कभी पुलिस पर करवाया हमला, कभी IED धमाके करवाए: झारखंड में ₹20 लाख का इनामी नक्सली रविंद्र गंझू गिरफ्तार, AK-56 बरामद

झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। लातेहार पुलिस और CRPF की संयुक्त टीम ने सोमवार (13 जुलाई 2026) को प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के स्वयंभू रीजनल कमांडर रविंद्र गंझू उर्फ सुरेंद्र गंझू उर्फ मुकेश गंझू को गिरफ्तार कर लिया।

20 लाख रुपए का इनामी यह माओवादी लंबे समय से झारखंड पुलिस और राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की वांटेड सूची में शामिल था। पुलिस ने उसे लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र के हेसला मौजा के बांझीटोला स्थित उसके गाँव से गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से एक एके-56 राइफल भी बरामद की गई है।

15 लाख झारखंड पुलिस और 5 लाख NIA का था इनाम, गुप्त सूचना पर हुई गिरफ्तारी

रविंद्र गंझू पर झारखंड पुलिस ने 15 लाख रुपए और NIA ने 5 लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। वह काफी समय से फरार चल रहा था और सुरक्षा एजेंसियाँ उसकी तलाश में लगातार अभियान चला रही थीं। पुलिस को हाल ही में सूचना मिली कि वह अपने पैतृक गाँव हेसला पहुँचा है।

इसके बाद लातेहार पुलिस और CRPF ने इलाके की घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों के अनुसार, दस्ते के कई बड़े माओवादी या तो पहले ही मारे जा चुके हैं, गिरफ्तार हो चुके हैं अथवा आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिसके बाद रविंद्र गंझू अकेला पड़ गया था।

कई जिलों में फैला था आतंक और विकास कार्यों में डालता था बाधा

रविंद्र गंझू का प्रभाव एक समय गुमला, लातेहार, लोहरदगा, चतरा, पलामू, गढ़वा और आसपास के इलाकों में काफी व्यापक था। उसके खिलाफ हत्या, पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले, पुलिस कैंप पर हमले, IED विस्फोट, लेवी और रंगदारी वसूली, आगजनी, हथियार लूटने तथा विकास कार्यों में बाधा पहुँचाने सहित कुल 56 आपराधिक मामले (दैनिक जागरण और टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक 156 मामले) दर्ज थे।

टेरर फंडिंग और लेवी से जुड़े मामलों में भी NIA उसकी तलाश कर रही थी। जाँच एजेंसी ने पहले उसके चंदवा स्थित हेसला बांझीटोला के मकान को कुर्क और सील भी किया था। जाँच में सामने आया था कि यह मकान लेवी और रंगदारी से जुटाए गए पैसों से बनाया गया था।

पुलिसकर्मियों और जवानों पर कई बड़े हमलों का रहा मास्टरमाइंड

रविंद्र गंझू का नाम झारखंड में माओवाद से जुड़ी कई बड़ी घटनाओं में सामने आया था। 22 नवंबर 2019 को लातेहार के चंदवा स्थित लुकैया मोड़ के पास पुलिस की PCR वैन पर हुए हमले का नेतृत्व उसी ने किया था। इस हमले में एक ASI और तीन गृह रक्षक बल के जवान बलिदान हो गए थे।

जाँच में सामने आया कि इस हमले की साजिश रविंद्र गंझू ने रची थी और रेकी व सूचना देने वालों को पाँच-पाँच हजार रुपए देकर घटना को अंजाम दिलाया गया था। बताया जाता है कि पुलिस द्वारा उसकी पत्नी की गिरफ्तारी के बाद बदले की भावना से इस हमले की योजना बनाई गई थी।

इसके अलावा 7 जनवरी 2013 को लातेहार के बरवाडीह थाना क्षेत्र के कटिया जंगल में सुरक्षा बलों पर हुए बड़े IED हमले में भी उसकी भूमिका सामने आई थी। इस हमले में 12 जवान बलिदान हुए थे और 14 अन्य घायल हुए थे। फरवरी 2022 में लातेहार-लोहरदगा सीमा के बुलबुल जंगल में हुए ऑपरेशन ‘डबल बुल’ के दौरान भी उसका नाम सामने आया।

इसी अभियान के बाद भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए थे और जून 2022 में इस मामले की जाँच NIA ने अपने हाथ में ली थी। इससे पहले एक करोड़ रुपए के इनामी केंद्रीय समिति सदस्य सुधाकरण से जुड़े मामले में भी उसकी भूमिका जाँच के दायरे में आई थी, जिसमें प्रभु साव की निशानदेही पर हथियार और नक्सली साहित्य बरामद किया गया था।