Friday, August 12, 2022
21 कुल लेख

Saket Suryesh

A technology worker, writer and poet, and a concerned Indian. Saket writes in Hindi and English. He writes on socio-political matters and routinely writes Hindi satire in print as well in leading newspaper like Jagaran. His Hindi Satire "Ganjhon Ki Goshthi" is on Amazon best-sellers. He has just finished translating the Autobiography of Legendary revolutionary Ram Prasad Bismil in English, to be soon released as "The Revolitionary".

हिंदू धर्म स्त्री विरोधी… वामपंथियों ने फैलाया ‘मनुस्मृति वाला षड्यंत्र’: बाप-बेटी की कहानी से जानें मनुवाद

हिंदू सभ्यता का जितना ह्रास धर्म के प्रति नैराश्य एवं उदासीनता हिंदुओं के भीतर भरे जाने के कारण हुआ, उतना आक्रांताओं की तलवार से नहीं हुआ।

न्याय के लिए बुलडोजर का चलना और उसका विद्युत गति से रुक जाना – दोनो ही तंत्र की विफलता का सूचक

"दण्ड ही प्रजा पर शासन करता है, दण्ड ही रक्षा करता है, जब प्रजा सोती है, दण्ड ही जागृत रहता है, इसी कारण दण्ड ही राजा का प्रमुख कार्य।"

हिन्दुओं की हत्या पर मौन रहने वाले हिन्दू ‘फ़्रांस की जनता’ होना कब सीखेंगे?

हमें वे तस्वीरें देखनी चाहिए जो फ्रांस की घटना के पश्चात विभिन्न शहरों में दिखती हैं। सैकड़ों की सँख्या में फ्रांसीसी नागरिक सड़कों पर उतरे यह कहते हुए - "हम भयभीत नहीं हैं।"

व्यंग्य: रामायण काल के फेकन्यूज और धोबीकुमार की खोज में निकले हनुमान को क्या मिला?

"हम भाग्य को धन्यवाद दे सकते हैं कि लंका युद्ध के समय वहाँ पत्रकार नहीं थे वरना वे रावण को गणितज्ञ बता कर हमारा अयोध्या लौटना तक दूभर कर देते।"

मगध-मित्र: महामारी के बाद नव विकास की संभावनाओं के साथ लौटेगा बिहार का उत्कर्ष

प्रवासियों की कठिनाई को देख कर 'मगध-मित्र' का सोशल मीडिया पर जन्म हुआ। इसका उद्देश्य राजनैतिक दलों की सीमाओं से उठ कर, जिस राज्य अथवा शहर में जिस किसी वालंटियर या स्वयंसेवक समूह का कार्यक्षेत्र हो, उससे वहाँ फँसे श्रमिकों तक सहायता पहुँचाना था।

कोरोना ने कर दिखाया महिला-उत्थान: किचन में सब्जी बनाता, घर की सफाई करता और बर्तन माँजता व्यंग्यकार

पति सब्ज़ी बना रहे हैं, घरों की सफ़ाई कर रहे हैं, बर्तन माँज रहे हैं। महिला उत्थान का जो काम सुश्री वर्जीनिया वुल्फ़, सरोजिनी नायडू, इंदिरा गाँधी यहाँ तक कि लेडी माउंटबेटन तक ना कर सकी, वो आज कोरोनाजान ने कर दिखाया। इस परिवर्तन के काल ने मुझ जैसे कई पतियों को अपनी सुप्तप्राय प्रतिभा के प्रति जागरूक किया है।

वैलेण्टाइन से पहले और बाद के नेता: ‘प्यार’ में खाया धोखा, गली-गली भटक रहा मतदाता

जिस प्रकार टेडी बियर, गुलाबों की चकाचौंध के पीछे प्रियतमा के द्वारा पकाया हुआ आलू का पराठा, और जानूँ के द्वारा कराया गया मुफ़्त फ़ोन रिचार्ज ही वो शक्ति है जो प्रेमसंबंधो में माधुर्य बनाए रखता है, बड़े-बड़े नारों के पीछे मुफ़्त संसाधनों का वचन और अपने वालों को जात-धर्म के झंडे के नीचे बाँधकर भीड़ जमा करने का माद्दा ही नेता और मतदाता के मध्य प्रेम को बनाए रखता है।

हे मार्क्स बाबा के कॉमरेड, ठण्ड का मौसम तुम्हारी क्रांति के लिए सही नहीं है, रजाई में दुबके रहो

प्रथमतया सर्दी का मौसम सड़क पर धरना प्रदर्शन के लिए अनुकूल नहीं होता है। सर्दियों का समय समाजवाद के शीतनिद्रा में जाने के लिए उपयुक्त होता है। समाजवादी सौंदर्यशास्त्र के साथ भी सर्दियाँ ठीक नहीं जाती। एक अच्छा वामपंथी कम नहाया हुआ, दाढ़ी बढ़ाया हुआ, महँगा कुर्ता पहन कर ग़रीबों के लिए व्यथित भाव लिए दिखता है।

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