‘सिर्फ मुनाफा ही नहीं देखना होता, राष्ट्रवाद-राष्ट्रभक्ति भी दिखाओ’: भारतीय रक्षा कंपनियों पर भड़के CDS, कहा- समय पर हथियारों की डिलीवरी अहम

सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने हथियार सप्लाई करने वाली कंपनियों की क्लास लगाई है। शुक्रवार (14 नवंबर 2025) को आयोजित एक सेमिनार में उन्होंने कहा कि कंपनियाँ दावे और वादे दोनों करती हैं, लेकिन तय समय पर हथियार सप्लाई नहीं करती।

उन्होंने कहा कि कंपनियाँ अपने स्वदेशी उपकरणों का बढ़ा चढ़ाकर दावा करती हैं, लेकिन एग्रिमेंट के मुताबिक वक्त पर डिलीवरी नहीं करती हैं। इससे सेना और देश को नुकसान होता है। उन्होंने कंपनियों को मुनाफे के साथ थोड़ा ‘राष्ट्रवाद और देशभक्ति’ दिखाने को भी कहा।

सीडीएस चौहान ने कहा कि कंपनियाँ इमरजेंसी खरीद के ऑर्डर समय पर पूरा नहीं कर पा रही हैं इससे सेना की तैयारियों
पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा, “रक्षा सुधार एकतरफा नहीं होते, घरेलू उद्योगों को अपनी स्वदेशी क्षमताओं के बारे में पूरी और सही जानकारी देनी होगी। रक्षा क्षेत्र में सुधार सिर्फ सरकार और सेना की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि ये कंपनियों की भी अहम जिम्मेदारी है। कंपनियाँ सेना को बीच मझधार में नहीं छोड़ सकती।”

सेना को आपातकालीन खरीद के 5वें और 6वें दौर में दिक्कतों का सामना करना पड़ा है, दरअसल कंपनियों ने ज्यादा प्रोमिस कर दिए, इससे डिलीवरी में समस्या आ रही है और वक्त पर डिलीवरी नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा, “सुधार एकतरफा नहीं होते। सरकार ने नीतियों को उदार बनाया, सेना ने ऑर्डर बढ़ाए, लेकिन उद्योगों को भी अपनी क्षमता के बारे में पारदर्शी होना पड़ेगा।”

सीडीएस ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में रक्षा सुधारों को आगे बढ़ाया जा चुका है। नीतियों में खुलापन आया है, सेना ने ऑर्डर भी दे दिये, लेकिन कंपनियों की डिलीवरी तय समय पर नहीं हो पा रही। उन्होंने साफ किया कि सिर्फ नीतियाँ बदलना ही सबकुछ नहीं है। इसके लिए उद्योगों का ईमानदार सहयोग जरूरी है।