Homeदेश-समाजपश्चिम बंगाल: ड्रोन उड़ाकर विक्टोरिया मेमोरियल की तस्वीरें लेने वाला चीनी नागरिक गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल: ड्रोन उड़ाकर विक्टोरिया मेमोरियल की तस्वीरें लेने वाला चीनी नागरिक गिरफ्तार

बेशक कोई व्यक्ति ड्रोन का मालिक हो सकता है, मगर वह बिना प्रशासन की अनुमति के उसे उड़ा नहीं सकता।

पश्चिम बंगाल के सबसे हाई सिक्योरिटी जोन माने जाने वाले फोर्ट विलियम इलाके से ड्रोन उड़ाकर विक्टोरिया मेमोरियल की तस्वीरें ले रहे एक 34 वर्षीय चीनी नागरिक लियु झिंउओई को 2 महिलाओं समेत गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद चीनी नागरिक को कोर्ट के सामने पेश किया गया, जिसके बाद उसे 25 मार्च तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया और आरोपी के साथ जो दो महिलाएँ थीं, उन्हें रिहा कर दिया गया। हालाँकि, अभी इस बात का पता नहीं चल पाया है कि महिलाएँ चीन की नागरिक हैं या भारत की।

जानकारी के मुताबिक, शनिवार (मार्च 16, 2019) की शाम ड्यूटी पर तैनात सीआइएसएफ की नज़र आसमान में उड़ रहे ड्रोन पर पड़ी। जिसके बाद जाँच पड़ताल शुरू हुई और आरोपी पकड़ा गया। घटना की जानकारी कोलकाता स्थित चीनी वाणिज्य दूतावास को दे दी गई है। इस मामले पर कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि बेशक कोई व्यक्ति ड्रोन का मालिक हो सकता है, मगर वह बिना प्रशासन की अनुमति के उसे उड़ा नहीं सकता। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी को भी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ाने की अनुमति नहीं होती। जबकि चीनी नागरिक प्रतिबंधित क्षेत्र में ही ड्रोन उड़ा रहा था।

इस मामले पर पुलिस का कहना है कि ऐसा हो सकता है कि चीनी नागरिक को ड्रोन से संबंधित कानून के बारे में पता ना हो। इसलिए वो उससे पूछताछ करके ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रतिबंधित क्षेत्र में किस मंशा से ड्रोन उड़ा रहा था?

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -