स्पेन में अटके हजारों घुसपैठिए, सैकड़ों अकेले बच्चों के लिए मुश्किल हुई जिंदगी: समुद्र में डूबकर मोरक्को के कई लोगों की हुई मौत

स्पेन के उत्तरी अफ्रीका वाले इलाके ‘स्यूटा’ में एक बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। मोरक्को की सीमा से अचानक हजारों लोग जमीन और समुद्र के रास्ते यूरोप में घुसने की कोशिश करने लगे। इससे वहाँ की व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ गई।

हालाँकि, कुछ समय बाद बहुत से लोग वापस अपने देश लौट गए, लेकिन अभी भी हजारों की तादाद में लोग वहीं फँसे हुए हैं। इनमें ऐसे छोटे बच्चे भी शामिल हैं जो बिना अपने माता-पिता या परिवार के अकेले वहाँ पहुँचे हैं। अचानक हुई इस घटना से वहाँ के प्रशासन और राहत शिविरों पर बहुत ज्यादा दबाव बढ़ गया है और स्थिति काफी गंभीर होती जा रही है।

जानलेवा सफर और दूसरे देशों से आए लोग

यूरोप में घुसने की इस खतरनाक और गैरकानूनी कोशिश में कई लोगों की जान चली गई है। स्पेन के अधिकारियों के मुताबिक, सीमा पार करते समय कई लोगों की मौत हुई है। इनमें से ज्यादातर लोगों की जान समुद्र की तेज लहरों में डूबने से गई है। इसके अलावा, मोरक्को के प्रशासन ने भी कुछ लोगों की मौत होने की बात पक्की की है।

सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि इन लोगों में सिर्फ मोरक्को के नागरिक ही नहीं हैं। इनमें सूडान, अफगानिस्तान और फिलिस्तीन जैसे युद्ध और हिंसा से पीड़ित देशों से अपनी जान बचाकर भागे हुए बेहाल लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हैं।

परिवारों से बिछड़े बच्चे और भटकती जिंदगियाँ

स्यूटा पहुँचने वाले हजारों लोगों में टैंजियर की रहने वाली 17 साल की एक मोरक्को की लड़की की बहुत ही दर्दनाक कहानी सामने आई है। उसने बताया कि जब सब लोग भाग रहे थे, तो उसका छोटा भाई समुद्र के पानी में डूब गया। इसके अलावा, जब वह स्यूटा के अंदर पहुँची तो वह अपनी माँ से भी बिछड़ गई।

वह काफी समय तक राहत शिविरों और वीरान सड़कों पर भटकती रही। जब वह किसी तरह एक युवा सहायता केंद्र पर पहुँची, तो वहाँ पहले से ही बहुत भीड़ होने के कारण उसे अंदर जाने की जगह नहीं मिली।

वहाँ के दयालु लोगों ने आगे आकर उसे खाना और कपड़े दिए, और एक महिला ने उसे नहाने की जगह भी दी। उसने बताया कि उस भयानक भगदड़ में उसने कई लोगों को भीड़ के पैरों तले कुचलते हुए भी देखा था।

राहत शिविरों में भीड़ और खाने की किल्लत

अचानक हजारों लोगों के आ जाने की वजह से स्यूटा के राहत शिविर बहुत जल्दी पूरी तरह भर गए। सरकार के एक मुख्य शेल्टर में सिर्फ 600 लोगों के रहने की जगह थी, जो लोगों के आते ही तुरंत फुल हो गया।

इस वजह से सैकड़ों बेघर लोगों को मजबूर होकर खुले आसमान के नीचे समुद्र के किनारे और आसपास की पहाड़ियों पर रात गुजारनी पड़ी। हालात इतने खराब हो गए कि कई लोगों ने खाने की भारी कमी की शिकायत की, जिसके बाद सरकार को खाने की व्यवस्था करनी पड़ी।

मोरक्को के 25 साल के एक युवक ने वापस लौटने के बाद बताया कि उसे लगातार दो दिनों तक कुछ भी खाने को नहीं मिला था। उसने बाकी लोगों को भी चेतावनी दी कि वहाँ पहुँचने के बाद स्थिति उनकी सोच से कहीं ज्यादा भयानक और मुश्किल है।

स्पेन सरकार की मदद और बच्चों की सुरक्षा के लिए कदम

इस मुश्किल हालात से निपटने के लिए स्पेन सरकार ने बहुत तेजी से सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। स्पेन के कानून के नियम के अनुसार, बिना माता-पिता या परिवार के आने वाले सभी छोटे बच्चों को सीधे सरकार की सुरक्षा में रखा जाता है।

हालाँकि, इतनी बड़ी संख्या में आए बच्चों की सही पहचान करना प्रशासन के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन गया है। कुछ मीडिया खबरों में यह भी बताया गया कि कुछ बच्चों को गलती से वापस मोरक्को की सीमा की तरफ ले जाया जा रहा था, लेकिन सुरक्षा में लगे जवानों ने समय रहते उन्हें रोक लिया।

स्यूटा में रह रहे इन बेसहारा बच्चों की मदद के लिए स्पेन सरकार ने 2.5 करोड़ यूरो (लगभग 2.88 करोड़ डॉलर) की भारी-भरकम मदद देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही, बिछड़े हुए परिवारों को ढूँढने और आपस में मिलाने के लिए सीमा के पास एक विशेष ‘गुमशुदा लोग कार्यालय’ (मिसिंग पर्सन्स ऑफिस) भी खोल दिया गया है। इस समय प्रशासन का पूरा ध्यान बच्चों की सही पहचान करने और वहां के बिगड़े हालातों को काबू में लाने पर है।