जिस सिराजुद्दीन ने हिंदू देवी-देवताओं की गंदी तस्वीरों को किया शेयर, उसके खिलाफ हुई FIR को कर्नाटक HC ने रद्द करने से किया मना: कहा- ‘धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ अभिव्यक्ति की आजादी नहीं’

कर्नाटक हाई कोर्ट ने शुक्रवार (30 जनवरी 2026) को एक अहम फैसला सुनाते हुए उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें हिंदू देवताओं की अश्लील तस्वीरें व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर करने वाले आरोपित सिराजुद्दीन ने अपने खिलाफ दर्ज केस को खत्म करने की माँग की थी। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ का इस्तेमाल सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली सामग्री को बचाने के लिए एक ढाल के रूप में नहीं किया जा सकता।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी और याचिका खारिज

जस्टिस एम नागप्रसन्ना की सिंगल बेच ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि ग्रुप में साझा किया गया कंटेंट पहली नजर में ही बेहद आपत्तिजनक है। कोर्ट ने यहाँ तक कहा कि तस्वीरें इतनी अश्लील हैं कि उन्हें न्यायिक आदेश में लिखा भी नहीं जा सकता।

जस्टिस ने आरोपित के उस तर्क को सिरे से नकार दिया कि यह उसकी अभिव्यक्ति की आजादी है। कोर्ट ने कहा कि भले ही किसी कृत्य से तुरंत दंगा न भड़के, लेकिन यदि सामग्री में सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने की क्षमता है, तो उसे प्रतिबंधित किया जाना ज़रूरी है।

जाँच और कानूनी धाराओं पर स्पष्टीकरण

आरोपित सिराजुद्दीन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295A (धार्मिक भावनाओं को आहत करना) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 (ऑनलाइन अश्लील सामग्री फैलाना) के तहत मामला दर्ज है।

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि केस दर्ज करने या जाँच के लिए सरकार की पूर्व मंजूरी की जरूरत नहीं होती, इसकी आवश्यकता केवल कोर्ट द्वारा संज्ञान लेते समय पड़ती है। हाई कोर्ट ने पुलिस जाँच में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और कहा कि ऐसे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जाँच होनी बेहद जरूरी है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 2021 में शुरू हुआ था, जब के जयराज सालियन नामक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि एक व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल होने के बाद उन्होंने देखा कि वहाँ हिंदू देवी-देवताओं की अत्यंत अपमानजनक और अश्लील तस्वीरें साझा की जा रही थीं।

शिकायत के अनुसार, इस ग्रुप में 6 एडमिन और लगभग 250 सदस्य थे, जहाँ धार्मिक आस्थाओं का अपमान करने के साथ-साथ कुछ राजनीतिक हस्तियों को भी निशाना बनाया जा रहा था। इसी मामले में दक्षिण कन्नड़ निवासी 30 वर्षीय सिराजुद्दीन ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।