदिग्ध बताया जा रहा है, वह मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के दान का पैसा था। उनका कहना था कि यदि जांच एजेंसियों को संदेह है तो यह साबित करें कि उस धन का किसी गैरकानूनी काम में इस्तेमाल हुआ है।

हरिदास की गिरफ्तारी के बाद बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। संगठन ने कहा कि लंबे समय से कट्टरपंथी समूह भगवान राम की प्रतिमा का विरोध कर रहे थे, हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचा रहे थे और पूरे देश में धार्मिक तनाव का माहौल बना रहे थे।

इसके बावजूद सरकार ने उन लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उल्टा जिस व्यक्ति को लगातार धमकियाँ मिल रही थीं, उसी को गिरफ्तार कर दिया गया। परिषद ने हरिदास चंद्र तरणी दास की तत्काल रिहाई, उनके खिलाफ दर्ज मामला वापस लेने और ISKCON नेता चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी की भी रिहाई की माँग की। प्रदर्शन के दौरान परिषद के नेताओं ने सरकार से धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करने, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पूजा स्थलों के निर्माण में हस्तक्षेप बंद करने की भी माँग की है।