23 साल फैलाई दहशत, हिंदू व्यापारियों को चुन-चुनकर मारा: कैराना में पलायन के पीछे जिस फुरकान का था हाथ, वो एनकाउंटर में ढेर; 4 साल से था फरार

उत्तर प्रदेश के कैराना में हिंदू परिवारों के पलायन की वजह बना 1 लाख रुपए का इनामी अपराधी मोहम्मद फुरकान बुधवार (5 अगस्त 2026) को शामली में मुठभेड़ के दौरान ढेर कर दिया गया।

जानकारी के मुताबिक, 4 साल से फरार चल रहे फुरकान के बारे में पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी। इसी के बाद स्वाट और स्थानीय पुलिस ने शामली के झिंझाना थाना क्षेत्र में घेराबंदी की। पुलिस ने उसे सरेंडर का मौका भी दिया लेकर उसने आत्मसमर्पण करने के बजाय खाकी पर ही गोलियाँ बरसानी शुरू कर दीं।

पुलिस की जवाबी कार्रवाई में फुरकान गंभीर रूप से घायल हुआ और अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया। उसके पास से भारी मात्रा में कारतूस और अत्याधुनिक हथियार बरामद हुए हैं।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि उसका आतंक फैलाने का काम 2003 से ही चल रहा था। फुरकान के ऊपर 30 से ज्यादा मामले दर्ज थे।

हिंदुओं की हत्या

गौरतलब है कि साल 2014 में फुरकान कुख्यात मुकीम काला गैंग में शामिल हुआ था। इस गैंग ने कैराना के हिंदू व्यापारियों में ऐसा खौफ पैदा किया कि पूरा इलाके के हिंदुओं में डर बैठ गया था।

अगस्त 2014 में फुरकान ने रंगदारी न देने पर कैराना के प्रमुख किराना व्यापारी नेता विनोद सिंघल की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद फुरकान और उसके गैंग ने रंगदारी के लिए व्यापारी राजेंद्र, शिवकुमार और ईश्वरचंद जैसे कई अन्य कारोबारियों को निशाना बनाया। इन घटनाओं ने और लगातार मिल रही धमकियों के कारण व्यापारियों का व्यापार करना दूभर हो गया था।

कैराना के हिंदुओं का पलायन

मुकीम काला और फुरकान के इस खौफनाक आतंक के कारण कैराना का माहौल पूरी तरह बिगड़ गया। रंगदारी, हत्या और लूट की वारदातों से परेशान होकर कई हिंदू व्यापारी और परिवार अपने पुस्तैनी मकानों पर ताले लगाकर कैराना से पलायन करने को मजबूर हो गए।

मई 2016 में जब तत्कालीन स्थानीय सांसद हुकुम सिंह ने कैराना से पलायन करने वाले 346 हिंदू परिवारों की सूची जारी की, तो यह मामला पूरे देश में उठा। इस पलायन कांड ने प्रदेश की तत्कालीन अखिलेश सरकार की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए और ये मुद्दा सबके सामने आया कि कैसे सपा सरकार में इस्लामी गैंग्स्टर खुला घूम रहे हैं और हिंदू डर में जीने को मजबूर हैं।

बाद में साल 2017 में जब योगी सरकार बनी तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने कैराना पहुँचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी और उन्हें सुरक्षा का भरोसा देकर वापस बसाया था। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की और फुरकान को 10 साल की सजा मिली। पलायन का मुख्य आरोपित फुरकान कोर्ट से सजा पाने के बावजूद जमानत पर छूटकर पिछले 4 साल से फरार चल रहा था और लगातार पुलिस को चकमा दे रहा था।