मुस्लिम लड़की नहीं कर सकती रोमांटिक बातचीत, यह शरीयत में नाजायज: मौलाना हुसैन ने निकाह से पहले मिलने को बताया गलत

इस्लाम में महिलाओं की आजादी और उनके अधिकारों को लेकर अक्सर एकतरफा चर्चाएँ होती हैं। बुर्के से लेकर पराए मर्दों से बातचीत और शिक्षा के अधिकार जैसे मुद्दों पर अक्सर चर्चाएँ होती हैं। यहाँ तक की महिलाओं की मोहब्बत पर भी शर्तें लगाई गई हैं। शाही चीफ मुफ्ती ऑफ उत्तर प्रदेश मौलाना चौधरी हुसैन ने महिलाओं की मोहब्बत का दायरा भी बताया है।

न्यूज18 से बातचीत में मौलाना ने कहा कि शरीयत ने मोहब्बत के नाम पर होने वाले गलत अमल को हराम ठहराया है। मौलाना ने कहा कि पसंद होना अपने आप में कोई गुनाह नहीं है। गुनाह तब माना जाता है, जब उस भावनात्मक लगाव के चलते ऐसे काम हों जिन पर अल्लाह और शरीयत ने स्पष्ट रूप से रोक लगाई है।

उन्होंने कहा कि लड़का और लड़की के बीच बातचीत को लेकर भी शरीयत का नजरिया नियत और तरीके पर आधारित है। अगर बातचीत में रोमांटिक भाव, बेहयाई या गलत जज्बात शामिल हों तो वह नाजायज है। लेकिन यदि बातचीत का उद्देश्य केवल निकाह की नियत से रिश्ते को आगे बढ़ाना हो और वह शरीयत की सीमाओं के भीतर रहकर की जाए, तो इसकी कुछ गुंजाइश मानी जा सकती है।

मुलाकात के सवाल पर मौलाना ने साफ किया कि शरीयत के अनुसार निकाह से पहले लड़का और लड़की का अकेले मिलना जायज नहीं है। यदि किसी जरूरी वजह से जैसे रिश्ते की बातचीत या निकाह तय करने के लिए मुलाकात करनी हो तो यह दोनों परिवारों के जिम्मेदार लोगों की मौजूदगी और निगरानी में ही होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना निकाह के अपनी मर्जी से मिलना शरीयत में अनुमति नहीं रखता।