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मंदिर के 5 km के दायरे, हिंदू इलाकों में नहीं बेच सकेंगे बीफ, 8 साल तक जेल: असम में हिमंता सरकार का विधेयक

इसके तहत उन क्षेत्रों में बीफ के व्यापार की अनुमति नहीं, जहाँ मुख्य रूप से हिंदू, जैन, सिख और बीफ नहीं खाने वाले समुदाय रहते हैं या किसी मंदिर एवं हिंदुओं की धार्मिक संस्था के 5 किलोमीटर के दायरे में आते हैं।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार (12 जुलाई) को मवेशियों की हत्या और बिक्री पर रोक लगाने के लिए राज्य विधानसभा में मवेशी संरक्षण से संंबंधित विधेयक ‘असम मवेशी संरक्षण विधेयक 2021’ पेश किया। सरमा ने कहा कि नए कानून का उद्देश्य सक्षम अधिकारियों द्वारा तय स्थानों के अलावा अन्य जगहों पर बीफ की बिक्री और खरीद पर रोक लगाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक नया कानून बनाने और पूर्व के असम मवेशी संरक्षण अधिनियम, 1950 को निरस्त करने की आवश्यकता थी, जिसमें मवेशियों के हत्या, उपभोग और परिवहन को विनियमित करने के लिए पर्याप्त कानूनी प्रावधानों का अभाव था। नए कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उन क्षेत्रों में बीफ के व्यापार की अनुमति नहीं दी जाए, जहाँ मुख्य रूप से हिंदू, जैन, सिख और बीफ नहीं खाने वाले समुदाय रहते हैं या किसी मंदिर एवं हिंदुओं की धार्मिक संस्था के 5 किलोमीटर के दायरे में आते हैं।

विधेयक में उचित दस्तावेज के अभाव में मवेशियों को एक जिले से दूसरे जिले ले जाने और अन्य जगहों पर बीफ की बिक्री व खरीद को अवैध बनाने का प्रस्ताव है। साथ ही नए प्रस्तावित कानून ‘असम मवेशी संरक्षण विधेयक 2021’ के तहत अपराध गैर जमानती होगा।

दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को कम से कम तीन साल और अधिकतम 8 साल तक की कैद या 3 लाख रुपए से 5 लाख रुपए तक का जुर्माना व दोनों हो सकता है। नए कानून के तहत अगर कोई दोषी दूसरी बार उसी या संबंधित अपराध का दोषी पाया जाता है तो उसकी सजा दोगुनी हो जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कानून को लाने का उद्देश्य पड़ोसी बांग्लादेश में गायों की तस्करी को नियंत्रित करने और गायों के अंतरराज्यीय परिवहन पर प्रतिबंध लगाना है। विधेयक में मवेशियों के परिवहन पर कुछ छूट है। जैसे मवेशियों को चरागाह, कृषि या पशुपालन के उद्देश्य से जिले के अंदर कहीं भी ले जाने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।

विधेयक के अनुसार, पशु चिकित्सा अधिकारी केवल तभी प्रमाण पत्र जारी करेगा, जब मवेशी जो कि गाय नहीं है और उसकी आयु 14 वर्ष से अधिक हो। गाय, बछिया या बछड़े का तभी वध किया जा सकता है जब वह स्थायी रूप से अपाहिज हो।

वहीं, लाइसेंस प्राप्त और मान्यता प्राप्त बूचड़खानों को ही मवेशियों को काटने की अनुमति दी जाएगी। यदि अधिकारियों को वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं तो नया कानून राज्य के भीतर या बाहर गोवंश के परिवहन पर रोक लगाएगा। यह कानून पूरे असम में मवेशियों जैसे बैल, गाय, बछिया, बछड़े, नर और मादा भैंस और भैंस के कटड़ों पर लागू होगा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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