Homeविविध विषयअन्यगैर-कानूनी मस्जिदों का निर्माण दिल्ली के लिए चिंताजनक: जाँच के लिए सांसद ने LG...

गैर-कानूनी मस्जिदों का निर्माण दिल्ली के लिए चिंताजनक: जाँच के लिए सांसद ने LG को लिखा पत्र

अगर इस समस्या का निदान नहीं किया गया तो यह मामला आगे चलकर बहुत मुश्किल पैदा कर सकता है - उप राज्यपाल अनिल बैजल को लिखे पत्र में सासंद साहिब सिंह ने किया आगाह।

सार्वजनिक या सरकारी जमीनों का धर्म के नाम पर अतिक्रमण होना आम है। छोटे-मोटे स्तर पर यह हर जगह देखने को मिल जाता है। लेकिन है यह गैरकानूनी। पश्चिम दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के सांसद प्रवेश साहिब सिंह ने अब इसके खिलाफ आवाज उठाई है। सांसद साहिब सिंह ने दिल्ली के उप राज्यपाल अनिल बैजल को इस मामले से संबंधित एक पत्र लिखा है।

अपने पत्र में साहिब सिंह ने उप राज्यपाल बैजल को पश्चिमी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में सार्वजनिक भूमि पर मस्जिदों के गैर-कानूनी रूप से बढ़ते निर्माण को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने लिखा कि उनके संसदीय क्षेत्र में सरकारी जमीन, सड़कों, पार्कों और दूसरे अनुचित स्थानों पर मस्जिदों का निर्माण किया जा रहा है। इस ओर ध्यान दिलाते हुए सासंद ने उप राज्यपाल से इन गैर-कानूनी निर्माण कार्यों की जाँच की माँग की है।

सांसद प्रवेश साहिब सिंह ने अपने पत्र में गैर-कानूनी मस्जिद निर्माण से जुड़ी समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने लिखा कि सार्वजनिक जमीनों पर बनी मस्जिदों के कारण न सिर्फ ट्रैफिक की समस्या होती है, बल्कि आस-पास रहने वाले लोगों को भी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

इस समस्या के निदान के लिए सासंद साहिब सिंह ने एलजी से एक कमिटी गठित करने की माँग की। कमिटी की संरचना को लेकर उन्होंने सुझाव दिया कि इसमें एमसीडी, पीडब्ल्यूडी, एनडीएमसी, पुलिस, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के प्रतिनिधि तक शामिल होने चाहिए ताकि हर दृष्टिकोण से इस पर जाँच हो और उसके अनुरूप आवश्यक कदम उठाए जाएँ। साहिब सिंह का कहना है कि इस गंभीर मामले की जाँच संबंधित इलाके के डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट करें। सांसद ने यह भी सुझाव दिया कि संबंधित विभाग के अधिकारी जिन इलाकों में मस्जिद बने हैं, वहां का सर्वे करें।

उप राज्यपाल अनिल बैजल को इस मामले से संबंधित जो पत्र सासंद साहिब सिंह ने लिखा है, उसमें उन्होंने आगाह किया है कि अगर इस समस्या का निदान नहीं किया गया तो यह मामला आगे चलकर बहुत मुश्किल पैदा कर सकता है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -