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अजीत झा

संपादक, ऑपइंडिया (हिंदी)

SC/ST एक्ट पर सवाल उठाना न तो अपराध है, न ही ‘सवर्ण वर्चस्व’ का प्रमाण

दरभंगा के हरिनगर गाँव की घटना SC/ST एक्ट के उस चेहरे को उजागर करती है, जिस पर सवाल उठाना 'अपराध' मान लिया जाता है।

शैक्षणिक परिसर को ‘सामाजिक न्याय उद्योग’ का अखाड़ा न बनाएँ- UGC नियमावली पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के संदेश

सुप्रीम कोर्ट की रोक ने उस ढाँचे पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिसके जरिए UGC शैक्षणिक परिसरों में डर, संदेह और एकतरफा प्रक्रिया को संस्थागत रूप देना चाहता था।

जले नोटों पर चुप्पी, सवालों पर ‘मीडिया ट्रायल’ का लेबल: क्या न्यायपालिका खुद को कानून से ऊपर मानती है?

मीडिया ट्रायल या जवाबदेही से डर? जस्टिस यशवंत वर्मा केस और मुकुल रोहतगी के बयान ने न्यायपालिका पर उठाए असहज सवाल।

याकूब मेमन से उमर खालिद तक: जब ‘न्याय’ इस्लामी-वाम गठजोड़ के मजहबी नैरेटिव को चुभने लगता है

उमर खालिद और शरजील इमाम पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद फिर वही पैटर्न। कानून नहीं, मजहबी पहचान और मजहब की भावना थोपने की कोशिश।

क्रिकेट या दावत-ए-जिहाद? मैदान में इस्लामी विक्टिमहुड घुसाने की साजिश

उस्मान ख्वाजा और फुरकान भट उसी इस्लामी एजेंडा की कड़ी हैं जो क्रिकेट को भीतर से खोखला कर रहा है।

2026: भारत का वर्ष- नेतृत्व, निर्णायकता और दिशा

नववर्ष 2026 में ऑपइंडिया की भूमिका केवल समाचार देने तक सीमित नहीं है। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है- तथ्यों के साथ निर्भीकता और राष्ट्र के साथ स्पष्ट प्रतिबद्धता।

2026: जब भारत के नेतृत्व में पश्चिमी प्रभुत्व की विश्व व्यवस्था दरकने लगेगी

BRICS की अध्यक्षता भारत को नियम तय करने की स्थिति में ला रही है- जहाँ डॉलर, पश्चिमी वर्चस्व और चीन की सीमाएँ एक साथ उजागर होंगी।

वही व्यवस्था टिकेगी जो जमीन से उठी हो, संगठन में तपी हो, जिसके केंद्र में राष्ट्र हो: BJP के ‘नवीन’ प्रयोग के निहितार्थ

नितिन नवीन का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनना कोई सामान्य संगठनात्मक फेरबदल नहीं। स्पष्ट घोषणा है कि बीजेपी भविष्य को संयोग के भरोसे नहीं छोड़ेगी।