असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने काफी समय पहले कॉन्ग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर ‘पाकिस्तान कनेक्शन’ के जो आरोप लगाए थे, उसे लेकर अब एक नया मोड़ आ गया है। गौरव गोगोई ने खुद स्वीकार किया है कि साल 2013 की अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान वे रावलपिंडी गए थे। हालाँकि, उन्होंने सफाई दी है कि वे वहाँ सिर्फ अपनी पत्नी के साथ ‘तक्षशिला’ घूमने गए थे, मिलिट्री हेडक्वार्टर नहीं।
Boy fumbles explaining his Pakistan visit pic.twitter.com/MmuA2pxSNq
— Mihir Jha (@MihirkJha) April 1, 2026
वीजा नियमों के उल्लंघन का आरोप
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सवाल उठाया है कि जब गौरव गोगोई के पास केवल लाहौर, कराची और इस्लामाबाद का वीजा था, तो वे रावलपिंडी जिले में कैसे दाखिल हुए? सीएम हिमंता ने यह भी याद दिलाया कि गोगोई ने इजरायल में पासपोर्ट खोने के बाद सड़क मार्ग से पाकिस्तान में एंट्री ली थी। ताज्जुब की बात यह है कि उनके ‘सिंगल एंट्री’ वीजा को अचानक ‘मल्टीपल एंट्री’ में कैसे बदल दिया गया, जबकि उस वक्त भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर था।
पत्नी एलिजाबेथ पर SIT के गंभीर दावे
असम सरकार द्वारा गठित विशेष जाँच टीम (SIT) की रिपोर्ट में गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई को लेकर चौंकाने वाली बातें कही गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान से ‘लीड इंडिया’ को भारी फंड मिला, जिसमें से करीब ₹82 लाख सीधे एलिजाबेथ को दिए गए। दावा है कि एलिजाबेथ कोलबर्न इस्लामाबाद में ‘लीड पाकिस्तान’ के अधिकारियों के सीधे संपर्क में थीं और वहीं से रिपोर्ट करती थीं। जाँच में सामने आया है कि उनके पाकिस्तान में बैंक खाते थे और उन्होंने इसकी जानकारी जाँच टीम से साझा नहीं की।
संसद में पूछे गए सवालों पर संदेह
हिमंता बिस्वा सरमा ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान से लौटने के बाद गौरव गोगोई ने संसद में परमाणु प्लांट, रक्षा प्रणाली, बॉर्डर सुरक्षा और यूरेनियम भंडार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सवाल पूछे। मुख्यमंत्री का दावा है कि ये बातें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हैं और इसकी गहराई से जाँच होनी चाहिए।
गोगोई ने आरोपों को बताया ‘घटिया फिल्म’
इन सभी आरोपों पर पलटवार करते हुए गौरव गोगोई ने इसे ‘घटिया फिल्म’ की कहानी करार दिया है। उनका कहना है कि ये आरोप सिर्फ उन्हें बदनाम करने के लिए लगाए जा रहे हैं और असम की जनता असलियत जानती है। फिलहाल, असम सरकार ने SIT की रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दी है ताकि इस मामले की जाँच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जा सके।

