मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बनाने में जुटा था PFI का शाहिद खान, कर्नाटक HC ने आतंकी को बेल देने से किया इनकार

कर्नाटक हाई कोर्ट ने कट्टरपंथी प्रतिबंधित संगठन पीएफआई से जुड़े शाहिद खान को जमानत देने से मना कर दिया। उस पर मुस्लिम युवाओं को आतंकवादी और कट्टरपंथी बनाने और आतंकवादी गतिविधियों के लिए पैसे जुटाने की साजिश रचने का आरोप है।

शाहिद खान उन 19 आरोपियों में से एक है, जिस पर आपराधिक साजिश रचने और देशविरोधी काम करने का आरोप है। शाहिद खान ने NIA कोर्ट से अपनी ज़मानत याचिका खारिज होने के बाद कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इन 19 आरोपियों पर IPC की धारा 153A, 120B और UAPA समेत कई धाराओं के अंतर्गत केस दर्ज है।

कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस एचपी संदेश और जस्टिस वेंकटेश नाइक टी की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि बेल की अपील करने वाले ने कई वजहें बताई थीं और कुछ वजहें उसकी पिछली जमानत अर्जी में भी बताई गई थीं।

बेंच ने कहा कि इस बार तीन नई बातें कही गई थीं। पहला कुर्की-जब्ती के दौरान मौके पर मौजूद अधिकारी ने कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया, दूसरा, सेक्शन 18 UAPA के तहत मंजूरी नहीं मिली और तीसरा ट्रायल शुरू होने में देरी हुई।

आरोपित शाहिद खान के वकील ने कहा कि अपील करने वाले के खिलाफ सेक्शन 18 UAPA लगाया गया है, जबकि सरकार ने केस चलाने की मंजूरी नहीं दी है, इसलिए ट्रायल कोर्ट अपील करने वाले के खिलाफ सेक्शन 18 के तहत जुर्म के लिए चार्ज फ्रेम या कार्रवाई नहीं कर सकता।

इसमें कहा गया कि अपील करने वाले पर PFI मेंबर होने को लेकर चार्जशीट दायर है और उसके काम आतंकवादी गतिविधियों की परिभाषा में नहीं आते। यह भी कहा गया कि अपील करने वाले के खिलाफ मर्डर करने, या सेक्शन 17 के तहत मौत या उम्रकैद की सज़ा पाने जैसे संगीन जुर्म करने के आरोप भी नहीं हैं।

प्रॉसिक्यूशन के अनुसार, उन्नीस आरोपी पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के पदाधिकारी, सदस्य और कैडर हैं। आरोप है कि वे सिटिज़न्स अमेंडमेंट एक्ट 2019, नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स लॉज़ (NRC), हिजाब और बाबरी मस्जिद जजमेंट और भारत सरकार के पास किए गए कानूनों से गुस्से में थे।

उन पर मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल करने की साजिश रचने का आरोप है। इनलोगों का मकसद धार्मिक भेदभाव के आधार पर समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच दुश्मनी पैदा करना और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होकर देश में अशांति फैलाना था।

आरोपित को 22 सितंबर 2022 को गिरफ्तार किया गया था। ट्रायल कोर्ट ने उन पर लगी धाराओं को देखते हुए बेल अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद इनलोगों ने हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन हाईकोर्ट ने भी बेल अर्जी अस्वीकार कर दी।