Thursday, January 28, 2021
106 कुल लेख

Anand Kumar

Tread cautiously, here sentiments may get hurt!

न वो निर्भया थी, न मंदिर में मिली थी लाश: 28 साल बाद आया ये ‘इंसाफ’ बताता है कि चर्च के गुनाहों के प्रति...

केरल में अपने ही कॉन्वेंट में जब सिस्टर अभया का शव मिला तो ये भी तय नहीं हो पाया कि ये हत्या है भी या नहीं।

बच्चों के अंग-भंग कर सूरदास के गाने! जी नहीं… इसाइयों ने खोजा था चर्च के लिए यह अमानवीय तरीका

चर्च के इस अमानुषिक प्रथा की वजह से, इटली में, अंदाजन हर साल तीन से 5000 बच्चों का बंध्याकरण किया जाता था। उनमें से केवल 1% ही...

वो गुरुजी के गुरुजी थे: जिनकी वजह से डॉ. आंबेडकर की भी थी संघ से नजदीकी

जब 1907 में सूरत में कॉन्ग्रेस पार्टी का अधिवेशन हो रहा था तो दोनों हिस्सों के बीच तल्खियाँ बढ़ गईं। इस वक्त बीएस मुंजे ने खुलकर तिलक का समर्थन किया और यही वजह रही कि तिलक के वो भविष्य में भी काफी करीबी रहे।

कॉन्ग्रेस का कोढ़ है धर्मांतरण, रोकने को देर से बने कानून कितने दुरुस्त?

जिस विषय में संविधान निर्माताओं को 1949 से पता था, उस पर कानून बनाने में इतनी देर आखिर क्यों? नियम बनने शुरू भी हुए हैं तो क्या ये काफी हैं, या हमें बहुत देर से और बहुत थोड़ा देकर बहलाया जा रहा है?

जो भर्ती घोटाले का आरोपित, वही बना नीतीश का शिक्षा मंत्री, ऐसे में मुंगेर गोलीकांड की होगी जाँच? अनंत सिंह फिर बोलेंगे…

मेवालाल चौधरी को मंत्री बनाने वाली बिहार की जदयू सरकार मुंगेर में दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान हुए गोलीकांड की जाँच कराएगी?

बिहार ने जातिवादी राजनीति का खेल खेलने वालों की कब्र खोदी, मगर वाम आतंकियों का मजबूत होना चिंताजनक

आखिर अस्सी-नब्बे के दशक में जो लोगों को अपने उपनाम छुपाने पड़े थे, वो किसे याद नहीं? एक कथित सेक्युलर चैनल के ईनामी पत्रकार भी तो अपना नाम 'कुमार' तक ही बताते हैं, पूरा नाम नहीं बताते ना? क्यों छुपाना पड़ा था, ये याद तो आता है!

लालू का MLA, दलित लड़की से रेप… लेकिन ‘बाबू साहब के सामने सीना तानकर चलते थे’ के नाम पर वोट!

जब तक ये फैसला आया तब तक अपराधियों में से एक मर चुका था, लेकिन पच्चीस साल बीतने पर भी एक दूसरा अपराधी फरार ही...

सरकारी बूटों तले रौंदी गई हिन्दुओं की परम्परा, गोलियाँ चलीं, कहारों के कंधों के बजाय ट्रैक्टर, जेसीबी से हुआ विसर्जन

इस बार परम्पराओं और मान्यताओं को सरकारी बूटों तले रौंदने के बाद बिना आरती इत्यादि के ही दूसरी देवियों के बाद बड़ी दुर्गा को विसर्जित किया गया।

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