तिरुपति लड्डू में दूध का घी नहीं, सिर्फ सिंथेटिक घी और पाम तेल मिला: CBI चार्जशीट, चर्बी के दावे निकले गलत

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने शुक्रवार (30 जनवरी 2026) को नल्लोर एसीबी कोर्ट में तिरुपति लड्डू मामले में चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट में स्पष्ट किया गया है कि लड्डू सिंथेटिक घी से बनाए गए थे, न कि गाय के दूध के घी से।

साथ ही चार्जशीट में तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को आपूर्ति किए गए घी में किसी भी प्रकार के चर्बी जैसे टैलो या लार्ड मिलाए जाने का कोई उल्लेख नहीं है, जिससे विवाद में पहले उठाए गए एक बड़े आरोप का अंत हो गया।

CBI की विशेष जाँच टीम (SIT) के अनुसार, घी के नमूनों के प्रयोगशाला परीक्षणों में पता चला कि लड्डू प्रसाद बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री सिंथेटिक थी और इसमें वनस्पति तेल मिलाया गया था।

जाँच में यह भी सामने आया कि यह घी दूध से प्राप्त नहीं था। जुलाई 2024 में AR डेयरी द्वारा आपूर्ति किए गए टैंकरों से लिए गए नमूनों की जाँच में यह पुष्टि हुई कि घी सिंथेटिक था। चार्जशीट में भोले बाबा डेयरी और उसके संबद्ध फर्मों द्वारा सप्लाई किए गए घी को भी नकली घी बताया गया है।

2024 से चल रहा है विवाद

यह मामला तब सुर्खियों में आया जब तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने सितंबर 2024 में दावा किया कि पिछले YSR कॉन्ग्रेस सरकार (2019-2024) के कार्यकाल में लड्डू प्रसाद में चर्बी मिलाकर घी का उपयोग किया गया था।

इन दावों के बाद, केंद्रीय जाँच ब्यूरो के तहत एक विशेष जाँच टीम बनाई गई, जो यह जाँचने के लिए गठित हुई कि TTD को आपूर्ति किए गए घी में टैलो या लार्ड तो नहीं मिला।

जाँच के दौरान, CBI ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) से कहा कि वह कच्चे डेटा की पुन: जाँच करे और 6 और 12 जुलाई 2024 को चार AR डेयरी टैंकरों से लिए गए शेष घी के नमूनों पर नए परीक्षण करे। NDDB ने यह परीक्षण कर 27 मार्च को विस्तृत रिपोर्ट सौंपी, जो अब चार्जशीट का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

प्रयोगशाला रिपोर्ट में यह पाया गया कि सभी चार नमूनों में ब्यूटिरिक एसिड का स्तर मापने योग्य सीमा से कम था, जिससे दूध की वसा की मात्रा बेहद कम थी। इतने कम दूध वसा होने के बावजूद, लॉरिक और मिरिस्टिक एसिड की उपस्थिति से पता चला कि घी में नारियल तेल या पाम कर्नेल तेल का उपयोग हुआ। आगे की फैटी एसिड विश्लेषण में यह भी पुष्टि हुई कि इसमें पाम ऑयल और पाम स्टीयरिन का इस्तेमाल हुआ और फिश ऑयल के होने की संभावना बहुत कम थी।

रिपोर्ट में क्या आया सामने

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दो नमूनों में कोलेस्ट्रॉल मौजूद नहीं था, जिससे यह साफ हुआ कि वे केवल वनस्पति तेल से बने थे। कोलेस्ट्रॉल की अनुपस्थिति से टैलो, लार्ड या फिश ऑयल की संभावना भी नगण्य हो गई।

फैटी एसिड प्रोफाइल और बीटा साइटोस्टेरॉल की उपस्थिति के आधार पर चार्जशीट में निष्कर्ष निकाला गया कि लड्डू बनाने में उपयोग किया गया घी मुख्य रूप से पाम ऑयल और पाम कर्नेल ऑयल का मिश्रण था।

चार्जशीट दाखिल होने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि लड्डू बनाने में किसी प्रकार की चर्बी का इस्तेमाल नहीं हुआ, लेकिन दूध आधारित घी की बजाय सिंथेटिक सामग्री के इस्तेमाल ने भारत के सबसे पवित्र मंदिर प्रसाद की आपूर्ति श्रृंखला में गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।