Homeदेश-समाजफारुख को संध्या पर था शक, बीच सड़क पर 'सर तन से जुदा' की...

फारुख को संध्या पर था शक, बीच सड़क पर ‘सर तन से जुदा’ की कोशिश: धारदार हथियार से बोल दिया हमला, केरल पुलिस ने कहा – रिश्ते में अनबन का मामला

फारुख बाइक ले कर फरार हो गया। इस दौरान उसने हमले में इस्तेमाल चाकू मौके पर ही छोड़ दिया। आस-पास मौजूद लोगों ने घायल संध्या को नजदीकी अस्पताल में भर्ती करवाया।

केरल के कोच्चि में एक प्रवासी महिला पर धारदार हथियार से हमला कर दिया गया। संध्या नाम की पीड़िता मूल रूप से पश्चिम बंगाल की बताई जा रही है, जो काम की तलाश में कोच्चि आई थी। हमलावर का नाम फारुख है। हमलावर और पीड़ित पहले से परिचित बताए जा रहे हैं। पुलिस ने केस दर्ज कर के फरार आरोपित की तलाश शुरू कर दी है। पीड़िता का इलाज अस्पताल में चल रहा है। घटना शनिवार (3 दिसम्बर, 2022) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता ब्यूटी पार्लर में काम करती है। घटना के दौरान पीड़िता कलूर इलाके में आज़ाद रोड पर अपने एक परिचित के साथ टहल रही थी। इस दौरान बाइक से आए फारुख ने पीड़िता पर चाकुओं से हमला कर दिया। चश्मदीदों के मुताबिक, हमले से पहले कुछ देर तक फारुख और संध्या में बहस हुई थी। बताया जा रहा है कि फारुख संध्या की गर्दन काटना चाह रहा था लेकिन घटनास्थल पर मौजूद एक तीसरे व्यक्ति ने बीच बचाव किया। इस बचाव में संध्या के दोस्त को भी हाथ में घाव हो गया है।

हमले के बाद फारुख बाइक ले कर फरार हो गया। इस दौरान उसने हमले में इस्तेमाल चाकू मौके पर ही छोड़ दिया। आस-पास मौजूद लोगों ने घायल संध्या को नजदीकी अस्पताल में भर्ती करवाया। वहाँ से उन्हें जिला अस्पताल भेज दिया गया। पुलिस के पीड़िता का बयान दर्ज करने की कोशिश की, लेकिन काफी चोट लगने के कारण ये सम्भव नहीं हो पाया। इस दौरान महिला के साथ मौजूद उसके दोस्त के बयान दर्ज किए गए हैं।

पुलिस का कहना है कि हमलावर और पीड़िता पूर्व से परिचित हैं। इन दोनों के रिश्तों में कुछ अनबन हुई जिसके बाद फारुख ने इस घटना को अंजाम दिया है। माना जा रहा है कि फारुख को संध्या के किसी और युवक के साथ रिश्तों का शक था। फारुख मूल रूप से उत्तराखंड का रहने वाला है। वह कोच्चि में एक सैलून में काम करता था। उसके दोस्त ने बताया कि पिछले कुछ समय से फारुख काफी अपसेट था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘यहाँ मस्जिद थी, है और रहेगी’: संभल दंगे की न्यायिक जाँच आयोग रिपोर्ट में सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का जिक्र 100+ बार, 199 साक्षियों...

संभल दंगों की न्यायिक जाँच आयोग की रिपोर्ट में सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का 100 बार से भी अधिक बार जिक्र। वो भी सबूतों के साथ।

100 नाराज़ ≠ 100 वोट: भारतीय राजनीति में सिर्फ़ ‘नाराज़गी’ का फ़ैक्टर कभी निर्णायक क्यों नहीं रहा

SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।
- विज्ञापन -