Homeव्हाट दी फ*ऑस्कर वाली हिरोइन बेच रही मोमबती, Vagina (योनि) जैसा देती है फील: कहा- यह...

ऑस्कर वाली हिरोइन बेच रही मोमबती, Vagina (योनि) जैसा देती है फील: कहा- यह महिला सशक्तिकरण का प्रतीक…

"मोमबत्तियाँ उत्तेजित करने और महिला सशक्तिकरण के बारे में हैं। ये मोमबत्तियाँ वास्तव में उस उत्तेजना की तरह हैं, जैसे हर तरफ एक महिला मौजूद हो।"

हॉलीवुड की एक हिरोइन हैं। नाम है- ग्वेनेथ पाल्ट्रो (Gwyneth Paltrow)। वे मोमबत्ती के एक ब्रांड को लेकर कुख्यात हैं। इस मोमबती की गंध योनि (Vagina) जैसा फील देती है। ऑस्कर विजेता इस अभिनेत्री की माने तो यह मोमबत्ती महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है।

‘आयरन मैन’ की अभिनेत्री पाल्ट्रो लाइफस्टाइल ब्रांड गूप (Goop) चलाती हैं। यह मोमबत्ती भी इसी ब्रांड का हिस्सा है। उन्होंने टुडे को दिए इंटरव्यू में अपने एक्टिंग करियर से गूप सीईओ बनने तक के सफर पर बात की है बताया। पीपल मैगजीन के अनुसार, गूप की शुरुआत 2008 में एक Newsletter के रूप में हुई थी।

ग्वेनेथ पाल्ट्रो ने टुडे के विली गीस्ट के साथ बातचीत में कहा, “मुझे हमेशा यह थोड़ा अजीब लगता है। मैं जब भी दुकान में जाती हूँ और लोगों को देखती हूँ कि वह किस चीज पर क्या रिएक्शन दे रहे हैं। वे सवाल पूछते हैं और कई चीजों को उठाते हैं। यह लोगों के लिए नई-नई चीजें खोजने वाला स्थान है और जब वे स्टोर में होते हैं तो हर कोई हमेशा मुस्कुराता रहता है। इसलिए, मुझे स्टोर में आना अच्छा लगता है।”

49 वर्षीय ग्वेनेथ पाल्ट्रो ने साक्षात्कार में अपनी ‘दिस स्मेल्स लाइक माई वैजाइना’ कैंडल पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा, “मोमबत्तियाँ उत्तेजित करने और महिला सशक्तिकरण के बारे में हैं। ये मोमबत्तियाँ वास्तव में उस उत्तेजना की तरह हैं, जैसे हर तरफ एक महिला मौजूद हो।” ‘दिस स्मेल्स लाइक माई वैजाइना’ लेबल वाली मोमबत्तियाँ जेरेनियम, साइट्रस बरगामोट और दमास्क गुलाब और एम्ब्रेटे बीज से बनाई गई हैं।

बता दें कि साल 1998 की ‘शेक्सपियर इन लव’ में अपनी दमदार एक्टिंग के लिए ऑस्कर पुरस्कार जीतने वाली पाल्ट्रो 2019 की ‘एवेंजर्स: एंडगेम’ के बाद से किसी फिल्म में नहीं दिखाई दी हैं। वह गूप से 2016 में बतौर सीईओ जुडीं और उसके बाद से एक्टिंग की दुनिया को छोड़ दिया।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।

हैशटैग लगाओ, दुनिया बदलो… कितना आसान है न? क्या सोशल मीडिया लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है?

लोकतंत्र इंसान की कमियों को स्वीकार कर समझौतों से चलता है। लेकिन सोशल मीडिया का अनियंत्रित दौर हर छोटी कमी को भ्रष्टाचार बताकर लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट कर रहा है। कैसे आज का सोशल मीडिया और डिजिटल यूटोपियनवाद हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
- विज्ञापन -