‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया है। महाराष्ट्र में संस्थापक अभिजीत दीपके के घर पर हुई बैठक के बाद 6 अगस्त 2026 को इसकी घोषणा हुई। पार्टी अब देश भर में अपने संगठन का विस्तार करेगी। इसके लिए ‘क्या बोलती पब्लिक‘ नाम से एक नया अभियान भी शुरू किया जाएगा।
यह पार्टी युवाओं की एक ऐसी आवाज बनने का दावा कर रही है जो सरकार पर दबाव बनाएगी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसे आगे बढ़ाने वाले ज्यादातर लोग आम आदमी पार्टी (AAP) के पुराने नेता ही हैं।
इस पार्टी की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक तंज के रूप में हुई थी। मई 2026 के बीच में देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कोर्ट में एक टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि जिन युवाओं को नौकरी नहीं मिलती, वे ‘कॉकरोच‘ की तरह आरटीआई, सोशल मीडिया और पत्रकारिता में आ जाते हैं और समाज के ‘परजीवी’ बन जाते हैं।
इसी बयान के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी नाम से एक बड़ा प्रदर्शन हुआ, जिससे यह संगठन चर्चा में आ गया। इसके बाद पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी नीट पेपर लीक और शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर 26 दिन की भूख हड़ताल शुरू कर दी, जिससे यह आंदोलन और बड़ा हो गया।
ऑपइंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पार्टी ने छात्रों के असली मुद्दों का सहारा जरूर लिया। लेकिन इसका असली मकसद ‘लॉटिविज्म’ यानी हँसी-मजाक के जरिए सिर्फ बीजेपी और मोदी सरकार के खिलाफ राजनीतिक विरोध तैयार करना है।
CJP का कहना है कि आने वाले छह महीनों में वह राज्यों और शहरों में अपनी कमेटियाँ बनाएगी। लेकिन जिस तरह से यह प्रेशर ग्रुप आगे बढ़ रहा है, उससे साफ पता चलता है कि यह भविष्य में एक नई राजनीतिक पार्टी बनने की तैयारी कर रहा है, जिसका एकमात्र एजेंडा बीजेपी का विरोध करना है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अब पूरी तरह से बीजेपी के विरोध की राजनीति पर उतर आई है। इस बात को विस्तार से समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि इस पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी (NWC) में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पार्टी की नई टीम में कई अहम नाम सामने आए हैं। संस्थापक अभिजीत दीपके (30 वर्ष) को पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया है। आशुतोष रांका (30 वर्ष) और सौरव दास (27 वर्ष) को सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है।
संगठन को संभालने के लिए भी कई लोगों को पद दिए गए हैं। अजिंक्य शिंडे (35 वर्ष) राष्ट्रीय संगठन प्रभारी बनाए गए हैं, जबकि दीपक बालियान (26 वर्ष) संगठन सह-प्रभारी हैं। आफ़रीन नवाज (34 वर्ष) राष्ट्रीय सचिव, विजय रेड्डी मल्लंगी (30 वर्ष) मीडिया प्रमुख और रत्ना सिंह (31 वर्ष) कानूनी मामलों की जिम्मेदारी संभालेंगी। इसके अलावा शोध और नीति का काम वैष्णवी गौर (29 वर्ष) देखेंगी। रोहन देशपांडे (31 वर्ष) टेक्नोलॉजी और योगेश इंगले (33 वर्ष) वित्त विभाग संभालेंगे।
पार्टी ने देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए जोनल प्रमुख भी नियुक्त किए हैं। इनमें उत्तर भारत के लिए दीपक बालियान, दक्षिण के लिए विजय रेड्डी मल्लंगी, पूर्व और पूर्वोत्तर के लिए अंकित भारद्वाज तथा पश्चिम भारत के लिए योगेश इंगले को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
The Cockroach Janta Party formally announces the names of it’s National Working Committee! pic.twitter.com/zMrXUNxW9U
— Cockroach Janta Party – CJP (@Cockroachisback) August 6, 2026
CJP यानी ‘AAP’ की नई टीम: कैसे आम आदमी पार्टी का चेहरा बन गई है कॉकरोच जनता पार्टी
जब से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP बनी है, तब से यह बात सामने आ रही है कि यह आम आदमी पार्टी (AAP) का ही नया रूप है। CJP के राष्ट्रीय संयोजक और संस्थापक अभिजीत दीपके साल 2020 से 2023 के बीच ‘आप’ के सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर रह चुके हैं। इसके बाद साल 2023 में वे अमेरिका चले गए थे और बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में एमएस की डिग्री ली थी।
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान कई रिपोर्ट्स में उन्हें ‘आप’ की सोशल मीडिया और डिजिटल प्रचार टीम का हिस्सा बताया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे मीम्स, छोटे वीडियो और डिजिटल कंटेंट बनाने वाले मुख्य लोगों में शामिल थे। उनका काम अरविंद केजरीवाल का प्रचार करना और राजनीतिक विरोधियों को जवाब देना था।
