धोखे से गोमांस खिलाने वाले ‘दोस्त’ आफताब को वीरेंद्र यादव ने मार डाला, ‘पैसे का विवाद’ बता अब्बा कलामुद्दीन डाल रहा पर्दा: जानिए क्या है पूरा मामला

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के सिंधोरा थाना क्षेत्र में पुलिस ने आफताब आलम की हत्या में उसके दोस्त वीरेंद्र यादव को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में वीरेंद्र ने जो बताया उसने पुलिस को भी चौंका दिया। दरअसल, वीरेंद्र यादव ने बताया है कि आफताब ने उसे धोखे से गोमांस खिलाया था और दोस्तों के बीच बार-बार इसका मजाक भी बनाता था। वीरेंद्र के इस कबूलनामे के बाद आफताब का परिवार इस हत्याकांड को सिर्फ पैसे के लिए की गई हत्या साबित करने पर तुल गया है और अपने बेटे को पाक साफ बता रहा है।

क्या है पूरा मामला?

7 जनवरी 2026 की सुबह लश्करपुर से सटे महगाँव में एक युवक का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई थी। मृतक की पहचान बिहार के छपरा जिले के रामपुरा गांव निवासी आफताब के रूप में हुई थी। उसके शव के गले पर रस्सी से कसने का निशान था, जिससे हत्या की आशंका गहराई। इसके बाद सिंधोरा पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू की थी।

जाँच के दौरान पुलिस ने सर्विलांस और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का सहारा लिया। इसमें सामने आया कि हत्या से पहले आफताब की लगातार एक युवक से बातचीत हो रही थी। यह युवक कोई और नहीं बल्कि वीरेंद्र यादव था। 7 जनवरी को दिन भर में दोनों के बीच कई बार फोन पर बात हुई थी। इसी आधार पर पुलिस ने वीरेंद्र को शक के दायरे में लिया और उसकी तलाश शुरू कर दी।

गोमांस खिलाया और दोस्तों के बीच उड़ाया मजाक

पुलिस पूछताछ में वीरेंद्र ने बताया कि वह और आफताब एक ठेकेदार के माध्यम से बेंगलुरु स्थित एक फैक्ट्री में काम करते थे। यह फैक्ट्री बिजली उपकेंद्रों में लगने वाले पैनल बनाती है। वहीं दोनों की पहचान हुई और दोस्ती भी बढ़ी। वीरेंद्र का आरोप है कि सितंबर 2025 में आफताब ने उसे धोखे से गोमांस खिला दिया था। जब उसे इस बात का पता चला तो वह बेहद आहत हो गया। इसके बाद आफताब अक्सर उसे इस बात को लेकर चिढ़ाता था। यही नहीं, दोस्तों के वॉट्सऐप ग्रुप में भी इस बात का जिक्र कर उसका मजाक उड़ाता था।

लगातार अपमान और मजाक से वीरेंद्र के मन में आफताब के प्रति गहरी नाराजगी और नफरत पैदा हो गई। उसने उसी समय आफताब को मारने की ठान ली थी, लेकिन मौका नहीं मिल पा रहा था। इसी दौरान ठेकेदार ने दोनों को अलग-अलग जगह काम पर भेज दिया। वीरेंद्र को गुजरात की एक फैक्ट्री में भेजा गया, जबकि आफताब को चेन्नई की दूसरी फैक्ट्री में काम पर लगा दिया गया।

साथ जाने के बहाने वीरेंद्र ने आफताब को बुलाया

जनवरी के पहले सप्ताह में आफताब काम से छुट्टी लेकर अपने गाँव आया था। इसी दौरान उसने वीरेंद्र को फोन कर बताया कि वह घर आया हुआ है और अब चेन्नई लौटने वाला है। इस पर गुजरात में काम कर रहे वीरेंद्र ने झूठ बोला। उसने कहा कि उसे भी चेन्नई जाना है और वह इस समय वाराणसी में है। दोनों एक साथ चलेंगे।

इसके बाद वीरेंद्र गुजरात से ट्रेन पकड़कर वाराणसी कैंट स्टेशन पहुँचा। 7 जनवरी को उसने आफताब से मुलाकात की और फिर उसे अपने गाँव चलने के लिए मनाया लिया। आफताब उसकी बातों में आ गया और उसके साथ चल पड़ा। रात में महगाँव ले जाकर वीरेंद्र ने रस्सी से उसका गला कस दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद वह फरार हो गया।

थाना प्रभारी ज्ञानेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि इस मामले का खुलासा सर्विलांस, CCTV फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर किया गया है। इन्हीं तकनीकी साक्ष्यों की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रेस की गई और अंततः उसे उसके फूफा के घर से गिरफ्तार कर लिया गया।

आफताब के परिवार ने गोमांस खिलाने से किया इनकार

आफताब के परिवार ने वीरेंद्र यादव के आरोप को खारिज किया है कि उसने वीरेंद्र को धोखे से ‘गोमांस’ खिलाया था। आफताब के अब्बा कलामुद्दीन ने कहा, “मेरा बेटा अलग-अलग समुदायों के लोगों के साथ रहता था। इस तरह की कोई शिकायत कभी किसी ने नहीं की।”

उन्होंने कहा, “सभी आरोप पूरी तरह झूठे हैं। हमें शक है कि आफताब की हत्या पैसे, नौकरी और अन्य कारणों को लेकर की गई है। उसके कुछ अहम दस्तावेज भी गायब हैं। मेरे बेटे के दो बैंक खातों से सारा पैसा आरोपित ने निकाल लिया है।”

जाँच के दौरान पुलिस ने मृतक के कॉल डिटेल रिकॉर्ड और बैंक खाते की जानकारी जुटाई। जाँच में पता चला आफताब के खाते से 40,000 रुपए वीरेंद्र के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। पुलिस ने बताया कि वीरेंद्र यादव कोई नया अपराधी नहीं है। उसके खिलाफ पहले से चोलापुर थाने में हत्या, आर्म्स एक्ट, मारपीट और बलवा से जुड़े तीन मुकदमे दर्ज हैं।