Homeरिपोर्टराष्ट्रीय सुरक्षाराजस्थान: भारत-पाक सीमा पर घुसपैठ और तस्करी में बढ़ोतरी की आशंका के बीच धारा...

राजस्थान: भारत-पाक सीमा पर घुसपैठ और तस्करी में बढ़ोतरी की आशंका के बीच धारा 144 लागू

गुप्तचर एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद लिया गया है। सीमा के 2 किलोमीटर अंदर तक शाम 7 बजे से सुबह 7 बजे तक यह प्रतिबंध लागू किया गया है। आशंका जताई जा रही है सीमा पर घुसपैठ और तस्करी में बढ़ोतरी हो सकती है।

राजस्थान स्थित श्रीगंगानगर की पाकिस्तान सीमा पर निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। जिला कलक्टर शिव प्रसाद नकाते के आदेश से लागू धारा 144, 15 नवंबर, 2019 तक जारी रहेगी।

इंटेलिजेंस इनपुट पर लिया फैसला

मीडिया खबरों के अनुसार यह निर्णय गुप्तचर एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद लिया गया है। सीमा के 2 किलोमीटर अंदर तक शाम 7 बजे से सुबह 7 बजे तक यह प्रतिबंध लागू किया गया है। आशंका जताई जा रही है सीमा पर घुसपैठ और तस्करी में बढ़ोतरी हो सकती है।

पहले भी पकड़े जा चुके हैं तस्कर

श्रीगंगानगर जिले में पहले भी कई बार घुसपैठिये और तस्कर पकड़े जा चुके हैं। इसीलिए यहाँ पुलिस और BSF कड़ी निगरानी रखते हैं

मालूम हो कि भारत द्वारा अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव चरम सीमा पर है। इसी बीच पाकिस्तानी सेना और घुसपैठियों ने भी सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशें तेज़ कर दीं हैं। पिछले दिनों ही पाकिस्तानी सेना के दो सैनिक संघर्ष-विराम के उल्लंघन में मारे गए थे

(यह डेवलपिंग स्टोरी है। और जानकारी प्राप्त होने पर इसे अपडेट किया जाएगा। )

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -