नेपाल के पूर्व PM ओली समेत कई नेताओं के काठमांडू छोड़ने पर रोक, पासपोर्ट भी किए गए रद्द: GenZ प्रदर्शन में गोलीबारी की जाँच कर रहे आयोग की कार्रवाई

नेपाल में Gen-Z आंदोलन के दौरान युवाओं पर हुई गोलीबारी की जाँच के लिए बने न्यायिक आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता वाले इस आयोग ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली समेत 5 प्रमुख लोगों के काठमांडू छोड़ने पर रोक लगा दी है। साथ ही, उनके पासपोर्ट रद्द करने के आदेश भी दिए गए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह आयोग हाल ही में हुए हिंसक प्रदर्शनों में हुई गोलीबार की जाँच कर रहा है और इसका दावा है कि इन लोगों की आवाजाही से जाँच प्रभावित हो सकती है। जिन लोगों पर प्रतिबंध लगाया गया है उनमें ओली के अलावा पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक, तत्कालीन गृह सचिव गोकर्ण मणि दुवाडी, आंतरिक खुफिया विभाग के प्रमुख हुत राज थापा और काठमांडू के तत्कालीन जिलाधिकारी छवि रिजाल शामिल हैं।

आयोग ने नेताओं की सिर्फ यात्रा पर रोक ही नहीं लगाई बल्कि नेपाल पुलिस, सशस्त्र प्रहरी बल और राष्ट्रीय अनुसंधान विभाग को निर्देश दिया है कि इन पाँचों नेताओं की हर गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जाए और उसकी दैनिक रिपोर्ट आयोग को भेजी जाए। इस सख्ती का मकसद जाँच को प्रभावित होने से बचाना है।

इससे पहले ओली ने शनिवार (27 सितंबर 2025) को हिंसा के बाद पहली बार सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओली ने कहा कि वर्तमान सुशीला कार्की सरकार ‘Gen-Z सरकार’ है, जो संवैधानिक प्रक्रिया की बजाय हिंसा और प्रचार के जरिए बनी है।

उन्होंने अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ नहीं चलवाईं। साथ ही उन्होंने अफवाहों का भी खंडन किया कि उनका पासपोर्ट निलंबित है या वह देश छोड़कर भाग जाएँगे।

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