शुद्धिकरण के बाद आसमीन का नाम आरती श्रीवास्तव रखा गया। इसके बाद आरती का जयवीर से वैदिक विधि विधान से विवाह सम्पन्न हुआ। दोनों ने अग्नि के सामने 7 फेरे लिए।
उन्होंने गलती का एहसास करवाने के लिए लोगों को धन्यवाद किया और आशा जताई है कि उनसे सब ऐसे ही जुड़े रहेंगे। बोले - "मैं नहीं चाहता कि किसी भी सनातनी का भरोसा टूटे।"