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प्रो. रसाल सिंह

प्रोफेसर और अध्यक्ष के रूप में हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषा विभाग, जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं। साथ ही, विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, छात्र कल्याण का भी दायित्व निर्वहन कर रहे हैं। इससे पहले दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज में पढ़ाते थे। दो कार्यावधि के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद के निर्वाचित सदस्य रहे हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में सामाजिक-राजनीतिक और साहित्यिक विषयों पर नियमित लेखन करते हैं। संपर्क-8800886847

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान: 2047 के विकसित भारत का शैक्षणिक रोडमैप, औपनिवेशिक ढाँचे से मुक्त हो उच्च शिक्षा के भारतीयकरण का प्रयास

'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक–2025' को JPC को भेजा गया है। यह सम्पूर्ण उच्च शिक्षा क्षेत्र का एकमात्र नियामक तंत्र होगा।

संघर्ष, सेवा, समर्पण और संस्कार की भट्ठी में तपकर 100 वर्ष का हुआ है RSS का संगठन: अब राष्ट्रहित के ‘पंच परिवर्तन’ से परम...

संघ ने समाज सेवा, स्वदेशी, शिक्षा, ग्राम-विकास, आपदा-राहत, वनवासी कल्याण  और सामाजिक समरसता आदि अनेक क्षेत्रों में काम करते हुए सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया है।

भारत में कैंपस खोलेंगी विदेशी यूनिवर्सिटीज, पढ़ाई होगी बेहतर- ‘ब्रेन ड्रेन’ भी होगा कम: हर साल ₹34 लाख करोड़+ की बचत भी, बड़े शिक्षा...

आँकड़ों के मुताबिक, हर साल 18 लाख भारतीय छात्र विदेश पढ़ने जाते हैं, जिससे 40 बिलियन डॉलर का नुकसान होता है।

सुप्रीम कोर्ट को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पत्र ‘स्वस्थ लोकतंत्र’ की निशानी, प्रेसिडेंट-गवर्नर के लिए डेडलाइन तय करने को लेकर पूछे हैं 14 सवाल:...

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उच्चतम न्यायालय से रेफरेंस भेजकर 14 सवाल पूछे हैं। यह प्रक्रिया हमारे स्वस्थ लोकतंत्र को दर्शाती है।

कभी हथौड़ा लेकर ‘शक्ति प्रदर्शन’, कभी शिक्षकों से बदसलूकी: गली के गुंडों की फोटोकॉपी बने छात्र नेता, अब बिगड़ैल राजनीति पर अंकुश समय की...

जो प्रत्याशी या संगठन धनबल और बाहुबल का इस्तेमाल नहीं करता, या उसके इस्तेमाल में झिझकता है; उसे कमजोर मान लिया जाता है। पूरी चुनावी व्यवस्था इतनी दूषित हो चुकी है कि सही और सकारात्मक  साधनों से लड़कर चुनाव जीतना लगभग असंभव है।

जहाँ कर रहे मजदूरी-काम, वहीं से मतदान: 90-95% वोटिंग का हो लक्ष्य, NOTA को लेकर बने कड़ा कानून

90-95% मतदान लोकतंत्र की स्वीकार्यता, सशक्तता, गतिशीलता की आधारभूत शर्त है। प्रवासी मतदाताओं को कार्यस्थल से मतदान का विकल्प दिया जाना चाहिए।

जिनको ‘पाकिस्तानी’ कह जेल में ठूँसना चाहते हैं केजरीवाल, मानवीय रूप से वो सब भारतीय… 1955-86-92-2003-05 का इतिहास पढ़ ले AAP

घोर धार्मिक प्रताड़ना के कारण विस्थापित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देना गलत कैसे? राजनीतिक कारणों से इसका विरोध करना अमानवीय और असंवैधानिक है।

निर्धन-वंचित वर्ग का आर्थिक समावेशन, स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता, महिला सशक्तिकरण… रामराज्य का समसामयिक संस्करण है PM मोदी का ‘नव-कल्याणवाद’

PM मोदी का शासन-सूत्र रामराज्य का समसामयिक संस्करण है। उनके शासन का ध्येय-मंत्र 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, और सबका प्रयास' है।