विषय: हिन्दू धर्म

इस्लाम-नमाज

सामाजिक-धार्मिक पुनर्जागरण के समय कहाँ और क्यों पिछड़ गया भारत का मुसलमान?

देश के कई मुस्लिम आज भी कबायली प्रवृतियों का अनुसरण करते नजर आते हैं। अल्पसंख्यक इलाकों में अशिक्षा, भुखमरी, दरिद्रता और तमाम प्रकार की गरीबी आज भी उसी तरह से नजर आती है, जिस हाल में बहादुर शाह जफ़र छोड़कर गए थे।
सीता के चरणों के निशान

बिहार का वो शहर जहॉं पहली बार सीता ने की थी छठ पूजा, आज भी मौजूद हैं चरणों के निशान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सीता ने पहली बार छठ पूजा बिहार के मुंगेर में गंगा तट पर की थी। इसके प्रमाण स्वरूप आज भी यहॉं अर्घ्य देते उनके चरण चिह्न मौजूद हैं।
छठ- बिहार की पहचान, बिहारियों की सांस्कृतिक गर्भनाल

छठ पर्व के चार दिन: क्यों होता है छठ, कैसे होती है पूजा, क्या हैं इसके मायने; सब विस्तार से

सूर्य की शक्तियों का मुख्य श्रोत उनकी पत्नी ऊषा और प्रत्यूषा हैं। छठ में सूर्य के साथ-साथ दोनों शक्तियों की संयुक्त आराधना होती है। प्रात:काल में सूर्य की पहली किरण (ऊषा) और सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण (प्रत्यूषा) को अर्घ्य देकर दोनों का नमन किया जाता है।
परिवार नियोजन, इस्लाम

‘हम दो, हमारे दो’ कहने से मजहब विशेष और लिबरलों को अपने ऊपर हमला होता क्यों दिखता है?

परिवार नियोजन कार्यक्रम न आज का है और न इससे जुड़े विज्ञापनों में हिंदू वेशभूषा वालों को दिखाने का चलन। पर, इससे कभी हिंदू भावना आहत नहीं होती। केवल समुदाय विशेष को 'हम दो' धर्म पर हमला दिखता है।
भूपेश बघेल छत्तीसगढ़

कॉन्ग्रेसी CM भूपेश बघेल ने दनादन सहा चाबुक का वार, गायों की पूजा कर खिलाई खिचड़ी

मुख्यमंत्री पारम्परिक पोषक में दिखे। वहाँ उन्होंने परिवार के साथ गायों की पूजा की। बघेल ने इस दौरान गायों को खिचड़ी खिला कर पूजा की परंपरा का पालन किया। गौरी-पूजा में मुख्यमंत्री ने ताबरतोड़ चाबुक भी खाए।
दीपावली

बग्वाल: जहाँ बिना आतिशबाजी और पटाखों के मनाया जाता है प्रकाशपर्व दीपावली

उत्तराखंड में दीपावली के 11 दिन या एक माह बाद माने जाने के पीछे एक और मान्यता बताई जाती है। कहा जाता है कि गढ़वाल क्षेत्र में भगवान राम के अयोध्या पहुँचने की खबर दीपावली के ग्यारह और कुछ स्थानों में एक माह बाद मिली और इसीलिए ग्रामीणों ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बाद दीपावली का त्योहार मनाया था और इसी परंपरा को निभाते गए।
नरकासुर वध, श्रीकृष्ण

बेटा बलात्कारी निकल गया तो श्रीकृष्ण ने घर में घुस किया उसका वध : दिवाली की एक कथा ये भी

मॉं-बाप अच्छे हों तो जरूरी नहीं कि संतान भी सद्गुणी हो। वरना भूमि पुत्र भौमासुर अत्याचारी कैसे होता। बेटा ही जब स्त्रियों का सम्मान नहीं करे, तो क्या करना चाहिए? हिंदू धर्म ग्रंथ बताते हैं इसका भी रास्ता।
डोनाल्ड ट्रम्प, दिवाली

यह अँधकार पर प्रकाश की जीत का त्यौहार: ट्रम्प ने White House में मनाई दिवाली, हिन्दुओं को दी बधाई

ट्रम्प ने ख़ुद और अपनी पत्नी मेलेनिया की तरफ़ से लोगों को दिवाली की बधाई देते हुए कहा कि प्रकाश के इस त्यौहार को पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाएँ। ट्रम्प ने कहा कि प्रकाश की अँधकार के ऊपर जीत ही इस त्यौहार के मूल में है। उन्होंने हिन्दुओं, सिखों, जैनों और बौद्धों को शुभकामनाएँ दीं।
भारत में वामपंथी हर आतंकी घटना पर चुप रहते हैं

वामपंथी और जिहादी एक दूसरे के पर्याय हैं, इसीलिए अभी इनकी साथ-साथ सुलग रही है, पहचानिए इन्हें

भारत में हर जिहादी वामपंथी हो गया है, और वामपंथियों में तो जिहादियों की रक्तधारा तो है ही। इसलिए दोनों सुर में सुर मिला कर चलते हैं। एक जिहादी, जो स्वयं को वामपंथी कहता है, वो अचानक से अपने कपड़े उतार कर मुसलमान हो जाता है क्योंकि उसके मजहब को कुछ लोग कोस रहे हैं।
कमलेश तिवारी हत्याकांड

हिन्दू, मुसलमान से घृणा करने लगा है: कमलेश की हत्या के बाद वामपंथी हिन्दू को ही गुनहगार कह रहे हैं!

आपसी दुश्मनी में लोग कई बार क्रूरता की हदें पार कर देते हैं। लेकिन ये दुश्मनी आपसी नहीं थी। ये दुश्मनी तो एक हिंसक विचारधारा और मजहबी उन्माद से सनी हुई उस सोच से उत्पन्न हुई, जहाँ कोई फतवा जारी कर देता है, और लाख लोग किसी की हत्या करने के लिए, बेखौफ तैयार हो जाते हैं।
कमलेश तिवारी

प्रिय हिन्दुओ! कमलेश तिवारी की हत्या को ऐसे ही जाने मत दो, ये रहे दो विकल्प

कमलेश तिवारी की हत्या के बाद एक आम हिन्दू की तरह, आपकी तरह- मैं भी गुस्से में हूँ और व्यथित हूँ। समाधान तलाश रहा हूँ। मेरे 2 सुझाव हैं। अगर आप चाहते हैं कि इस गुस्से का हिन्दुओं के लिए कोई सकारात्मक नतीजा निकले, मेरे इन सुझावों को समझें।
राम मंदिर

राममंदिर पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने किया समझौता, दायर कर सकती है हलफनामा

मध्यस्थता पैनल ने कहा है कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड विवादित स्थल पर अपने दावे से पीछे हट गया है। इस संबंध में शीर्ष अदालत में वह हलफनामा दायर कर सकती है। हालॉंकि बोर्ड किन शर्तों पर राजी हुआ है, इस संबंध में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

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