जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (JeI) से जुड़ी संपत्तियों को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। दक्षिण कश्मीर के शोपियाँ में जिस दफ्तर को पहले प्रशासन ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जब्त किया था, वहाँ अब जस्टिस एंड डेवलपमेंट फ्रंट (JDF) के दफ्तर के संचालन का मामला सामने आया है।
इसी तरह श्रीनगर में भी फालाह-ए-आम ट्रस्ट (FAT) की इमारत में JDF के दफ्तर होने की बात सामने आई है। इस पूरे मामले के बाद प्रशासन ने शोपियाँ स्थित संपत्ति को लेकर JDF को नोटिस जारी किया है और चेतावनी दी है कि नियमों का पालन नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
शोपियाँ की जब्त संपत्ति पर कैसे शुरू हुआ विवाद?
फरवरी 2019 में केंद्र सरकार ने जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर पर UAPA के तहत प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद संगठन की कई संपत्तियाँ प्रशासन के कब्जे में ली गईं। शोपियाँ का दफ्तर भी नवंबर 2022 में राज्य जाँच एजेंसी (SIA) के एक मामले में जब्त किया गया था।
संपत्ति पर प्रशासन की ओर से एक बोर्ड भी लगाया गया था, जिसमें साफ लिखा गया था कि यह संपत्ति प्रतिबंधों के तहत है और इसका किसी भी तरह उपयोग करना कानून का उल्लंघन माना जाएगा। इसके बावजूद अब वहाँ JDF के नाम वाला बोर्ड लगे होने की बात सामने आई है, जिससे विवाद और बढ़ गया है।
पूर्व जमात सदस्यों ने प्रशासन से की कार्रवाई की माँग
मामले को लेकर जमात-ए-इस्लामी के कुछ पूर्व सदस्यों ने शोपियाँ के उपायुक्त को पत्र लिखकर पूछा है कि आखिर किस अधिकार के तहत इस इमारत पर कब्जा किया गया है। उन्होंने प्रशासन से माँग की है कि पूरे मामले की जांच की जाए और यदि कब्जा नियमों के खिलाफ है तो संबंधित लोगों को वहां से हटाया जाए।
पूर्व सदस्यों का कहना है कि जिस संपत्ति को पहले ही प्रशासन ने जब्त कर रखा है, उस पर किसी भी संगठन का दफ्तर चलना नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
श्रीनगर में FAT की इमारत में भी JDF का कार्यालय
JDF के अध्यक्ष शमीम थोकर ने स्वीकार किया है कि श्रीनगर में फालाह-ए-आम ट्रस्ट (FAT) की इमारत में उनकी पार्टी ने कुछ कमरे किराये पर लिए हैं। उनके मुताबिक इसके लिए उनके पास वैध किरायानामा भी मौजूद है।
हालाँकि उन्होंने शोपियाँ और श्रीनगर में जमात-ए-इस्लामी के दफ्तरों पर कब्जे के आरोपों से इनकार किया। उनका कहना था कि यदि जमात-ए-इस्लामी को लगता है कि संपत्ति उसकी है, तो वह आगे आए और कानूनी तरीके से अपना दावा पेश करे।
फालाह-ए-आम ट्रस्ट की स्थापना 1975 में हुई थी और यह घाटी में सैकड़ों स्कूल संचालित करता था। वर्ष 2022 में जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने ट्रस्ट से जुड़े स्कूलों को बंद करने और बाद में चरणबद्ध तरीके से उनका प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में लेने का फैसला किया था। हालाँकि FAT पर 2019 में जमात-ए-इस्लामी की तरह प्रतिबंध नहीं लगाया गया था।
प्रशासन ने जारी किया नोटिस, कार्रवाई की चेतावनी
शोपियाँ के तहसीलदार अंजुम बशीर खटक ने पुष्टि की है कि संबंधित संपत्ति प्रशासन के कब्जे में है और वहाँ किसी को भी रहने या दफ्तर चलाने की अनुमति नहीं है। उन्होंने बताया कि JDF को नोटिस जारी किया जा चुका है।
तहसीलदार के अनुसार, यदि निर्धारित तीन से चार दिनों के भीतर नोटिस का पालन नहीं किया गया, तो JDF के खिलाफ FIR दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और आगे की कार्रवाई नोटिस के जवाब के आधार पर तय की जाएगी।