अभिजीत दीपके ‘आप’ के चुनाव वॉर-रूम और सोशल मीडिया अभियानों का भी हिस्सा रहे हैं। मीडिया इंटरव्यू में वे युवाओं और पहली बार वोट देने वालों के लिए बनाई जाने वाली चुनावी रणनीतियों पर चर्चा करते नजर आए थे। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान ‘आप’ की आईटी और मीडिया टीमों के साथ मिलकर काम किया था।
अभिजीत दीपके को ‘आप’ नेता और दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया का करीबी भी माना जाता है। दीपके ‘आप’ के वॉर-रूम का हिस्सा रहे हैं और उनका रुख हमेशा से बीजेपी के खिलाफ रहा है। हमने देखा है कि कैसे आम आदमी पार्टी ने CJP के प्रदर्शनों का खुलकर समर्थन किया था। खुद ‘आप’ प्रमुख अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया जंतर-मंतर पहुँचे थे और इन ‘कॉकरोच’ प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता दिखाई थी।
दूसरी ओर, CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आईआईटी कानपुर और लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स से पढ़ाई की है। वे लंदन में मैकिन्से कंपनी में मैनेजमेंट कंसलटेंट के रूप में भी काम कर चुके हैं। पिछले साल भारत लौटने के बाद वे जयपुर में पर्यावरण, शिक्षा सुधार और युवाओं के मुद्दों से जुड़े अभियानों में सक्रिय रहे हैं। नीट विवाद के दौरान CJP से जुड़ने के बाद आशुतोष रांका को काफी प्रसिद्धि मिली थी।
आशुतोष रांका राजनीति के लिए कोई नया नाम नहीं हैं। उनका सबसे बड़ा राजनीतिक परिचय यह है कि वे पहले आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने शराब नीति घोटाले के आरोपों पर अरविंद केजरीवाल और पार्टी का कड़ाई से बचाव किया था और इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया था। रांका साल 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी ‘आप’ के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे।
आशुतोष रांका इससे पहले ‘दप्रिंट’ और ‘न्यूजलॉन्ड्री’ जैसे मीडिया पोर्टल्स के लिए लेख भी लिख चुके हैं।
CJP द्वारा राष्ट्रीय संगठन प्रभारी बनाए गए अजिंक्य शिंडे भी ‘आप’ के ही एक पदाधिकारी हैं। उन्होंने पूर्णकालिक ‘आप’ सदस्य बनने के लिए अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। शिंडे ‘आप’ की महाराष्ट्र युवा विंग के प्रदेश अध्यक्ष और राज्य समिति के सदस्य रह चुके हैं।

मई 2025 के आसपास यह जानकारी सामने आई थी कि अजिंक्य शिंडे ने CJP में संगठन की जिम्मेदारी संभालने से पहले ‘आप’ के गोवा सह-प्रभारी के रूप में भी काम किया था। हकीकत तो यह है कि कई रिपोर्ट्स यह इशारा करती हैं कि शिंडे अभी भी ‘आप’ की महाराष्ट्र युवा विंग के संयोजक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

CJP ने मीडिया प्रमुख और दक्षिण क्षेत्र की जिम्मेदारी विजय रेड्डी मल्लंगी को सौंपी है। इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि वे तेलंगाना में आम आदमी पार्टी के एक सक्रिय सदस्य हैं।

सोशल मीडिया पर उनके कई ऐसे वीडियो और फोटो मौजूद हैं, जो यह दिखाते हैं कि उन्होंने पिछले साल ‘आप’ के लिए चंदा जुटाने, नेताओं का समर्थन करने और चुनावी अभियानों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।
CJP के वित्त प्रमुख योगेश इंगले भी महाराष्ट्र के पुणे में आम आदमी पार्टी के एक पदाधिकारी बताए जाते हैं।

इसके अलावा, CJP के पूर्व और उत्तर क्षेत्र के प्रभारी अंकित भारद्वाज भी पहले आम आदमी पार्टी के लिए एक स्वयंसेवक (वॉलंटियर) के रूप में काम कर चुके हैं।
CJP is a party of Aam Aadmi Party’s servants.
— Amit Kumar Sindhi (@AMIT_GUJJU) August 6, 2026
Today, Abhijeet Dipke announced CJP’s core team. Everyone already knows that Ranka, Saurav, and Dipke have had links with the Aam Aadmi Party.
But today, they appointed Ajinkya Shinde as CJP’s organisation in-charge. He is still the… pic.twitter.com/4fgSchejSH
इन सारी बातों से यह बिल्कुल साफ हो जाता है कि CJP ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में ज्यादातर मौजूदा या पुराने ‘आप’ नेताओं को ही जगह दी है। इस तरह से इस पार्टी ने अप्रत्यक्ष रूप से खुद को आम आदमी पार्टी की ‘युवा विंग’ के रूप में ही स्थापित कर लिया है।
Share this video max and expose and don't let this 2nd team of AAP divide our India.
