विपक्षी दलों द्वारा ‘एप्स्टीन फाइल्स’ के नाम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि धूमिल करने की कोशिशों पर भारत सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पीएम मोदी की जुलाई 2017 की इजरायल यात्रा पूरी तरह से आधिकारिक और पारदर्शी थी।
मंत्रालय ने उन मीडिया रिपोर्टों और विपक्षी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें जेफरी एप्स्टीन के एक कथित ईमेल के हवाले से पीएम की यात्रा पर सवाल उठाए गए थे। अधिकारियों ने साफ कहा कि किसी अपराधी द्वारा अपनी कहानी में लिखे गए बेतुके कमेंट्स को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए और इसे तुरंत नजरअंदाज किया जाना चाहिए।
Our statement to clarify certain reports ⬇️
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) January 31, 2026
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विपक्ष उठा रहा सवाल
दरअसल, कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया था कि 2017 के इजरायल दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने जेफरी एप्स्टीन से सलाह ली थी। विपक्ष ने कथित ईमेल का हवाला देते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक गंभीर मुद्दा बताया और पीएम से स्पष्टीकरण की माँग की थी।
बेहद शर्मनाक!!
— Congress (@INCIndia) January 31, 2026
Epstein files में नरेंद्र मोदी का नाम आ गया है। अमेरिका के सीरियल रेपिस्ट, बाल यौन अपराधी और मानव तस्कर जेफरी एपस्टीन ने 9 जुलाई 2017 को एक मेल में लिखा 👇
"The Indian Prime Minister Modi took advice and danced and sang in Israel for the benefit of the US… pic.twitter.com/in73ajVjcR
हालाँकि, सरकार ने इसे महज एक अफवाह और बदनाम करने की दुर्भावनापूर्ण कोशिश करार दिया है। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि प्रधानमंत्री की आधिकारिक यात्राओं का एक निश्चित प्रोटोकॉल होता है और उसमें किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि का सवाल ही पैदा नहीं होता। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे ऐसी मनगढ़ंत कहानियों को आधिकारिक दस्तावेज न समझें।

