दिल्ली HC से कुलदीप सेंगर को झटका, नहीं सस्पेंड होगी 10 साल की सजा: उन्नाव रेप पीड़ित के पिता की कस्टोडियल डेथ को लेकर हुई जेल

उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की कस्टडी में हुई मौत के मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। सोमवार (19 जनवरी 2026) को कोर्ट ने सेंगर की वह अर्जी खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने अपनी 10 साल की सजा को सस्पेंड (रोकने) करने की माँग की थी। हालाँकि, कुलदीप सिंह सेंगर साढ़े सात साल से जेल में हैं, लेकिन उनके पुराने रिकॉर्ड और मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस रविंद्र दुडेजा ने उन्हें राहत देने से साफ मना कर दिया।

क्या था यह पूरा मामला?

बात अप्रैल 2018 की है, जब उन्नाव रेप पीड़िता का परिवार कोर्ट में सुनवाई के लिए जा रहा था। उसी दौरान सरेआम पीड़िता के पिता के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। अगले ही दिन पुलिस ने उल्टा पिता को ही अवैध हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस कस्टडी में लगी गंभीर चोटों की वजह से आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2019 में इस केस को उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर किया गया था।

क्यों खारिज हुई सेंगर की अर्जी?

कुलदीप सिंह सेंगर ने दलील दी थी कि वह लंबे समय से जेल में हैं, इसलिए उनकी सजा पर रोक लगाई जाए। कोर्ट ने कहा कि सजा सस्पेंड न हो पाने की एक वजह खुद सेंगर हैं, क्योंकि वे बार-बार नई-नई अर्जियाँ लगाते रहे जिससे मुख्य अपील पर सुनवाई में देरी हुई।

जज ने साफ किया कि इस केस में कोई नया मोड़ नहीं आया है और सेंगर का आपराधिक इतिहास भी ठीक नहीं है, इसलिए उन्हें अभी बाहर नहीं भेजा जा सकता

सुप्रीम कोर्ट से भी लग चुका है ब्रेक

कुलदीप सिंह सेंगर को दिसंबर 2019 में रेप केस में उम्रकैद की सजा मिली थी। हाल ही में हाई कोर्ट की एक बेंच ने उस सजा को सस्पेंड कर दिया था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगा दी। अब पिता की मौत वाले केस में भी राहत न मिलने से सेंगर की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कोर्ट ने अब इस मामले की मुख्य अपील पर जल्द सुनवाई करने की बात कही है।