— कट्टर INDIA समर्थक 🦁🇮🇳 ™ (@KKRWeRule) August 6, 2026
I request @BJP4India to don't let them use our youth for their political gain @narendramodi 🙏🏻 https://t.co/SrqEjTxdm8 pic.twitter.com/nxIeatd2cE
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की हकीकत: युवाओं की आड़ में आम आदमी पार्टी का नया राजनीतिक चेहरा
भले ही CJP यह दावा करती रही है कि उसके सदस्यों का पुराना राजनीतिक इतिहास कोई मायने नहीं रखता और उनका संगठन पूरी तरह से ‘स्वतंत्र’ है। लेकिन सच्चाई यह है कि जिन लोगों को संगठन में पद दिए गए हैं, उनका पुराना नाता किसी खास पार्टी और उसकी विचारधारा से रहा है। इससे साफ पता चलता है कि CJP कोई नया संगठन नहीं है, बल्कि यह आम आदमी पार्टी का ही एक बढ़ा हुआ रूप है।
ऑपइंडिया ने पहले भी यह विश्लेषण किया था कि CJP हँसी-मज़ाक और कॉमेडी के परदे के पीछे किस तरह से सोची-समझी रणनीति के तहत विपक्ष के एजेंडे को आगे बढ़ाती है। यह संगठन न्यायपालिका, चुनाव आयोग, बड़े उद्योगपतियों, मीडिया और पार्टी बदलने वाले नेताओं को निशाना बनाता है। यह संगठन व्यंग्य और कॉमेडी की आड़ में राजनीतिक संदेश देने का काम करता है। यह बात बिल्कुल साफ हो चुकी है कि CJP आधुनिक और ‘कूल’ दिखने वाला सिर्फ एक ऐसा प्रयोग है जिसका एकमात्र मकसद बीजेपी का विरोध करना है।
इन ‘कॉकरोच’ कहे जाने वाले लोगों ने मई महीने में ही अपनी राजनीतिक सोच और मोदी विरोध को पूरी तरह साफ कर दिया था। जब उन्होंने इंस्टाग्राम पर बीजेपी के साथ खुद की फॉलोअर्स बढ़ाने की होड़ शुरू की थी, तभी उनकी मंशा समझ आ गई थी। जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हुआ, तो CJP ने हर उस शख्स का स्वागत किया जो बीजेपी का विरोधी है। इनमें महुआ मोइत्रा, चंद्रशेखर आजाद, कीर्ति आजाद जैसे नेता शामिल थे। इसके अलावा योगेंद्र यादव जैसे इस्लामो-वामपंथी भी इसमें शामिल हुए, जिन्होंने जंतर-मंतर और संसद की तरफ जाने वाले रास्तों पर CJP के कब्जा करने पर अपनी खुशी जाहिर की थी।
इसी मंच से कुणाल कामरा ने माँ सीता पर अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नंदिता नारायण ने ‘बस नाम रहेगा अल्लाह का’ गाना गाया और पाकिस्तानी शायर फैज अहमद फैज की इस्लामी वर्चस्ववादी कविता ‘हम देखेंगे’ का गुणगान किया। इसके अलावा AISA, SFI और अन्य वामपंथी छात्र संगठनों ने ‘आजादी-आजादी’ और ‘ब्राह्मणवाद से आजादी’ जैसे देशविरोधी नारे भी लगाए।
CJP को प्रकाश राज, स्वरा भास्कर, शबाना आजमी, अरुंधति रॉय और निवेदिता मेनन जैसे जाने-माने हिंदू विरोधी और बीजेपी विरोधी ‘एक्टिविस्टों’ का भी पूरा समर्थन मिला।
असल बात तो यह है कि 20 जुलाई को हुए हिंसक CJP प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी, आजाद समाज पार्टी और दूसरे बीजेपी विरोधी दलों के कार्यकर्ता भी इस तथाकथित ‘छात्र आंदोलन’ में खुलकर शामिल हुए थे। इस प्रदर्शन में MACOCA के आरोपित और ‘आप’ से जुड़े गैंगस्टर हाजी अफजल ने भी हिस्सा लिया था।
CJP के बड़े नेता यह दावा करते रहे हैं कि जुलाई के प्रदर्शन के दौरान हर राजनीतिक विचारधारा के लोगों ने उनका समर्थन किया था। लेकिन इन सब बातों के बाद, जब CJP ने अपने सबसे बड़े पदों पर आम आदमी पार्टी के पुराने पदाधिकारियों को ही बिठा दिया है, तो इस बात पर पक्की मुहर लग जाती है कि जिसकी आशंका पहले से जताई जा रही थी, वही सच है। यानी CJP और कुछ नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी की ही ‘बी-टीम’ है।


