Thursday, November 26, 2020
17 कुल लेख

प्रो. रसाल सिंह

प्रोफेसर और अध्यक्ष के रूप में हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषा विभाग, जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं। साथ ही, विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, छात्र कल्याण का भी दायित्व निर्वहन कर रहे हैं। इससे पहले दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज में पढ़ाते थे। दो कार्यावधि के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद के निर्वाचित सदस्य रहे हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में सामाजिक-राजनीतिक और साहित्यिक विषयों पर नियमित लेखन करते हैं। संपर्क-8800886847

पंडित दीनदयाल और एकात्म मानववाद: पश्चिम की बजाय भारत को भारत की ही दृष्टि से देखना आवश्यक

दीनदयाल जी ‘राष्ट्र’ की संकल्पना में व्यक्ति को एक साधन के रूप में देखते हैं। व्यक्ति स्वयं के अतिरिक्त अपने राष्ट्र का भी प्रतिनिधित्व करता है।

8.5% कमीशन आढ़तिया और राज्य सरकार का…ऐसे लूटा जाता है किसान की उपज को, फिर भी घड़ियाली आँसू बहा रहा विपक्ष

इन तीनों विधेयकों की सही और पूरी जानकारी किसानों तक पहुँच नहीं पाई है। यह सरकार की विफलता ही मानी जाएगी। इतने महत्वपूर्ण और दूरगामी...

अब नागाओं का वास्तविक हितधारक और हितैषी नहीं है NSCN (IM): अन्य स्टेकहोल्डर्स को भी शामिल किए जाने की माँग

एनएससीएन (आईएम) को नागा हितों का एकमात्र प्रतिनिधि संगठन मानना और सिर्फ इसके साथ ही शांति-वार्ता और संघर्ष-विराम करना ऐतिहासिक रणनीतिक भूल है।

मणिपुर का शेर बीर टिकेंद्रजीत सिंह: अंग्रेजों ने जिन्हें कहा था ‘खतरनाक बाघ’, दी थी खुली जगह पर फाँसी

बीर टिकेंद्रजीत सिंह को 13 अगस्त 1891 को आम जनता के सामने एक खुली जगह पर फाँसी लगाई ताकि लोगों में डर पैदा किया जा सके।

क्यों मिलता है किसी गिलानी को ‘निशान-ए-पाकिस्तान’: कश्मीरियत को ‘पत्थरबाजी’ बनाने का यूँ रचा खेल

अब्दुल्ला और मुफ़्ती सईद खानदान की वंशवादी राजनीति से भी जम्मू-कश्मीर का आम नागरिक त्रस्त रहा है। दोनों ही खानदानों की तीसरी पीढ़ी...

जम्मू-कश्मीर के नव-निर्माण का दस्तावेज है नई अधिवास नीति, आतंकी सोच पर चोट के लिए नियम हो और सरल

हालिया लागू की गई नई अधिवासन नीति से लम्बे समय से वंचित/उपेक्षित बहुत से तबकों को लाभ होगा। इन तबकों में वाल्मीकी समुदाय के लाखों लोग...

भय बिनु होय न प्रीत: ड्रैगन को सामरिक और आर्थिक तरीकों से एक साथ घेरना ही उचित रास्ता

स्वदेशी उत्पादों का अधिकाधिक उपयोग चीन के सामरिक सामर्थ्य को क्रमशः कमजोर करेगा। स्वदेशी, स्वावलंबन और संकल्प आर्थिक वर्चस्व को...

‘राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है, लोगों को डरने की जरूरत नहीं’ – यूँ शुरू हुआ था दमन का दौर

"गरीबी हटाने" वाली इंदिरा ने लोकतंत्र हटा दिया। आपातकाल इंदिरा गाँधी ने अपनी गद्दी बचाने को सत्ता मोह में लगाया l 'इंदिरा इज इंडिया' को...

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,404FollowersFollow
358,000SubscribersSubscribe