बंगाल में अगर काटे गाय-बैल तो होगी 6 महीने जेल: शुभेंदु सरकार ने पशु वध पर सख्त किए नियम, जानिए हर डिटेल

पश्चिम बंगाल सरकार के गृह एवं पर्वतीय कार्य विभाग ने बुधवार (13 मई 2026) को पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 को सख्ती से लागू करने को लेकर एक नोटिस जारी किया।

सरकार ने गाय, बैल, बछड़ा, भैंसा के वध से पहले आधिकारिक प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य कर दिया है। नियमों का उल्लंघन करने पर 6 महीने तक की जेल, 1000 रुपए तक का जुर्माना या दोनों सजाएँ हो सकती हैं।

अपने आदेश में विभाग ने कानून के पालन को लेकर 2018 से 2022 के बीच कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा दिए गए कई आदेशों का भी हवाला दिया।

वध से पहले प्रमाणपत्र जरूरी

नोटिफिकेशन के अनुसार, अधिनियम के तहत आने वाले किसी भी पशु का वध तब तक नहीं किया जा सकेगा, जब तक नगरपालिका के चेयरमैन या पंचायत समिति के सभापति और सरकारी पशु चिकित्सक की ओर से संयुक्त प्रमाणपत्र जारी न किया जाए।

यह प्रमाणपत्र तभी दिया जाएगा, जब पशु की उम्र 14 साल से अधिक हो और वह काम या प्रजनन के लायक न रहे, या फिर उम्र, चोट, विकृति या किसी लाइलाज बीमारी के कारण स्थायी रूप से अक्षम हो गया हो। इसके कारणों को लिखित रूप में दर्ज करना भी जरूरी होगा।

आदेश में आगे कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति को प्रमाणपत्र देने से इनकार किया जाता है, तो वह 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार के पास अपील कर सकता है।

केवल अधिकृत जगहों पर ही होगा वध

नोटिफिकेशन में यह भी साफ किया गया है कि प्रमाणपत्र मिलने के बाद भी पशुओं का वध केवल नगरपालिका के बूचड़खानों या स्थानीय प्रशासन द्वारा अधिकृत स्थानों पर ही किया जा सकेगा। सार्वजनिक स्थानों पर खुले में पशु वध पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

सरकार ने अधिनियम के पालन के लिए अधिकृत अधिकारियों को परिसरों की जाँच का अधिकार भी दिया है और चेतावनी दी है कि कोई भी व्यक्ति जाँच में बाधा नहीं डाल सकता।

नियम तोड़ने पर जेल और जुर्माना

राज्य सरकार ने कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को 6 महीने तक की जेल, 1000 रुपए तक का जुर्माना या दोनों सजा दी जा सकती है। 1950 के इस अधिनियम के तहत आने वाले सभी अपराधों को संज्ञेय अपराध घोषित किया गया है।

यह नोटिफिकेशन राज्य में अवैध पशु वध, पशु तस्करी, अवैध पशु बाजारों और उनसे जुड़े वसूली गिरोहों के खिलाफ चल रही व्यापक कार्रवाई के बीच जारी किया गया है।