अगस्त 2024 में बांग्लादेश की सत्ता से बेदखल होने के ठीक दो साल बाद, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने नई दिल्ली से अपना पहला सार्वजनिक और लाइव संबोधन दिया है। यह कार्यक्रम नई दिल्ली के ‘फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ़ साउथ एशिया’ में आयोजित किया गया था, जहाँ उनका चेहरा नहीं दिखाया गया बल्कि वर्चुअल माध्यम से उनकी आवाज का लाइव प्रसारण किया गया।
भाषण की शुरुआत करते ही शेख हसीना बुरी तरह रो पड़ीं और भावुक हो गईं। बड़ी मुश्किल से खुद को संभालते हुए उन्होंने कहा कि आज वे सिर्फ एक पूर्व प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की बेटी के रूप में बात कर रही हैं।
अपने परिवार के सदस्यों को याद करते हुए उनकी आँखें नम हो गईं, क्योंकि 1975 में ढाका में उनके परिवार के अधिकांश सदस्यों की हत्या शेख मुजीबुर रहमान के साथ ही कर दी गई थी। इस संबोधन के दौरान उन्होंने साफ किया कि वे अपने मुल्क से दूर जरूर हैं, लेकिन अपने लोगों से कभी अलग नहीं हुई हैं।
उन्होंने कहा कि उनका परिवार और वे खुद हमेशा बांग्लादेश के लिए लड़े हैं। यह वह बांग्लादेश नहीं है, जिसके लिए 1971 में तीस लाख लोगों ने अपनी कुर्बानियाँ दी थीं। उनके इस दर्द भरे संबोधन ने एक बार फिर पड़ोसी देश के राजनीतिक हालात को दुनिया के सामने लाकर रख दिया है। शेख हसीना ने रोते हुए कहा, “मुझे पता है कि वे मुझे जेल में डाल सकते हैं या मार भी सकते हैं, फिर भी मैं दिसंबर में बांग्लादेश वापस जाउँगी। लोगों का समर्थन मेरे लिए बहुत जरूरी है। मौत की सजा, झूठे मुकदमे और दिखावटी सुनवाई मुझे डरा नहीं सकती। मेरे खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई गैरकानूनी, असंवैधानिक और राजनीतिक मकसद से प्रेरित है।”
छात्रों के विरोध प्रदर्शन की आड़ में सत्ता परिवर्तन की सुनियोजित साजिश
शेख हसीना ने अपने संबोधन में जुलाई और अगस्त 2024 की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि वह पूरा घटनाक्रम कभी भी छात्रों का कोई आम या शांतिपूर्ण आंदोलन नहीं था। उनकी सरकार ने हमेशा बातचीत, कानूनी प्रक्रिया और धैर्य के साथ हर मुद्दे को सुलझाने की पूरी कोशिश की थी।
लेकिन कुछ संगठित समूहों ने सुधार की बात की आड़ में छात्रों की माँगों को एक हिंसक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा विद्रोह उनकी चुनी हुई सरकार को गिराने और सत्ता पर कब्जा करने की एक बहुत ही गहरी और सुनियोजित साजिश थी।
उन्होंने आगे कहा कि इस पूरी साजिश के दौरान भोले-भाले छात्रों का इस्तेमाल किया गया और उन्हें गुमराह किया गया। कोटा का मुद्दा तो सिर्फ एक बहाना था, असली मकसद सरकार को जबरन हटाना था। पूर्व केयरटेकर मोहम्मद यूनुस के बयानों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के हत्यारों को सुरक्षा या इंडिमनिटी देना उनके असली इरादों को उजागर करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यूनुस सरकार ने कुछ गलत नहीं किया था, तो उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जाँच क्यों रुकवा दी? यह पूरी कार्रवाई बैलेट बॉक्स से चुनी गई लोकतांत्रिक व्यवस्था को छीनने के लिए की गई थी।
अल्पसंख्यकों पर हमले
शेख हसीना और उनके बेटे साजीब वाजेद जॉय ने बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर बेहद गंभीर चिंता जताई है। हसीना ने आरोप लगाया कि देश में अल्पसंख्यक समुदायों, जजों, सांस्कृतिक हस्तियों और आम रिक्शा चालकों तक को निशाना बनाया जा रहा है। जो लोग मुक्ति संग्राम के समर्थन में खड़े हैं, उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है और दोषी उग्रवादियों को जेल से रिहा किया जा रहा है। साजीब वाजेद जॉय ने कहा कि उनकी माँ के सत्ता से हटने के बाद भी हिंसा का दौर थमा नहीं है, बल्कि हत्याएँ लगातार जारी हैं।
जॉय ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी आँकड़ों और सरकार के बयानों के बीच भारी अंतर पर सवाल खड़े किए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से आग्रह किया कि वे सत्ता परिवर्तन के बाद हुई हिंसा की गहराई से जाँच करें। साजीब वाजेद जॉय ने चेतावनी देते हुए कहा कि आज बांग्लादेश लगभग ‘एक और पाकिस्तान’ बनता जा रहा है, जो कि भारत और पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए बहुत बड़ी चिंता का विषय होना चाहिए। पूर्व मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी ने भी कहा कि बीते दो साल देश के लिए भारी संकट और यातना भरे रहे हैं, जहाँ महँगाई आसमान छू रही है और युवाओं के लिए अवसर खत्म हो गए हैं।
बांग्लादेशी मीडिया की चुप्पी बनाम भारतीय मीडिया की बड़ी कवरेज
इस ऐतिहासिक और सनसनीखेज घटनाक्रम की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात यह रही कि बांग्लादेश के प्रमुख मीडिया घरानों ने इस पूरे लाइव संबोधन को सिरे से गायब कर दिया। बांग्लादेश के प्रतिष्ठित और मुख्य समाचार पोर्टल जैसे ‘प्रोथोम अलो, द डेली स्टार, ढाका ट्रिब्यून‘ पर शेख हसीना के इस बड़े लाइव भाषण से जुड़ी कोई खबर या कवरेज देखने को नहीं मिली। वहाँ की मीडिया ने इस पर पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है, जो वहाँ की प्रेस की आजादी और मौजूदा प्रशासनिक दबाव पर बड़े सवाल खड़े करता है।
इसके विपरीत, भारतीय मीडिया और वैश्विक मंचों ने इस खबर को प्रमुखता से कवर किया। दिल्ली में आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस और शेख हसीना के एक-एक बयान को भारतीय समाचार चैनलों और पोर्टलों ने विस्तार से देश-दुनिया के सामने रखा। मोहिबुल हसन चौधरी ने अपनी बात रखते हुए अंत में यह भी स्पष्ट किया कि अवामी लीग किसी भी प्रकार का बदला नहीं लेना चाहती, बल्कि वे सिर्फ पुराना न्याय और इंसाफ चाहते हैं। उन्होंने दुनिया भर के स्टेकहोल्डर्स और दोस्तों से अपील की कि वे शेख हसीना की देश वापसी में मदद करें ताकि बांग्लादेश को इस मौजूदा संकट से बाहर निकाला जा सके।

