अब नेवी को मिलेंगे ‘Make In India’ गैस टर्बाइन पॉवर प्लांट्स वाले वॉरशिप, इंजनों को पॉवर-स्पीड देगी अपनी टेक्नोलॉजी: रक्षा मंत्रालय ने दी ₹425 करोड़ के डील को मंजूरी

भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई है। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए 12 मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर (GTG) सेटों की आपूर्ति हेतु पुणे स्थित भारत फोर्ज लिमिटेड के साथ 425 करोड़ रुपए के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस समझौते की सबसे अहम बात यह है कि पहली बार कोई भारतीय कंपनी नौसेना के युद्धपोतों के लिए स्वदेशी गैस टर्बाइन आधारित पावर प्लांट का निर्माण और आपूर्ति करेगी। अब तक इस तरह की महत्वपूर्ण तकनीक के लिए भारत काफी हद तक विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहा है।

नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह परियोजना डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर (DAP) 2020 की ‘बाय (इंडियन)’ श्रेणी के तहत लागू की जाएगी, जिसमें कम से कम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

1.25 मेगावाट क्षमता वाले जनरेटर से बढ़ेगी नौसेना की ताकत

परियोजना के तहत तैयार किए जाने वाले 1.25 मेगावाट क्षमता वाले मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर युद्धपोतों में लगी उन्नत हथियार प्रणालियों, सेंसर और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम को बिजली उपलब्ध कराएँगे। आधुनिक युद्धपोतों के संचालन में इन जनरेटरों की अहम भूमिका मानी जाती है।

पाँच वर्षों में पूरी होने वाली इस परियोजना के तहत भारत फोर्ज विशेष इंटीग्रेशन और टेस्टिंग सुविधा भी स्थापित करेगी। कंपनी भविष्य में मरीन पावर प्लांट और प्रोपल्शन गैस टर्बाइन के डिजाइन एवं विकास में भी योगदान देगी।

भारत फोर्ज के अनुसार, नए जनरेटर वर्तमान में नौसेना के जहाजों में इस्तेमाल हो रहे कम क्षमता वाले जनरेटरों की जगह लेंगे और देश में गैस टर्बाइन सिस्टम के उत्पादन, रखरखाव तथा ओवरहॉल के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने में मदद करेंगे, जिससे विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता और कम होगी।