प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आयात पर निर्भरता कम करने के आह्वान पर इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग ने बड़ा कदम उठाया है। उद्योग ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को बताया है कि घरेलू निर्माण के लिए 16 उत्पादों पर काम शुरू हो चुका है और 2026 तक इन्हें भारत में ही बनाया जाएगा। इनमें 11 इंटरमीडिएट (पुर्जे/घटक) और 5 फिनिश्ड (तैयार) उत्पाद शामिल हैं।
इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) की ओर से यह जानकारी प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा को भेजे गए पत्र में दी गई। ICEA के साथ इस पहल में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, फॉक्सकॉन, विवो मोबाइल इंडिया, एप्पल, डिक्सन टेक्नोलॉजीज, भगवती प्रोडक्ट्स, लावा इंटरनेशनल, कॉर्निंग, एम्पेरेक्स टेक्नोलॉजी, सालकॉम्प, एक्वस और कई कंपोनेंट सप्लायर कंपनियाँ शामिल हैं।
इन कंपनियों ने उन उत्पादों की सूची साझा की है जिनका निर्माण शुरू हो चुका है या जिनका लक्ष्य 2026 तक भारत में उत्पादन करना है।
निवेश, रोजगार और सरकार की रणनीति
ICEA के चेयरमैन पंकज मोहनद्रू ने कहा कि यह सूची पूरे उद्योग की सहमति से तैयार की गई है और यह सरकार की राष्ट्रीय नीतियों के अनुरूप है। ICEA के अनुसार, इस योजना के तहत 1.1 लाख करोड़ से अधिक का निवेश आने का अनुमान है।
इससे 10.34 लाख करोड़ से ज्यादा के उत्पादन को समर्थन मिलेगा और करीब 1.41 लाख कुशल नौकरियाँ पैदा होंगी। इस पूरी प्रक्रिया को इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत प्रोत्साहन दिया जाएगा।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने 28 दिसंबर 2025 को हुई पाँचवीं राष्ट्रीय मुख्य सचिव सम्मेलन में केंद्र और राज्यों से मिलकर 100 ऐसे उत्पाद विकसित करने का आग्रह किया था, जिन्हें देश में ही बनाया जा सके।
इसका मकसद आयात घटाना, अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करना है। प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता बढ़ाने, शून्य-खामी (Zero Defect) उत्पाद बनाने और पर्यावरण पर न्यूनतम असर रखने पर भी जोर दिया था।
चीन पर निर्भरता घटाने से लेकर निर्यात तक की योजना
इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का मुख्य लक्ष्य खासकर चीन से होने वाले आयात पर निर्भरता कम करना है। इसके लिए सब-असेंबली, कोर कंपोनेंट्स, सप्लाई चेन को मजबूत करने और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनों व उपकरणों पर ध्यान दिया जा रहा है। इस योजना में तैयार उत्पाद भी शामिल हैं।
ICEA ने बताया कि मोबाइल फोन और आईटी हार्डवेयर के एनक्लोजर, डिस्प्ले और कैमरा मॉड्यूल, एडवांस्ड प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) जैसे हाई-डेंसिटी इंटरकनेक्ट, फ्लेक्सिबल PCB और मॉडिफाइड सेमी-एडिटिव प्रोसेस वाले उत्पादों के लिए भी लोकलाइजेशन किया जा रहा है।
इसके अलावा डिजिटल डिवाइसों में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरी सेल और उससे जुड़े पूरे इकोसिस्टम को भी भारत में विकसित करने की योजना है। शुरुआती उद्देश्य आयात कम करना है, लेकिन लंबे समय में इन उत्पादों को निर्यात करने का लक्ष्य भी रखा गया है।
ICEA ने स्मार्टफोन का उदाहरण देते हुए बताया कि 2014-15 में भारत में बिकने वाले करीब 80 फीसदी स्मार्टफोन आयात किए जाते थे, जबकि अब देश में बिकने वाले 99 फीसदी से ज्यादा स्मार्टफोन भारत में ही बन रहे हैं। इतना ही नहीं, 2024-25 में भारत से स्मार्टफोन का निर्यात 24.1 अरब डॉलर तक पहुँच गया।
अब उद्योग का फोकस इसी सफलता को लैपटॉप, टैबलेट जैसे उत्पादों में भी दोहराने पर है, ताकि 2026 तक भारत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में और ज्यादा आत्मनिर्भर बन सके।

