अमेरिका ने दुनिया भर के देशों के खिलाफ व्यापारिक पाबंदियाँ बढ़ाते हुए एक बड़ा कदम उठाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फोर्स्ड लेबर यानी जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात पर सख्ती दिखाई है। इसके तहत भारत समेत 17 देशों के सामान पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया।
यह नया टैरिफ शुक्रवार (24 जुलाई) रात 12:01 बजे से लागू हो चुका है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने सेक्शन 301 के तहत की गई जाँच के बाद यह फैसला लिया है। चीन, जापान और ब्रिटेन जैसे देशों पर 12.5% से ज्यादा का टैरिफ लगाया, जबकि भारत को कम दरों वाले स्लैब में रखा गया है।
US imposes 10% tariffs on goods purchased from India for failure to enforce prohibition on forced labour. pic.twitter.com/Slu0Qy8AAK
— News Arena India (@NewsArenaIndia) July 23, 2026
भारत पर 10% टैरिफ लगानी की वजह
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के अनुसार, यह कार्रवाई उन देशों पर की गई है जो जबरन श्रम से बने सामान को रोकने में पूरी तरह सफल नहीं रहे। शुरुआत में माना जा रहा था कि अमेरिका भारत पर 12.5% का टैरिफ लगाएगा।
हालाँकि लेबर स्टैंडर्ड को लेकर दोनों देशों के बीच हुई सकारात्मक बातचीत के बाद भारत को 10% वाले स्लैब में रखा गया। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि भारत ने फोर्स्ड लेबर के खिलाफ कदम उठाने के लिए दिशा-निर्देश और कमिटमेंट दिखाए हैं। इसी वजह से भारत को राहत देते हुए कम दरों की श्रेणी में शामिल किया गया है।
भारत के साथ-साथ अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, कनाडा, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला, होंडुरास, इंडोनेशिया, जॉर्डन, मलेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान, श्रीलंका, त्रिनिदाद एंड टोबैगो और ब्रिटेन को भी 10% टैरिफ वाले समूह में जगह दी गई है।
जिन देशों में जबरन मजदूरी रोकने के सख्त कानून बिल्कुल नहीं हैं, उन पर 12.5% का टैरिफ लगाया गया है। अमेरिकी सरकार का मानना है कि इस कदम से दुनिया भर में मानवाधिकारों की रक्षा होगी। साथ ही अमेरिकी श्रमिकों को व्यापार में बराबरी का मौका मिल सकेगा।
किन सामानों को मिली छूट
इस नए फैसले से कुछ खास तरह के सामानों को बाहर रखा गया है। तेल, गैस और ऊर्जा से जुड़े उत्पादों पर यह अतिरिक्त टैरिफ लागू नहीं होगा। फर्टीलाइजर और USMCA (अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौते) के तहत होने वाले व्यापार को भी इस टैक्स से दूर रखा गया है।
इसके अलावा जिन सामानों पर पहले से सेक्टोरल टैरिफ लागू हैं, जैसे स्टील और एल्युमिनियम, वे भी इस नए फैसले से प्रभावित नहीं होंगे। भारत ने पहले ही इस तरह के उत्पादों की निगरानी के लिए नई गाइडलाइंस तैयार कर ली थीं ताकि उसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बड़ा असर न पड़े।
दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में ट्रंप के पुराने ‘लिब्रेशन डे’ टैरिफ को रद्द कर दिया था। इसके बाद ट्रंप प्रशासन अब उन कानूनों का सहारा ले रहा है जिन्हें अदालत में चुनौती देना मुश्किल हो। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन आने वाले हफ्तों में एक और नया टैरिफ ला सकता है।
यह नया टैक्स उन देशों पर लगाया जाएगा जो अपने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बहुत ज्यादा सब्सिडी देते हैं और सस्ते सामान से अमेरिकी बाजार को पाट देते हैं। ट्रंप सरकार का मुख्य मकसद अमेरिका की आयात पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म करना है।

