‘युद्ध का असर लंबे समय तक रहने की आशंका, एकजुट रहना होगा’: लोकसभा से PM मोदी का संदेश, कहा- कूटनीति और बातचीत से ही निकलेगा मिडिल ईस्ट संकट का हल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में सोमवार (23 मार्च 2026) को पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और उसके कारण भारत के सामने आई चुनौतियों पर विस्तार से अपनी बात रखी। पीएम मोदी ने सदन में खड़े कहा कि इस मुद्दे पर उनकी बात संसद के माध्यम से पूरी दुनिया तक पहुँचनी चाहिए। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने उन्हें पूरी जानकारी दी है। इस संघर्ष को अब तीन हफ्ते से ज्यादा समय हो चुका है। पूरी दुनिया इस संकट का जल्द से जल्द समाधान निकालने के लिए सभी पक्षों से आग्रह कर रही है।

पीएम मोदी ने कहा, “इस युद्ध का असर लंबे समय तक बने रहने की आशंका है। इसलिए हमें एकजुट रहना होगा, हमें तैयार रहना होगा। हमने कोरोना के समय ऐसी चुनौतियों का सामना किया था, फिर से हमें वैसे ही संयम की जरूरत है। यही हमारी पहचान है, यही हमारी ताकत है। हमें बहुत सावधान और सतर्क भी रहता है। हालात का फायदा उठाकर लोग झूठ फैलाने की कोशिश करेंगे, ऐसे लोगों को सफल नहीं होने देना है। मैं राज्य सरकारों से भी अपील करूँगा कि कालाबाजारी करने वाले, जमाखोरी करने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए। देश की हर सरकार, हर नागरिक जब मिलकर चलेंगे, तो हम हर चुनौती का सामना करने में सफल होंगे।”

पीएम मोदी ने स्पष्ट कहा कि इस युद्ध ने भारत के सामने अप्रत्याशित चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की संसद से यह संदेश जाना चाहिए कि संकट का शीघ्र समाधान हो। प्रधानमंत्री ने युद्ध के बीच स्वदेश लौटे भारतीयों की जानकारी भी सदन को दी। उन्होंने कहा कि भारतीयों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमारे मिशन प्रभावित देशों में लगातार भारतीयों की मदद कर रहे हैं। हर जरूरी कदम उठाया जा रहा है ताकि कोई भी भारतीय संकट में न फँसे।

इसके साथ ही पीएम मोदी ने पिछले 11 सालों में भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर किए गए कामों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भारत ने अपनी क्रूड ऑयल इम्पोर्ट का डाइवर्सिफिकेशन किया है। पहले केवल 27 देशों से एनर्जी इम्पोर्ट होता था, आज यह संख्या बढ़कर 41 देशों तक पहुँच गई है। हमारी रिफाइनिंग कैपेसिटी में भी काफी वृद्धि हुई है। हमारे पास 53 लाख मीट्रिक टन क्रूड ऑयल का रिजर्व है और लक्ष्य 65 लाख मीट्रिक टन का रखा गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा प्रयास है कि हर जरूरी सामान से जुड़े जहाज सुरक्षित रूप से भारत पहुँचें। हम हर पक्ष से संवाद कर रहे हैं। ऐसे प्रयासों के कारण होर्मुज स्ट्रेट में फंसे हमारे कई जहाज भारत पहुँच गए हैं। पिछले 10-11 साल में इथेनॉल के उत्पादन और ब्लेंडिंग पर बहुत काम हुआ है। आज पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग हो रही है जिससे काफी बचत हो रही है।

