चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और एन वी अंजारिया की बेंच ने मंगलवार (10 फरवरी 2026) को ओ पी शुक्ला और समता आंदोलन समिति की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केन्द्र से जवाब देने को कहा। इन याचिकाओं में एससी-एसटी क्रीमीलेयर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिए 1 अगस्त 2024 के ऐतिहासिक फैसले को लागू करने की माँग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने 1 अगस्त 2024 को एससी-एसटी में क्रीमीलयर लागू करने को लेकर अहम फैसला दिया था। तत्कालीन चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली सात जजों की संविधान बेंच ने 6:1 के बहुमत से यह फैसला सुनाया था। इसमें कहा गया था कि राज्यों को संवैधानिक तौर पर अनुसूचित जातियों (SC) के अंदर वर्गीकरण करने का अधिकार है, ताकि उन जातियों को ऊपर उठाने के लिए रिज़र्वेशन दिया जा सके जो उनमें सामाजिक और शैक्षणिक रूप से ज्यादा पिछड़ी हैं।
राज्यों को कोटे के अंदर कोटा बनाने को मंजूरी दी थी, हालाँकि कोर्ट ने कहा था कि वर्गीकरण का आधार उचित होना चाहिए। कोर्ट ने एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमीलेयर लागू करने की बात कही थी।
सुप्रीम कोर्ट के इसी फैसले को लागू करने की माँग की जा रही है। इन याचिकाओं में केन्द्र और राज्यों को दिशा-निर्देश जारी करने की माँग भी की गई है। याचिका में कहा गया है कि केन्द्र और राज्य उन मानदंडों को तय करे, जिसके आधार पर एससी-एसटी वर्ग के संभ्रांत लोगों को आरक्षण से बाहर रखा जा सके, ताकि जरूरतमंद लोगों तक इसका लाभ पहुँचे। इसके लिए समय सीमा तय करने की भी माँग याचिका में की गई है। केन्द्र को इन सवालों का ही जवाब देना है।

