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कलावा पहनने पर हाथ तोड़ा, जबरन लगवाए ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे, जूठे बर्तन साफ़ कराए, देवी-देवताओं की तस्वीरें फाड़ी: कश्मीरी छात्रों का अत्याचार

छात्रों को एक जगह से दूसरी जगह भेजा गया था सामाजिक अध्ययन के लिए, उनकी जीवनशैली को समझने के लिए, सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए, लेकिन उनके साथ कश्मीर में जो कुछ भी हुआ, वो हैरान करने वाला है।

झाँसी के बरुआसागर स्थित नवोदय विद्यालय के छात्र माइग्रेशन पर जम्मू-कश्मीर के राजौरी भेजे गए थे। वहाँ छात्र झाँसी आए हुए थे। 28 सितंबर को खबर आई कि झाँसी के बच्चों के साथ राजौरी में बदसलूकी हुई है, जिसके बाद झाँसी के बच्चों ने कश्मीरी छात्रों के साथ बदसलूकी की थी। मामला आगे बढ़ा तो जाँच बैठी और दोनों तरफ के छात्रों को उनके मूल स्कूल बुला लिया गया। राजौरी से वापस आए झाँसी नवोदय स्कूल के बच्चों ने आपबीती सुनाई, जिसमें एक छात्र का हाथ सिर्फ इसलिए तोड़ दिया गया था, कि उसने हाथ में कलावा पहना था।

यही नहीं, झाँसी स्कूल के छात्रों से राजौरी के छात्र जबरन ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगवाते थे और विरोध करने पर उन्हें पीटते थे।

ये मामला सामने आने के बाद से प्रशासन भी हैरान है। कहाँ तो छात्रों को एक जगह से दूसरी जगह भेजा गया था सामाजिक अध्ययन के लिए, उनकी जीवनशैली को समझने के लिए, सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए, लेकिन उनके साथ कश्मीर में जो कुछ भी हुआ, वो हैरान करने वाला है। ‘अमर उजाला‘ की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरसराय के नुनार खैर के निवासी छात्र दीपक कुमार ने बताया कश्मीरी छात्र उनसे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगवाते थे। मना करने पर पीटते थे और अपने जूठे बर्तन साफ कराते थे।

शिक्षक नहीं सुनते थे शिकायत, छात्र का हाथ तोड़ डाला

दीपक कुमार ने बताया कि वो शिक्षकों से शिकायत करते थे, तो वो स्थानीय छात्रों की ही सुनते थे। विपुल नाम के छात्र ने बताया कि भगवान की फोटो लगाने पर फाड़ दिया जाता था। एक छत्रा ऋतिक का हाथ तोड़ दिया, क्योंकि उसने हाथ में कलावा बाँधा था। झाँसी से 20 छात्रों को राजौरी भेजा गया था, लेकिन सभी बच्चे जो खुश होकर गए थे, वो परेशान होकर वापस आए हैं। इस मामले में स्कूल में छात्रों के साथ पूछताछ की गई, तो ये हैरान करने वाला घटनाक्रम सामने आया है।

28 सितंबर को हुआ था बवाल

बता दें कि 28 सितंबर को झाँसी के नवोदय विद्यालय में कश्मीरी छात्रों पर हमलों की खबरें मीडिया में आई थी, जिसमें बताया गया था कि कश्मीर में छात्रों के साथ दुर्व्यवहार से स्थानीय छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा था। इस हंगामे के बाद माइग्रेशन प्रोग्राम रद्द कर दिया गया, और दोनों ही तरफ के छात्रों को उनकी मूल जगह पर बुला लिया गया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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