प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार (15 दिसंबर 2025) से जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान के लिए तीन दिवसीय बहुपक्षीय दौरे पर रवाना हुए हैं। इस यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती प्रदान करना, आर्थिक सहयोग बढ़ाना और क्षेत्रीय – वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करना है।
जॉर्डन: 75 वर्षों की कूटनीतिक साझेदारी का प्रतीक
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी यात्रा की शुरुआत जॉर्डन से करेंगे, जहाँ उन्हें किंग अब्दुल्ला द्वितीय इब्न अल हुसैन ने आमंत्रित किया है। इस दो दिवसीय दौरे में दोनों नेता भारत-जॉर्डन संबंधों की समीक्षा करेंगे और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। जॉर्डन पश्चिम एशिया में रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण देश है और अप्रैल-अगस्त 2025-26 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 1.2 अरब डॉलर तक पहुँच चुका है।
भारत का निर्यात लगभग 461 मिलियन डॉलर रहा, और अनुमान है कि 2030 तक यह 5 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है। इस दौरे से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ेगा और क्षेत्रीय शांति को मजबूती मिलेगी।
इथियोपिया: अफ्रीका में पहला कदम
जॉर्डन के बाद पीएम मोदी 16 दिसंबर 2025 को इथियोपिया के लिए रवाना होंगे। यह उनकी अफ्रीकी देश की पहली यात्रा होगी। अदीस अबाबा में प्रधानमंत्री डॉ अबी अहमद अली से द्विपक्षीय वार्ता में भारत-इथियोपिया संबंधों के सभी पहलुओं पर विचार विमर्श होगा।
इथियोपिया ग्लोबल साउथ में भारत का महत्वपूर्ण साझेदार है और दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 550 मिलियन डॉलर तक पहुँच चुका है। इस दौरे से ऑटोमोबाइल, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स और शिक्षा सेवाओं में निवेश बढ़ने की उम्मीद है, जिससे व्यापार और तकनीकी सहयोग को नई दिशा मिलेगी।
ओमान: स्थायी रणनीतिक साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी का दौरा 17 और 18 दिसंबर 2025 को ओमान में समाप्त होगा। सुल्तान हैथम बिन तारिक के निमंत्रण पर यह पीएम मोदी की ओमान की दूसरी यात्रा है। दोनों देशों के राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगाँठ इस यात्रा का प्रतीक है।
हाल ही में भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को मंजूरी मिली है, जिससे ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएँ खुलेंगी। इस दौरे से व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को मजबूती मिलेगी।
इस यात्रा के माध्यम से भारत अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने का संदेश देगा। तीनों देशों के साथ द्विपक्षीय सहयोग, निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए अवसर पैदा होंगे।

