तमिलनाडु में सीएम सी विजय जोसेफ की सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिसमें गायों और बछड़ों को काटने पर रोक लगाई गई थी। जबकि यह फैसला हाई कोर्ट ने सरकार के ही एक आदेश के हवाले से दिया था।
दरअसल, यह फैसला मद्रास हाई कोर्ट ने 27 मई 2026 को ‘हिंदू मक्कल काची’ के महासचिव के. सूर्या प्रशांत की उस याचिका पर सुनाया था, जिसमें बकरीद पर केवल निर्धारित स्थानों पर ही कुर्बानी की माँग की गई थी। लेकिन हाई कोर्ट ने अपने फैसले में किसी भी दिन और किसी भी जगह गायों और बछड़ों को काटने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था।
हाई कोर्ट ने इस प्रतिबंध के फैसले को तमिलनाडु सरकार के उस आदेश के हवाले से दिया था, जिसमें कहा गया था कि दूध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए गायों की कुर्बानी पर रोक जरूरी है। इसके अलावा हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों का भी जिक्र किया था जिनमें कहा गया था कि बकरीद के जश्न के लिए गायों की कुर्बानी कोई जरूरी रिवाज नहीं है।
अब हाई कोर्ट के इसी फैसले को तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ने चुनौती दी है। सरकार द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि हाई कोर्ट का फैसला ‘तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम 1958’ के खिलाफ है। तमिलनाडु सरकार ने कहा कि जब कानून कुछ तय जगहों पर गायों की एक खास श्रेणी को काटने की इजाजत देता है, तो कानून के खिलाफ दिया गया कोई भी कोर्ट का आदेश नहीं माना जाएगा।
इस कानून के अलावा तमिलनाडु सरकार ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960, पशु क्रूरता निवारण (वधशाला) नियम 2001, तमिलनाडु शहरी स्थानीय निकाय अधिनियम 1998 और तमिलनाडु शहरी स्थानीय निकाय नियम 2023 का भी हवाला देकर हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी। साथ ही आरोप लगाया कि हाई कोर्ट ने वैध कानून की जगह न्यायिक कानून लागू किया है।
लाइव लॉ के मुताबिक, तमिलनाडु सरकार ने यह याचिका 09 जून 2026 को दायर की थी और अभी फाइलिंग में कमियों के चलते ‘डिफेक्ट लिस्ट’ में है।

