हिज्बुल्लाह के पेजर पर हमले के बाद हंगरी ने ईरान को खुफिया जानकारी देने की पेशकश की थी। इसका खुलासा होने के बाद हंगरी की विदेश नीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हंगरी का इजरायल के साथ अच्छे संबंध हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यह कदम लेबनान में 2024 में हुए उस ऑपरेशन के बाद उठाया गया जिसमें 12 लोग मारे गए और हजारों घायल हुए। हंगरी ने इस ऑपरेशन में किसी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है।
एक लीक फोन कॉल ट्रांसक्रिप्ट के अनुसार, हंगरी के विदेश मंत्री पीटर सिज्जार्टो ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची को जाँच से जुड़ी जानकारी साझा करने का भरोसा दिया।
इजरायल समर्थक छवि के बीच ईरान से संपर्क पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार, इस फोन कॉल में पीटर सिज्जार्तो ने कहा कि उनकी खुफिया एजेंसियाँ पहले ही ईरान की एजेंसियों से संपर्क कर चुकी हैं और जाँच में जुटी हर जानकारी साझा की जाएगी।
उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि हंगरी का इस हमले से कोई लेना-देना नहीं है और जिन पेजर्स में धमाके हुए, वे न तो हंगरी में बने थे और न ही किसी हंगेरियन कंपनी का उनसे सीधा संबंध था।
हालाँकि, इस बातचीत ने हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ हंगरी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इजरायल का समर्थन करता रहा है और यहाँ तक कि बेंजामिन नेतन्याहू के दौरे के दौरान इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट से बाहर निकलने का ऐलान भी कर चुका है, वहीं दूसरी ओर ईरान से इस तरह का सहयोग उसकी दोहरी नीति की ओर इशारा करता है।
इसके अलावा, रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि हंगरी के रूस के साथ भी करीबी संबंध हैं। प्रधानमंत्री ऑर्बन के व्लादिमीर पुतिन से अच्छे रिश्ते बताए जाते हैं और यूरोपीय संघ के कई फैसलों, खासकर यूक्रेन से जुड़े मुद्दों पर हंगरी ने अलग रुख अपनाया है।

