Wednesday, September 28, 2022
12 कुल लेख

Abhishek Singh Rao

कर्णावती से । धार्मिक । उद्यमी अभियंता । इतिहास एवं राजनीति विज्ञान का छात्र

‘शिवलिंगम’ बन जाता है ‘महमूद गजनवी’, ‘वणक्कम’ हो जाता है ‘अस्सलामु अलैकुम’: धर्मांतरण मतलब राष्ट्रांतरण, प्रताप-शिवाजी नायक की जगह हो जाते हैं दुश्मन

RSS के 5वें सरसंघचालक KS सुदर्शन लिखते हैं, "यह देश मुस्लिमों की श्रद्धा का पात्र तब तक नहीं बन सकता जब तक यह दारुल-इस्लाम नहीं बन जाता।"

साका-जौहर: भस्म हुआ बर्बर इस्लामी शक्तियों के साथ सह-अस्तित्व, सभी जाति-वर्गों की स्त्रियों का था बलिदान

18 अगस्त, 1303 ईस्वी को चित्तौड़ का पहला साका-जौहर हुआ। 'साका' क्या होता है। वह कौन सा तत्व था जिसके कारण साका-जौहर करते समय...

‘मुसलमान बादशाह को काफिरों की सहायता नहीं करनी चाहिए’: माँ काली का ‘चंपानेर’ तबाह कर सके सुल्तान बेगड़ा, इसलिए रास्ते से लौटा था...

जब बेगड़ा ने चंपानेर में तबाही मचाने का फैसला किया तब राजा रावल ने खिलजी को बुलवाया। लेकिन, खिलजी बीच रास्ते से वापस लौट गया क्योंकि आलिमों ने कहा था...

हिंदू की हवेली गिराने का था प्लान, पूरी जामा मस्जिद पर ही KC ब्रदर्स ने फेर दिया था हाथ: आजादी के बाद की घटना,...

अमदावाद की जामा मस्जिद। घटना 1964-65 की। KC ब्रदर्स की हवेली पर मस्जिद वालों की नजर। मामला कोर्ट में... आगे की कहानी किताब से लेकर प्रकाशित।

आज हैदराबाद में नागराजू की हत्या, कभी गोविंदपुर में हरेंद्र की माँ का रेप: आम्बेडकर ने भी बताया था ‘मुस्लिम’ हो महिला तो नहीं...

यदि लड़की हिन्दू हो तो मुसलमान ‘प्रेम के मसीहा’ बन जाते हैं, लेकिन लड़की यदि उनके कौम की निकले तो समूची मुस्लिम-आबादी उस हिन्दू लड़के को अपना दुश्मन मान जिहाद का रास्ता इख़्तियार कर लेती है।

गुजरात का सुल्तान जहरीले थूक से लेता था जान, संत एकनाथ महाराज भी नहीं बचे: ‘थूक जिहाद’ के अनसुने किस्से

इस्लाम में थूक बहुत ही मुक़द्दस है। आज जो आप देख रहे वह नई बात नहीं है। ऐसा ही एक दिलचस्प वाकया गुजरात के सुल्तान महमूद बेगड़ा से जुड़ा हुआ है।

कहानी लचिमार बीबी की: जब मुस्लिम सुल्तान से भिड़ गए थे रामानुजाचार्य, ऐसे फिर से शुरू कराई यादवाद्रिपति की बंद हुई पूजा

मेलकोट में यादवाद्रिपति की बंद हो चुकी पूजा और उत्सवों को संत रामानुजाचार्य ने वापस प्रारंभ करवाया। इसके लिए वे मुस्लिम सुल्तान से भिड़ गए थे।

‘जामा मस्जिद -फतेहपुरी में बैठ सकते थे 25-30 हजार मुस्लिम, हिन्दुओं के पास जगह नहीं’: काशी में साकार हुआ स्वामी श्रद्धानंद का सपना

स्वामी श्रद्धानंद ने सलाह दी थी, "प्रत्येक नगर में एक हिन्दू-राष्ट्र मंदिर की स्थापना अवश्य की जानी चाहिए जिसमें एक साथ 25,000 लोग समा सकें।"

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