पीएम मोदी ने मेट्रो नेटवर्क के विस्तार और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर दिए गए बल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज वैकल्पिक ईंधन पर जिस कदर काम हो रहा है, उससे भारत का भविष्य और सुरक्षित होगा। एनर्जी आज इकोनॉमी की रीढ़ है। ग्लोबल एनर्जी जरूरतों को पूरा करने वाला वेस्ट एशिया है। दुनियाभर की अर्थव्यवस्था इस वर्तमान संकट से प्रभावित हो रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार शॉर्ट टर्म, मिड टर्म और लॉन्ग टर्म असर के लिए रणनीति के साथ काम कर रही है। हम हर स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा कर रहे हैं। जहाँ जरूरत है, सपोर्ट दिया जा रहा है। इंटर मिनिस्ट्रियल ग्रुप बनाया गया है जो हर रोज मिलता है। साझा प्रयासों से हम परिस्थितियों का बेहतर सामना कर पाएंगे।

पीएम मोदी ने कहा, “भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न है। खरीफ सीजन की ठीक से बुवाई हो सके, इसके लिए सरकार ने खाद्य की पर्याप्त व्यवस्था की है। हमने पहले भी किसानों पर संकटों का बोझ नहीं पड़ने दिया था। दुनिया के बाजार में यूरिया की एक बोरी तीन हजार रुपये तक पहुंच गई थी, लेकिन भारत के किसानों को वही बोरी तीन सौ रुपये से भी कम कीमत पर दी गई थी।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों को 22 लाख से अधिक सोलर पंप दिए गए हैं। इससे उनकी डीजल पर निर्भरता कम हुई है। सरकार किसानों की मदद करती रहेगी। गर्मी का मौसम शुरू होने वाला है। आने वाले समय में बिजली की डिमांड बढ़ती जाएगी। पावर जेनरेशन से सप्लाई तक सभी सिस्टम की मॉनिटरिंग की जा रही है।

पीएम मोदी ने कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी से भी मदद मिली है। देश ने बड़े कदम उठाए हैं। आधा हिस्सा रिन्यूएबल सोर्स से आता है। बीते 11 वर्षों में देश ने अपनी सोलर पावर कैपेसिटी तीन गीगावाट से बढ़ाकर 100 गीगावाट के पार पहुंचा दिया है। गोवर्धन योजना के तहत बॉयो गैस प्लांट भी काम करना शुरू कर चुके हैं। ये सारे प्रयास आज काम आ रहे हैं। सरकार ने न्यूक्लियर एनर्जी को भी प्रोत्साहित किया है। अगले पाँच वर्षों में 1500 सौ नई पावर कैपेसिटी जोड़ी जाएगी। शुरुआत से ही हमने इस संघर्ष को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। सभी से तनाव कम करने और संघर्ष खत्म करने का आग्रह किया है। एनर्जी इंफ्रा पर हमले का विरोध किया है।

लोकसभा में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, “होर्मुज स्ट्रेट पर रुकावट अस्वीकार्य है। कमर्शियल जहाजों पर हमले अस्वीकार्य हैं। भारत सुरक्षित आवाजाही के लिए डिप्लोमेसी के जरिये प्रयास कर रहा है। बातचीत और कूटनीति ही इस समस्या का समाधान है। हमारे हर प्रयास संघर्ष को समाप्त करने के लिए हैं।”

उन्होंने कहा कि भारत अपनी जरूरत की 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है। इसकी वजह से डोमेस्टिक सप्लाई को प्राथमिकता दी जा रही है। पेट्रोल-डीजल की सप्लाई निर्बाध रूप से जारी रहे इसके लिए भी काम किया जा रहा है। भारत सरकार ने बीते 11 सालों में एनर्जी इंपोर्ट का डायवर्सिफिकेशन किया है। पहले क्रूड, एलएनजी इत्यादि चीजें 27 देशों से मँगाया जाता था, आज 41 देशों से एनर्जी उत्पाद मँगाए जाते हैं। हमारी सरकार ने संकट के इसी समय के लिए स्ट्रेटजिक स्टोरेज बनाए थे जिसकी क्षमता लगातार बढ़ाई जा रही है। इन सारे प्रयासों से भारत इस वैश्विक संकट का सामना मजबूती से कर रहा है।